Fatehgarh Link Expressway: उत्तर प्रदेश में एक्सप्रेस-वे नेटवर्क को मजबूत करने की दिशा में फतेहगढ़ लिंक एक्सप्रेस-वे परियोजना को गति मिलने जा रही है.गंगा एक्सप्रेस-वे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे को जोड़ने वाले करीब 90 किलोमीटर लंबे लिंक एक्सप्रेस-वे का निर्माण जल्द शुरू होने की तैयारी है.परियोजना के लिए करीब 7,488 करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं.
तीन साल में पूरा होगा निर्माण, पांच साल तक रखरखाव करेगी एजेंसी
प्रदेश सरकार की कैबिनेट बैठक में निर्माण एजेंसी के चयन के बाद परियोजना को तीन वर्ष में पूरा कराने का निर्णय लिया गया है.निर्माण कार्य पूरा होने के बाद संबंधित एजेंसी पांच वर्ष तक एक्सप्रेस-वे का अनुरक्षण यानी रखरखाव भी करेगी.इस परियोजना के पूरा होने से मध्य उत्तर प्रदेश में सड़क कनेक्टिविटी बेहतर होने की उम्मीद है.साथ ही, यात्रियों को कई प्रमुख एक्सप्रेस-वे के बीच आवागमन के लिए अधिक सीधा और सुविधाजनक मार्ग मिल सकेगा.
हरदोई से इटावा तक जुड़ेगा लिंक एक्सप्रेस-वे
प्रस्तावित लिंक एक्सप्रेस-वे को हरदोई जिले के सवायजपुर के पास गंगा एक्सप्रेस-वे से जोड़ा जाएगा.वहीं, इसका दूसरा सिरा इटावा जिले के कुदरेल के पास आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे से जुड़ेगा.इस तरह यह मार्ग क्षेत्र के सड़क नेटवर्क को नई कनेक्टिविटी देगा.इसके अलावा बुंदेलखंड एक्सप्रेस-वे तक पहुंचने के लिए भी एक कनेक्टिविटी रूट उपलब्ध होने की उम्मीद है.
90 प्रतिशत जमीन का बैनामा पूरा
लिंक एक्सप्रेस-वे के निर्माण के लिए भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया भी चल रही है.प्रशासन ने विशेष कैंप लगवाकर करीब 90 प्रतिशत जमीन का बैनामा करा लिया है.शेष जमीन के लिए भी प्रक्रिया आगे बढ़ाई जा रही है.जो ग्रामीण जमीन देने के लिए तैयार नहीं हैं, उनसे जमीन लेने के लिए भी प्रशासन स्तर पर तैयारी की जा रही है.भूमि संबंधी प्रक्रिया पूरी होने के बाद परियोजना के निर्माण कार्य को आगे बढ़ाने में मदद मिलेगी.
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बड़े शहरों और धार्मिक स्थलों तक सफर होगा आसान
लिंक एक्सप्रेस-वे बनने से जिले के लोगों को आवागमन में सुविधा मिलने की उम्मीद है.गंगा एक्सप्रेस-वे और आगरा-लखनऊ एक्सप्रेस-वे के बीच सीधा संपर्क बनने से मध्य उत्तर प्रदेश के साथ-साथ देश के कई बड़े महानगरों और धार्मिक स्थलों तक पहुंचना आसान हो सकता है.करीब 7,488 करोड़ रुपये की इस परियोजना से क्षेत्रीय कनेक्टिविटी को मजबूती मिलने के साथ यात्रा के समय में भी कमी आने की संभावना है.अब निर्माण एजेंसी के चयन, जमीन संबंधी प्रक्रिया और अन्य तैयारियों के बाद परियोजना के धरातल पर उतरने का इंतजार है.


