रचनात्मकता और सामाजिक जागरूकता को एक साथ जोड़ने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने एक विशेष प्रतियोगिता शुरू की है. यदि आपको पोस्टर डिजाइनिंग, कला या सामाजिक विषयों पर काम करने का शौक है, तो यह अवसर आपके लिए बेहद खास हो सकता है. महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के तहत कार्यरत केंद्रीय दत्तक ग्रहण संसाधन प्राधिकरण (CARA) ने MyGov के सहयोग से “No Shortcuts to Parenthood – Poster Making Competition” लॉन्च की है.
यह प्रतियोगिता Adoption Awareness Month 2026 के तहत आयोजित की जा रही है. इसका मुख्य उद्देश्य लोगों को कानूनी गोद लेने की प्रक्रिया के बारे में जागरूक करना और अवैध गोद लेने की प्रथाओं के खिलाफ जनजागरूकता फैलाना है.
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क्या है यह प्रतियोगिता?
यह एक राष्ट्रीय स्तर की पोस्टर मेकिंग प्रतियोगिता है जिसमें प्रतिभागियों को कानूनी गोद लेने (Legal Adoption) से जुड़े विषयों पर प्रभावशाली पोस्टर तैयार करने होंगे. प्रतियोगिता का संदेश है – “No Shortcuts to Parenthood, Only Legal Adoption”.
सरकार का कहना है कि आज भी कई मामलों में लोग कानूनी प्रक्रिया को दरकिनार कर सीधे या अनौपचारिक तरीके से बच्चों को गोद लेने का प्रयास करते हैं, जिससे बच्चों के अधिकारों और सुरक्षा पर खतरा पैदा हो सकता है. इसी कारण जागरूकता बढ़ाने के लिए यह पहल शुरू की गई है.
किन विषयों पर बना सकते हैं पोस्टर?
प्रतियोगिता के लिए कुछ प्रमुख थीम निर्धारित की गई हैं:
- No Shortcuts to Parenthood – Only Legal Adoption
- Direct Adoption is Illegal – Choose the Legal Path
- Protecting Child Rights Through Legal Adoption
- Say No to Illegal Adoption Practices
प्रतिभागी इन विषयों को अपनी रचनात्मक सोच के साथ पोस्टर के रूप में प्रस्तुत कर सकते हैं.
क्यों जरूरी है कानूनी गोद लेना?
भारत में गोद लेने की प्रक्रिया को किशोर न्याय (बालकों की देखरेख और संरक्षण) अधिनियम 2015 और उसके संशोधनों के तहत विनियमित किया जाता है. कानूनी प्रक्रिया का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बच्चे का भविष्य सुरक्षित रहे और उसे एक उचित पारिवारिक वातावरण मिल सके.
विशेषज्ञों का मानना है कि अवैध या अनौपचारिक गोद लेने की प्रक्रियाएं बच्चों को शोषण, पहचान संबंधी समस्याओं और अन्य कानूनी जोखिमों के सामने ला सकती हैं. यही कारण है कि सरकार केवल अधिकृत माध्यमों से गोद लेने को बढ़ावा दे रही है.
प्रतियोगिता में कौन ले सकता है भाग?
यह प्रतियोगिता देशभर के नागरिकों के लिए खुली है. छात्र, कलाकार, ग्राफिक डिजाइनर, क्रिएटिव प्रोफेशनल और सामाजिक जागरूकता अभियानों में रुचि रखने वाले लोग इसमें भाग ले सकते हैं.
डिजिटल प्लेटफॉर्म के माध्यम से होने के कारण प्रतिभागी देश के किसी भी हिस्से से अपनी प्रविष्टि भेज सकते हैं.
कैसे होगा मूल्यांकन?
प्रतियोगिता में भेजी गई प्रविष्टियों का मूल्यांकन कई मानकों पर किया जाएगा:
- मौलिकता और रचनात्मकता
- संदेश की स्पष्टता
- सामाजिक प्रभाव
- दर्शकों से जुड़ाव
- विषय के अनुरूप प्रस्तुति
निर्णायक यह देखेंगे कि पोस्टर कानूनी गोद लेने के संदेश को कितनी प्रभावी तरीके से लोगों तक पहुंचाता है.
कितनी मिलेगी पुरस्कार राशि?
प्रतियोगिता के टॉप 15 विजेताओं को ₹3,000-₹3,000 का नकद पुरस्कार दिया जाएगा. इसके अलावा विजेता प्रविष्टियों को सरकारी जागरूकता अभियानों और आधिकारिक मंचों पर भी प्रदर्शित किया जा सकता है.
यह उन लोगों के लिए अच्छा अवसर है जो अपनी डिजाइनिंग क्षमता के साथ-साथ सामाजिक मुद्दों पर सकारात्मक प्रभाव छोड़ना चाहते हैं.
कब तक भेज सकते हैं प्रविष्टियां?
प्रतियोगिता 2 जून 2026 से शुरू हो चुकी है और इसमें भाग लेने की अंतिम तिथि 31 अक्टूबर 2026 निर्धारित की गई है. इच्छुक प्रतिभागियों को इस अवधि के भीतर MyGov पोर्टल पर अपनी प्रविष्टि जमा करनी होगी.
समाज में जागरूकता बढ़ाने की अनोखी पहल
आज के डिजिटल युग में पोस्टर और विजुअल कम्युनिकेशन किसी भी संदेश को तेजी से लोगों तक पहुंचाने का प्रभावी माध्यम बन चुके हैं. यही कारण है कि CARA और MyGov ने पोस्टर प्रतियोगिता को जागरूकता अभियान का हिस्सा बनाया है.
यह प्रतियोगिता केवल पुरस्कार जीतने का अवसर नहीं बल्कि बच्चों के अधिकारों और कानूनी गोद लेने के महत्व को समाज तक पहुंचाने का माध्यम भी है. यदि आपके पास रचनात्मक सोच है और आप किसी सामाजिक बदलाव का हिस्सा बनना चाहते हैं, तो यह प्रतियोगिता आपके लिए शानदार मौका साबित हो सकती है.
Source: MyGov India & Central Adoption Resource Authority (CARA) – No Shortcuts to Parenthood Poster Making Competition.


