Buxar Railway Station News: बिहार के बक्सर रेलवे स्टेशन पर करीब 100 एकड़ रेलवे भूमि उपलब्ध होने के बावजूद यहां से लंबी दूरी की नई ट्रेनों का परिचालन शुरू करने में तकनीकी ढांचे की कमी बाधा बनी हुई है. वाशिंग पिट, कोचिंग मेंटेनेंस डिपो और स्टेबलिंग लाइन जैसी सुविधाएं अब तक विकसित नहीं हो सकी हैं. ऐसे में दिल्ली, मुंबई, दक्षिण भारत और पूर्वोत्तर के लिए बक्सर से नई ट्रेनों की शुरुआत की मांग लंबे समय से उठ रही है.
100 एकड़ जमीन, लेकिन जरूरी सुविधाओं का इंतजार
हावड़ा-नई दिल्ली मुख्य रेलमार्ग पर बिहार और उत्तर प्रदेश की सीमा के निकट स्थित बक्सर स्टेशन पूर्व मध्य रेलवे के दानापुर मंडल का महत्वपूर्ण स्टेशन है. इसके आसपास रेलवे की पर्याप्त खाली जमीन होने के बावजूद ट्रेन के रखरखाव और परिचालन से जुड़ा जरूरी बुनियादी ढांचा तैयार नहीं हुआ है.
किसी ट्रेन को उसके शुरुआती स्टेशन से नियमित रूप से चलाने के लिए कोचों की जांच, सफाई और रखरखाव की व्यवस्था जरूरी होती है. इसके लिए वाशिंग पिट, कैरिज एंड वैगन मेंटेनेंस सुविधा और स्टेबलिंग लाइन की जरूरत पड़ती है. बक्सर में इन सुविधाओं की कमी और प्लेटफॉर्म की सीमित उपलब्धता को नई ट्रेनों की शुरुआत में बड़ी चुनौती बताया जा रहा है.
2017 में संसद में उठी थी वाशिंग पिट और कोचिंग कॉम्प्लेक्स की मांग
बक्सर में रेलवे सुविधाओं के विस्तार का मुद्दा पहले भी संसद में उठ चुका है. 16 मार्च 2017 को तत्कालीन सांसद अश्विनी कुमार चौबे ने लोकसभा में नियम 377 के तहत रेलवे की करीब 100 एकड़ जमीन पर वाशिंग पिट, आधुनिक कोचिंग कॉम्प्लेक्स और स्टेबलिंग लाइन बनाने की मांग रखी थी.
इसका उद्देश्य बक्सर से नई ट्रेनों का परिचालन शुरू करने के साथ पटना और दानापुर जैसे प्रमुख टर्मिनलों पर परिचालन का दबाव कम करना था. बक्सर की सड़क, रेल और जलमार्ग से जुड़ी स्थिति को देखते हुए इसे परिवहन केंद्र के रूप में विकसित करने की मांग भी उठाई गई थी.
सांसद और विधायक भी उठा चुके हैं मुद्दा
वर्ष 2024 से वर्तमान सांसद सुधाकर सिंह की ओर से भी बक्सर स्टेशन के विस्तार, यात्री सुविधाओं और रेल सुरक्षा से जुड़े मुद्दे संसद में उठाए जाते रहे हैं. सदर विधायक आनंद मिश्रा ने भी इस संबंध में रेल मंत्री और रेलवे बोर्ड को पत्र लिखा है. हालांकि, उपलब्ध जानकारी के अनुसार, वाशिंग पिट और आधुनिक कोचिंग कॉम्प्लेक्स के निर्माण को लेकर अब तक कोई स्पष्ट सकारात्मक आश्वासन सामने नहीं आया है.
रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण की भी चिंता
बक्सर रेलवे स्टेशन और आसपास के इलाकों में खाली रेलवे भूमि के उपयोग को लेकर भी सवाल उठ रहे हैं. रेलवे कॉलोनी से सटी मित्रलोक कॉलोनी में रेलवे की जमीन पर अतिक्रमण कर नए मकान बनाए जाने की बात सामने आई है. इसके अलावा कमरपुर से नदांव हॉल्ट तक रेलवे लाइन के दोनों ओर पर्याप्त जमीन उपलब्ध होने का दावा किया जा रहा है. इस क्षेत्र में वाशिंग पिट और कोचिंग कॉम्प्लेक्स विकसित करने की संभावनाओं पर विचार किया जा सकता है. हालांकि, इसके लिए जमीन की वास्तविक स्थिति, तकनीकी व्यवहार्यता और रेलवे की आधिकारिक योजना का आकलन जरूरी होगा.
नई रेल लाइनों से बढ़ेगा बक्सर का महत्व
गाजीपुर-कर्मा-भदौरा रेल बाईपास और नेउरा-दनियावां रेल बाईपास जैसी परियोजनाओं के पूरा होने पर बक्सर और आसपास के रेल नेटवर्क की कनेक्टिविटी में बदलाव की संभावना है. वहीं, रेलवे की ओर से बलिया, गाजीपुर और आरा जैसे स्टेशनों के साथ छोटे स्टेशनों और हॉल्ट के विकास पर भी काम किया जा रहा है. ऐसे में बक्सर में तकनीकी सुविधाओं का विस्तार होने से क्षेत्रीय रेल परिचालन और लंबी दूरी की ट्रेन सेवाओं के लिए नए विकल्प खुल सकते हैं.
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चार-लाइन कॉरिडोर और मास्टर प्लान से उम्मीद
बक्सर-लखीसराय चार-लाइन कॉरिडोर परियोजना के तहत तीसरी और चौथी रेल लाइन विकसित करने की योजना को भी क्षेत्र के भविष्य के रेल नेटवर्क से जोड़कर देखा जा रहा है. इससे रेल परिचालन क्षमता बढ़ाने में मदद मिल सकती है, हालांकि बक्सर से नई ट्रेनें शुरू करने के लिए आवश्यक रखरखाव सुविधाओं का निर्माण भी महत्वपूर्ण रहेगा. खबर में दी गई जानकारी के मुताबिक, रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव ने 29 जुलाई को संसद में बताया था कि बक्सर के लिए दीर्घकालिक मास्टर प्लान तैयार किया जा रहा है. इसके तहत तकनीकी व्यवहार्यता, फंड और परिचालन संबंधी जरूरतों के आधार पर चरणबद्ध विकास किया जाना है. अब बक्सर के लोगों की नजर इस मास्टर प्लान के तहत होने वाले फैसलों पर है. यदि जरूरी तकनीकी ढांचा विकसित होता है, तो भविष्य में यहां से लंबी दूरी की नई ट्रेनों के परिचालन की संभावनाएं बढ़ सकती हैं.


