डिजिटल अरेस्ट के नाम पर साइबर ठगी करने वाले लोग सरकारी अधिकारी और पुलिसकर्मी बनकर लोगों को डराते हैं. कभी आधार कार्ड को गंभीर अपराध से जोड़ने का दावा किया जाता है, तो कभी गिरफ्तारी और मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में फंसाने की धमकी दी जाती है. डर के कारण कई लोग अपनी जमा पूंजी तक ठगों के खातों में ट्रांसफर कर देते हैं. दिल्ली पुलिस की एक टीम ने ऐसे ही मामलों में बैंक खातों और पैसों के लेनदेन की कड़ियां जोड़कर पांच राज्यों में करीब 1.53 करोड़ रुपये की संभावित अतिरिक्त ठगी रुकवाने का दावा किया है.
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, फाइनेंशियल मॉनिटरिंग सेल (FMC) की प्रॉएक्टिव विक्टिम आइडेंटिफिकेशन एंड प्रोटेक्शन टीम ने संदिग्ध बैंक खातों और लेनदेन का विश्लेषण किया. इस दौरान ऐसे लोगों की पहचान हुई, जो कथित तौर पर साइबर ठगों के संपर्क में थे और उनसे लगातार पैसे मांगे जा रहे थे. पुलिस ने पीड़ितों, बैंकों और साइबर हेल्पलाइन की मदद से आगे रकम ट्रांसफर होने से रोकने के लिए हस्तक्षेप किया.
यह भी पढ़ें- World Menopause Day 2026: मेनोपॉज के दौरान सेहत का रखें ख्याल, लंबे समय तक दर्द को न करें नजरअंदाज
साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत से शुरू हुई जांच
दिल्ली पुलिस के अनुसार, इस कार्रवाई की शुरुआत साइबर हेल्पलाइन 1930 पर मिली शिकायत से हुई. 14 सितंबर को दिल्ली के सागरपुर में रहने वाले एक सेवानिवृत्त सैन्य अधिकारी को फोन आया. कॉल करने वालों ने खुद को भारतीय दूरसंचार नियामक प्राधिकरण (TRAI) का अधिकारी बताया.
कॉल करने वालों ने दावा किया कि उनके आधार कार्ड पर जारी सिम कार्ड और क्रेडिट कार्ड का इस्तेमाल कनाडा में गलत कामों के लिए किया गया है. इसके बाद उनकी वीडियो कॉल एक ऐसे व्यक्ति से कराई गई, जिसने खुद को IPS अधिकारी बताया. कथित तौर पर उन्हें मनी लॉन्ड्रिंग के मामले में गिरफ्तार करने की धमकी दी गई.
पुलिस के मुताबिक, घबराए हुए अधिकारी ने बैंक ऑफ बड़ौदा, ICICI बैंक और भारतीय स्टेट बैंक के खातों से बड़ी रकम ट्रांसफर कर दी. इस मामले में 29 सितंबर को ई-FIR दर्ज की गई.
बैंक खाते से सामने आए दूसरे पीड़ितों के मामले
शिकायत की जांच के दौरान पुलिस ने पीड़ित के ICICI बैंक खाते से हुए लेनदेन का विश्लेषण किया. इससे ट्रांसफर की गई रकम के हैदराबाद के एक एक्सिस बैंक खाते तक पहुंचने का पता चला. पुलिस के अनुसार, इस खाते का इस्तेमाल कथित तौर पर ठगी की रकम प्राप्त करने के लिए किया जा रहा था.
आगे की पड़ताल में पता चला कि 21 से 29 सितंबर के बीच पांच अन्य पीड़ितों ने भी इसी खाते में पैसे भेजे थे. पुलिस ने समय रहते इन लोगों से संपर्क किया और उन्हें आगे भुगतान करने से रोकने के लिए जरूरी मदद दी.
दिल्ली में 77 वर्षीय बुजुर्ग से मांगे जा रहे थे और पैसे
दिल्ली के नजफगढ़ में रहने वाले 77 वर्षीय सेवानिवृत्त एयरपोर्ट्स अथॉरिटी ऑफ इंडिया कर्मचारी 17 सितंबर से कथित तौर पर डिजिटल अरेस्ट के दबाव में थे. ठग उनसे तीन लाख रुपये और मांग रहे थे. उन पर सोना-चांदी गिरवी रखने का दबाव भी बनाया जा रहा था.
पुलिस के अनुसार, काउंसलिंग, हेल्पलाइन 1930 के जरिए सत्यापन और मौके पर पहुंची टीम की मदद से यह सिलसिला रोका गया. इस कार्रवाई से करीब 3.48 लाख रुपये की संभावित अतिरिक्त ठगी टली.
राजस्थान में घर गिरवी रखकर पैसे जुटाने का दबाव
राजस्थान में 80 वर्षीय कपड़ा कारोबारी अपनी पत्नी के साथ रहते हैं. पुलिस के मुताबिक, वह पहले ही 18 लाख रुपये दे चुके थे. इसके बावजूद ठग उनसे घर गिरवी रखकर 10 लाख रुपये और जुटाने के लिए कह रहे थे.
