नितेश तिवारी के निर्देशन में बनी फिल्म रामायण अपने विशाल बजट, शानदार VFX और भव्य विजुअल्स के कारण पहली नजर में दर्शकों को प्रभावित करती है. रणबीर कपूर और यश जैसे बड़े सितारों से सजी यह फिल्म भारतीय महाकाव्य को बड़े पर्दे पर एक विशाल सिनेमाई अनुभव के रूप में पेश करने की कोशिश करती है. हालांकि, फिल्म की सबसे बड़ी ताकत उसका स्केल ही है और यही कई जगह उसकी सबसे बड़ी कमजोरी भी बन जाता है. लगातार दिखाए जाने वाले शानदार विजुअल्स के बीच कहानी और किरदारों की गहराई पीछे छूटती नजर आती है.
फिल्म की भव्यता शुरुआत से ही ध्यान खींचती है. उड़ते हुए हाथी, दौड़ते गैंडे, जंगली जानवरों से खींचे जाने वाले रथ और अलग-अलग रूप धारण करने वाले राक्षस कहानी को एक विशाल फैंटेसी दुनिया में ले जाते हैं. बड़े स्तर पर तैयार किए गए युद्ध के दृश्य और CGI का इस्तेमाल फिल्म को देखने में प्रभावशाली बनाते हैं. लेकिन लगातार इसी तरह के दृश्यों की भरमार कई बार कहानी के प्रवाह को प्रभावित करती है.
नितेश तिवारी की महत्वाकांक्षा, लेकिन कहानी में भावनात्मक गहराई कम
फिल्म का निर्देशन नितेश तिवारी ने किया है. उन्होंने श्रीधर राघवन के साथ मिलकर इसकी कहानी लिखी है. फिल्म को एक ऐसे महाकाव्य के रूप में पेश करने की कोशिश की गई है, जिसे भारतीय दर्शकों के साथ-साथ दुनिया भर के लोग भी समझ सकें.
हालांकि, इस कोशिश में रामायण के भीतर मौजूद दार्शनिक, मानवीय और भावनात्मक पहलुओं को पर्याप्त जगह नहीं मिल पाती. फिल्म में कई महत्वपूर्ण घटनाएं अलग-अलग बड़े दृश्यों के रूप में सामने आती हैं, लेकिन वे हमेशा एक-दूसरे से मजबूती से जुड़ती हुई महसूस नहीं होतीं. इस वजह से कहानी एक लगातार आगे बढ़ने वाले अनुभव के बजाय कई प्रभावशाली लेकिन अलग-अलग हिस्सों का संग्रह लगती है.
रणबीर कपूर का संयमित राम, यश का आक्रामक रावण
रणबीर कपूर भगवान राम की भूमिका में नजर आते हैं. फिल्म में उनका अभिनय गंभीर और संयमित है. वह किरदार की जरूरत के अनुसार अपने स्टारडम को पीछे रखने की कोशिश करते हैं. हालांकि, समीक्षा के मुताबिक उनमें राम के पारंपरिक स्वरूप की हर विशेषता नजर नहीं आती, लेकिन वह भूमिका के लिए जरूरी नियंत्रित ऊर्जा और गंभीरता जरूर दिखाते हैं.
दूसरी ओर, यश रावण के किरदार में बिल्कुल अलग अंदाज अपनाते हैं. यह उनकी पहली हिंदी फिल्म है और इस तरह की भूमिका में उनका यह नया रूप देखने को मिलता है. वह रावण की ताकत, अहंकार और विनाशकारी व्यक्तित्व को बड़े स्तर पर पेश करते हैं.
राम के रूप में रणबीर जहां संयमित अभिनय करते हैं, वहीं यश का रावण ज्यादा आक्रामक और प्रभावशाली दिखाई देता है. दोनों किरदारों के बीच यह अंतर फिल्म में अच्छाई और बुराई के संघर्ष को सामने लाता है.
साई पल्लवी और रवि दुबे का अभिनय प्रभावित करता है
फिल्म में अभिनय का स्तर हर जगह एक जैसा नहीं है. कुछ कलाकार अपने किरदारों को बेहतर तरीके से समझते हुए नजर आते हैं. साई पल्लवी सीता की भूमिका में हैं, जबकि रवि दुबे लक्ष्मण का किरदार निभा रहे हैं.
दोनों कलाकार पौराणिक पात्रों को मानवीय भावनाओं के साथ पेश करने की चुनौती को समझते हुए दिखाई देते हैं. उनका अभिनय फिल्म के बड़े और भव्य माहौल के बीच किरदारों को वास्तविक बनाए रखने में मदद करता है.
