UP News: होली हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है, जिसे पूरे देश में रंग, उमंग और भाईचारे के साथ मनाया जाता है. वर्ष 2026 में रंगों की होली 4 मार्च, बुधवार को मनाई जाएगी, जबकि होलिका दहन 3 मार्च, मंगलवार को होगा. फाल्गुन पूर्णिमा तिथि 2 मार्च 2026 को शाम 5:55 बजे से शुरू होकर 3 मार्च को शाम 4:40 बजे तक रहेगी. भद्रा काल 2 मार्च की शाम 5:55 बजे से 3 मार्च की सुबह 5:32 बजे तक रहेगा. शास्त्रों के अनुसार भद्रा में शुभ कार्य वर्जित होते हैं, इसलिए होलिका दहन भद्रा समाप्ति के बाद किया जाएगा.
‘प्रहलाद नगरी’ कहलाता है हरदोई
उत्तर प्रदेश के हरदोई जिला को ‘प्रहलाद नगरी’ के नाम से जाना जाता है. मान्यता है कि यहीं वह पवित्र स्थल मौजूद है, जहां भक्त प्रहलाद को लेकर होलिका अग्निकुंड में बैठी थीं और स्वयं भस्म हो गई थीं. यहां स्थित ‘प्रहलाद कुंड’ को वही स्थान माना जाता है. हर साल होली के अवसर पर हजारों श्रद्धालु यहां दर्शन के लिए पहुंचते हैं और आस्था की डोर से जुड़ते हैं.
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क्या है पौराणिक कथा?
पौराणिक कथाओं के अनुसार असुरराज हिरण्यकश्यप ने भगवान विष्णु से द्वेष के कारण अपने ही पुत्र प्रहलाद को कई बार मृत्यु देने का प्रयास किया. लेकिन हर बार भगवान विष्णु की कृपा से प्रहलाद सुरक्षित बच गए. जबकि हिरण्यकश्यप की बहन होलिका, जिसे अग्नि से न जलने का वरदान प्राप्त था, प्रहलाद को गोद में लेकर अग्निकुंड में बैठ गई. किंतु भगवान विष्णु की कृपा से प्रहलाद बच गए और होलिका जलकर भस्म हो गई.
बाद में भगवान विष्णु ने नरसिंह अवतार लेकर खंभे से प्रकट होकर हिरण्यकश्यप का वध किया और भक्त की रक्षा की.
हरदोई नाम की पृष्ठभूमि
मान्यता है कि प्राचीन काल में यह क्षेत्र हिरण्यकश्यप की राजधानी था. भगवान विष्णु के प्रति द्वेष के कारण उसने इसका नाम ‘हरिद्रोही’ रखा था, जिसका अर्थ है ‘हरि का द्रोही’. समय के साथ यही शब्द बदलकर ‘हरिदई’ और फिर हरदोई हो गया. इसी ऐतिहासिक और पौराणिक पृष्ठभूमि के कारण हरदोई की पहचान ‘प्रहलाद नगरी’ के रूप में स्थापित हुई.
होली का पौराणिक आधार
होलिका दहन की घटना को ही होली पर्व का मूल स्रोत माना जाता है. यह पर्व बुराई पर अच्छाई की जीत का प्रतीक है. प्रहलाद की भक्ति और भगवान विष्णु की कृपा की स्मृति में हर साल होलिका दहन किया जाता है.
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हरदोई में होली के अवसर पर विशेष धार्मिक आयोजन, पूजा-अर्चना और मेले का आयोजन होता है. यहां का ‘प्रहलाद कुंड’ आज भी आस्था, इतिहास और पौराणिक मान्यताओं का जीवंत प्रतीक बना हुआ है.


