नोएडा: नोएडा शहर की तरह अब न्यू नोएडा में भी सेक्टर 13 नहीं बसाया जाएगा. नोएडा प्राधिकरण ने नए शहर के प्रशासनिक ढांचे में वर्क सर्कल नंबर 13 को शामिल नहीं करने का फैसला किया है. इसके बजाय न्यू नोएडा के विकास कार्यों को गति देने के लिए वर्क सर्कल नंबर 11, 12 और 14 बनाए जाएंगे. उत्तर प्रदेश के गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद और बुलंदशहर जिलों के करीब 80 गांवों की जमीन पर विकसित होने वाले इस शहर को दादरी-नोएडा-गाजियाबाद इन्वेस्टमेंट रीजन (DNGIR) के नाम से भी जाना जाता है.
हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, नोएडा प्राधिकरण नए सेक्टरों के विकास और शहरीकरण की प्रक्रिया को तेज करने के लिए प्रशासनिक तैयारियां कर रहा है. हालांकि, वर्क सर्कल नंबर 13 को छोड़ने के पीछे अधिकारियों ने कोई विशेष कारण नहीं बताया है.
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न्यू नोएडा में 11, 12 और 14 नंबर के होंगे वर्क सर्कल
नोएडा प्राधिकरण के ओएसडी क्रांति शेखर ने बताया कि पुराने नोएडा में 1 से 10 तक नंबर वाले 10 वर्क सर्कल हैं. न्यू नोएडा के लिए अब 11, 12 और 14 नंबर के वर्क सर्कल बनाए जाएंगे. दिलचस्प बात यह है कि पुराने नोएडा में भी सेक्टर 13 नहीं है. अब नए शहर के प्रशासनिक ढांचे में भी 13 नंबर को जगह नहीं दी गई है. हालांकि, यह फैसला किसी विशेष मान्यता या अन्य कारण से लिया गया है या नहीं, इस बारे में प्राधिकरण ने कोई आधिकारिक स्पष्टीकरण नहीं दिया है.
जमीन अधिग्रहण में तेजी, फील्ड स्टाफ की तैनाती
न्यू नोएडा परियोजना को आगे बढ़ाने के लिए प्राधिकरण ने अधिकारियों की जिम्मेदारियां बढ़ा दी हैं. जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया में तेजी लाने के लिए फील्ड स्टाफ तैनात किया गया है. इसके अलावा जमीन का सर्वे करने और रिपोर्ट तैयार करने के लिए तीन लेखपालों की भी नियुक्ति की गई है. परियोजना की निगरानी के लिए दो महाप्रबंधकों को जिम्मेदारी सौंपी गई है. वहीं, वरिष्ठ प्रबंधकों और प्रबंधकों को भी भूमि अधिग्रहण से जुड़े कार्यों की अतिरिक्त जिम्मेदारी दी जाएगी.
किसानों ने उठाए जमीन और धार्मिक स्थलों से जुड़े सवाल
न्यू नोएडा परियोजना को लेकर प्राधिकरण ने पिछले सप्ताह दादरी और बुलंदशहर के किसानों तथा ग्राम प्रधानों के साथ बैठकें की थीं. इन बैठकों में किसानों ने जमीन अधिग्रहण और गांवों के धार्मिक स्थलों के भविष्य को लेकर अपनी चिंताएं सामने रखीं.
परियोजना की निगरानी कर रहीं नोएडा प्राधिकरण की ओएसडी महिमा के मुताबिक, अधिकारियों ने किसानों को पुनर्वास और पुनर्स्थापन से जुड़े प्रावधानों की जानकारी दी. इन प्रावधानों का उद्देश्य परियोजना से प्रभावित परिवारों को अपनी आजीविका और जीवन दोबारा व्यवस्थित करने में मदद करना है.
किसानों की चिंताओं के बीच जमीन अधिग्रहण की प्रक्रिया को आगे बढ़ाना प्राधिकरण के लिए अहम होगा. इसके लिए किसानों के साथ बातचीत और पुनर्वास संबंधी नियमों की स्पष्ट जानकारी महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
किसानों को बढ़ा मुआवजा और 5% विकसित प्लॉट का लाभ
न्यू नोएडा परियोजना में जमीन देने वाले किसानों के लिए मुआवजे और विकसित प्लॉट का मुद्दा भी महत्वपूर्ण है. रिपोर्ट के अनुसार, प्राधिकरण ने पिछले महीने भूमि अधिग्रहण की एक श्रेणी में मुआवजे की दर 53 प्रतिशत बढ़ाई थी. इस श्रेणी के तहत पात्र किसानों को 5 प्रतिशत विकसित प्लॉट पाने का भी अधिकार है.
अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि न्यू नोएडा में मुआवजे और विकसित प्लॉट से जुड़े लाभ अलग-अलग चरणों के अनुसार निर्धारित होंगे. इसलिए प्रत्येक चरण में जमीन देने वाले किसानों को मिलने वाले लाभ संबंधित नियमों और पात्रता पर निर्भर करेंगे.
80 गांवों की जमीन पर विकसित होगा न्यू नोएडा
न्यू नोएडा यानी DNGIR को विकसित करने की योजना में गौतमबुद्धनगर, गाजियाबाद और बुलंदशहर के करीब 80 गांव शामिल हैं. इस परियोजना का उद्देश्य क्षेत्र में नियोजित शहरी विकास को आगे बढ़ाना है.
फिलहाल, प्राधिकरण प्रशासनिक ढांचे को व्यवस्थित करने, जमीन का सर्वे कराने और किसानों के साथ बातचीत के जरिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया तेज करने में जुटा है. आने वाले समय में नए वर्क सर्कल के गठन, भूमि अधिग्रहण और पुनर्वास से जुड़े फैसले न्यू नोएडा के विकास की दिशा तय करेंगे.
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