मामले में हस्तक्षेप करते हुए पुलिस ने राज्य की साइबर हेल्पलाइन से संपर्क कराया. इसके बाद कारोबारी को अतिरिक्त रकम देने से रोका गया.
उत्तर प्रदेश में दंपति की 10 लाख रुपये की FD बची
उत्तर प्रदेश में करीब 70 वर्ष के एक सेवानिवृत्त रेलवे कर्मचारी और उनकी पत्नी, जो पहले नर्स रह चुकी हैं, को कथित तौर पर बताया गया कि उनका आधार कार्ड एक बम धमाके के मामले से जुड़ा है.
पुलिस के अनुसार, दंपति पहले ही करीब 52 लाख रुपये दे चुके थे. आगे उनसे रकम जुटाने की कोशिश की जा रही थी. पुलिस के हस्तक्षेप से उनकी 10 लाख रुपये की फिक्स्ड डिपॉजिट (FD) तुड़वाने की प्रक्रिया रुकवाई गई.
महाराष्ट्र और गुजरात में भी बड़ी रकम ट्रांसफर होने से रोकी
महाराष्ट्र में 65 वर्षीय अस्पताल सहायक कथित तौर पर 15 दिनों से डिजिटल अरेस्ट के दबाव में थे. वह करीब 85 लाख रुपये गंवा चुके थे. पुलिस ने परिवार की फिक्स्ड डिपॉजिट से जुड़ी आगे की रकम की मांग के मामले में हस्तक्षेप किया. पुलिस के मुताबिक, इससे 55 लाख रुपये की अतिरिक्त मांग के कारण होने वाला संभावित नुकसान रोका गया.
वहीं, गुजरात में 50 वर्षीय कारोबारी ने निवेश समझकर 25 लाख रुपये ट्रांसफर कर दिए थे. उन्हें कुल एक करोड़ रुपये निवेश करने के लिए राजी किया जा रहा था. पुलिस के अनुसार, समय पर संपर्क किए जाने से बाकी 75 लाख रुपये भेजने से उन्हें रोक लिया गया.
बुजुर्गों को कैसे निशाना बनाते हैं डिजिटल अरेस्ट ठग?
दिल्ली पुलिस के मुताबिक, इन मामलों में चार पीड़ित 65 से 80 वर्ष की उम्र के थे. इनमें से कई अकेले रहते थे. ठगों ने कथित तौर पर सरकारी एजेंसियों, पुलिस अधिकारियों और गंभीर आपराधिक मामलों का डर दिखाकर लोगों से पैसे ट्रांसफर करवाने की कोशिश की.
डिजिटल अरेस्ट के ऐसे मामलों में ठग वीडियो कॉल पर खुद को पुलिस या किसी सरकारी एजेंसी का अधिकारी बताते हैं. फिर गिरफ्तारी, जांच या कानूनी कार्रवाई की धमकी देकर पीड़ित को लगातार संपर्क में रखते हैं. कई बार उन्हें परिवार और दूसरे लोगों से बात करने से रोकने की भी कोशिश की जाती है.
इस दौरान पीड़ितों से बैंक खातों में पैसे ट्रांसफर करने, जमा रकम निकालने या संपत्ति गिरवी रखकर पैसा जुटाने के लिए कहा जा सकता है. डर और दबाव के कारण लोग अपनी बचत गंवा सकते हैं.
डिजिटल अरेस्ट के नाम पर कॉल आए तो क्या करें?
दिल्ली पुलिस ने दोहराया है कि कानून में ‘डिजिटल अरेस्ट’ नाम की कोई प्रक्रिया नहीं है. कोई वास्तविक सरकारी अधिकारी वीडियो कॉल पर इस तरह पैसे जमा करने की मांग नहीं करता.
यदि कोई व्यक्ति पुलिस, TRAI या किसी अन्य सरकारी एजेंसी का अधिकारी बनकर गिरफ्तारी की धमकी दे और पैसे ट्रांसफर करने को कहे, तो घबराकर भुगतान न करें. बातचीत रोकें, अपने बैंक से संपर्क करें और साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत करें. परिवार के किसी भरोसेमंद सदस्य को भी स्थिति के बारे में बताएं.
दिल्ली पुलिस की इस कार्रवाई में बैंक लेनदेन की जांच से दूसरे संभावित पीड़ितों तक पहुंचने में मदद मिली. यह मामला दिखाता है कि समय पर शिकायत, बैंकिंग लेनदेन की निगरानी और पुलिस की मदद से ठगी की आगे की कोशिशों को रोका जा सकता है.
यह भी पढ़ें- मेरठ के इन 3 प्रमुख रास्तों पर घर-दुकान का नक्शा पास कराना होगा महंगा! MDA ला रहा नया नियम