रणबीर कपूर को यश के मुकाबले ज्यादा स्क्रीन टाइम मिला है, लेकिन रावण के किरदार को भी अपनी ताकत दिखाने के लिए कई अहम दृश्य दिए गए हैं. इंटरवल के बाद विवेक ओबेरॉय के किरदार विद्युतजिह्वा के साथ उसका मुकाबला और जटायु के साथ हवाई युद्ध इसके उदाहरण हैं. जटायु को अनूपम खेर ने आवाज दी है.
4000 करोड़ रुपये का प्रोजेक्ट, दुनिया भर के दर्शकों पर नजर
रामायण करीब 4000 करोड़ रुपये का फिल्म प्रोजेक्ट है. इसका निर्माण नमित मल्होत्रा की Prime Focus Studios और यश की Monster Mind Creations ने किया है. फिल्म के इंटरनेशनल डिस्ट्रीब्यूशन की जिम्मेदारी Sony Pictures Entertainment के पास है.
फिल्म के संगीत की जिम्मेदारी हॉलीवुड के मशहूर संगीतकार Hans Zimmer और एआर रहमान ने संभाली है. Hans Zimmer के लिए यह पहला भारतीय प्रोजेक्ट बताया गया है.
फिल्म का उद्देश्य केवल भारतीय दर्शकों तक सीमित रहना नहीं, बल्कि इसे वैश्विक स्तर पर एक बड़े सिनेमाई अनुभव के रूप में पेश करना है. इसी वजह से कहानी के कई हिस्सों को विस्तार से समझाया गया है, ताकि अलग-अलग संस्कृतियों के दर्शक भी घटनाओं और किरदारों को आसानी से समझ सकें.
वाल्मीकि रामायण पर आधारित है कहानी, नया कुछ नहीं
फिल्म में शुरुआत में बताया गया है कि रामायण की कई अलग-अलग परंपराएं और संस्करण मौजूद हैं. इसके बावजूद फिल्म की कहानी मुख्य रूप से एक ही संस्करण पर आधारित रहती है. समीक्षा के अनुसार, कहानी के स्तर पर इसमें कुछ नया पेश नहीं किया गया है. इसकी असली चुनौती इस परिचित कथा को नए सिनेमाई अंदाज में दिखाने की थी.
फिल्म वाल्मीकि रामायण पर आधारित है. इसमें भगवान विष्णु के अवतार राम को ब्रह्मा द्वारा पृथ्वी पर भेजे जाने की कथा दिखाई गई है, ताकि रावण की तपस्या से पैदा हुए खतरे के बीच ब्रह्मांड को विनाश से बचाया जा सके.
फिल्म का पहला भाग राम की यात्रा को उस मुकाम तक लेकर जाता है, जहां रावण से युद्ध की जमीन तैयार होती है. इस संघर्ष का उद्देश्य सीता को रावण के कब्जे से छुड़ाना है. हालांकि, इस भाग में हनुमान का किरदार दिखाई नहीं देता. फिल्म के अंत में क्रेडिट्स में सनी देओल का नाम हनुमान के रूप में दिया गया है.
शानदार VFX के बावजूद कहानी की परतें रह जाती हैं पीछे
फिल्म की सिनेमैटोग्राफी पंकज कुमार और महेश लिमये ने की है. VFX और कैमरा वर्क फिल्म के सबसे मजबूत तकनीकी पक्षों में शामिल हैं. कई दृश्य इतने भव्य हैं कि वे दर्शकों को एक अलग दुनिया में ले जाने की क्षमता रखते हैं.
लेकिन समीक्षा की सबसे बड़ी शिकायत यही है कि फिल्म कई बार भव्यता को ही अपना मुख्य आकर्षण बना लेती है. रामायण जैसी कथा में धर्म, करुणा, त्याग, अहंकार और मानवीय संघर्ष की कई परतें हैं. इन पहलुओं को पर्याप्त गहराई से सामने लाने के बजाय फिल्म कई जगह बाहरी चमक-दमक पर ज्यादा निर्भर दिखाई देती है.
कुल मिलाकर, रामायण एक बड़े पैमाने पर बनाई गई विजुअल फिल्म है. इसके VFX, सिनेमैटोग्राफी और युद्ध के दृश्य प्रभावशाली हैं. रणबीर कपूर और यश अपने-अपने किरदारों में अलग-अलग अंदाज लेकर आते हैं. लेकिन कहानी की भावनात्मक गहराई और किरदारों की परतों को ज्यादा मजबूत बनाया जा सकता था. फिल्म आंखों को प्रभावित करती है, मगर हर जगह दिल और दिमाग पर वैसा असर नहीं छोड़ पाती.
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