श्रम एवं रोजगार मंत्रालय के अंतर्गत कर्मचारी भविष्य निधि संगठन (EPFO) ने नियोक्ताओं के लिए VISHWAS 2026 नामक एक विशेष एकमुश्त विवाद समाधान योजना शुरू की है. इस योजना का उद्देश्य EPF से जुड़े डैमेज और पेनाल्टी मामलों का सौहार्दपूर्ण, पारदर्शी और समयबद्ध समाधान करना है.
सरकार का कहना है कि इस पहल से लंबित मामलों में कमी आएगी, स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा और कर्मचारियों के हितों की सुरक्षा भी सुनिश्चित होगी.
29 जून 2026 से लागू हुई योजना
EPFO के अनुसार VISHWAS 2026 को 29 जून 2026 से लागू किया गया है. यह योजना अधिसूचना जारी होने की तारीख से छह महीने तक प्रभावी रहेगी.
यह योजना EPF Scheme, 2026 के तहत अधिसूचित की गई है और इसमें पूरी प्रक्रिया डिजिटल माध्यम से पूरी की जाएगी.
योजना का मुख्य उद्देश्य
VISHWAS 2026 का मकसद उन मामलों का तेजी से निपटारा करना है, जो वर्षों से पेनाल्टी या डैमेज से संबंधित विवादों के कारण लंबित हैं.
इस योजना से:
- स्वैच्छिक अनुपालन को बढ़ावा मिलेगा.
- लंबित मुकदमों की संख्या कम होगी.
- नियोक्ताओं को विवाद समाप्त करने का एकमुश्त अवसर मिलेगा.
- कर्मचारियों के सामाजिक सुरक्षा अधिकार सुरक्षित रहेंगे.
- पूरी प्रक्रिया डिजिटल और पारदर्शी होगी.
किन मामलों को मिलेगा योजना का लाभ?
EPFO ने योजना के तहत चार प्रमुख श्रेणियों के मामलों को शामिल किया है.
1. अदालत में लंबित मामले
ऐसे मामले जिनमें डैमेज या पेनाल्टी के आदेश के खिलाफ न्यायालय या न्यायिक मंच पर अपील लंबित है.
2. अंतिम आदेश लेकिन वसूली लंबित
वे मामले जिनमें अंतिम आदेश जारी हो चुका है लेकिन पूरी राशि की वसूली अभी बाकी है या आंशिक वसूली हुई है. इसमें Recovery Certificate (RRC) वाले मामले भी शामिल हैं.
3. नोटिस जारी लेकिन अंतिम आदेश नहीं
ऐसे मामले जिनमें डैमेज या पेनाल्टी का नोटिस जारी हो चुका है लेकिन अंतिम आदेश अभी पारित नहीं हुआ है.
4. नोटिस जारी होना बाकी
वे मामले जिनमें अभी तक डैमेज या पेनाल्टी का नोटिस भी जारी नहीं किया गया है.
कम दरों पर होगी पेनाल्टी की पुनर्गणना
VISHWAS 2026 के तहत 14 जून 2024 से पहले के डिफॉल्ट मामलों में डैमेज और पेनाल्टी की दोबारा गणना कम दरों पर की जाएगी.
नई दरें इस प्रकार हैं:
- 2 महीने तक के डिफॉल्ट पर – 0.25% प्रति माह
- 2 महीने से 4 महीने से कम तक – 0.50% प्रति माह
- 4 महीने से अधिक के डिफॉल्ट पर – 1% प्रति माह
सरकार का मानना है कि इससे अधिक से अधिक नियोक्ता पुराने विवादों का समाधान कराने के लिए आगे आएंगे.
आवेदन करने से पहले पूरी करनी होगी यह शर्त
योजना का लाभ लेने के लिए नियोक्ताओं को आवेदन से पहले धारा 7Q (या सामाजिक सुरक्षा संहिता की धारा 127) के तहत देय पूरा ब्याज जमा करना होगा.
इसके अलावा आवेदन के साथ यह घोषणा भी देनी होगी कि जिस विवाद का निपटारा इस योजना के तहत होगा, उसके संबंध में आगे कोई अपील नहीं की जाएगी.
किन मामलों को नहीं मिलेगा लाभ?
EPFO ने कुछ मामलों को योजना से बाहर रखा है.
इनमें शामिल हैं:
- जिन मामलों में पूरी पेनाल्टी या डैमेज पहले ही वसूल किया जा चुका है.
- धोखाधड़ी, गबन या रिकॉर्ड में जानबूझकर हेरफेर से जुड़े मामले.
- ऐसे मामले जिनमें वैधानिक ब्याज पूरी तरह जमा नहीं किया गया है.
पूरी प्रक्रिया होगी ऑनलाइन
VISHWAS 2026 के लिए आवेदन EPFO Employer Portal पर ऑनलाइन करना होगा.
आवेदन के लिए:
- Digital Signature Certificate (DSC) या
- e-Sign
का उपयोग किया जा सकेगा.
पूरी प्रक्रिया में ऑनलाइन आवेदन, डिजिटल सत्यापन, इलेक्ट्रॉनिक प्रोसेसिंग और तय समयसीमा के भीतर निपटारा किया जाएगा.
सहायता के लिए बनेंगे VISHWAS सेल
योजना के प्रभावी क्रियान्वयन के लिए EPFO ने देशभर के अपने जोनल, क्षेत्रीय और जिला कार्यालयों में VISHWAS Cells स्थापित करने का निर्णय लिया है.
ये सेल नियोक्ताओं की सहायता करेंगे, आवेदन तेजी से निपटाएंगे और समयबद्ध समाधान सुनिश्चित करेंगे. इसके अलावा मुख्यालय और जोनल स्तर पर योजना की नियमित निगरानी भी की जाएगी.
EPFO ने नियोक्ताओं से की अपील
EPFO ने सभी पात्र नियोक्ताओं से अपील की है कि वे इस एकमुश्त अवसर का लाभ उठाएं, लंबित विवादों का समाधान करें और सामाजिक सुरक्षा प्रणाली को अधिक प्रभावी एवं मुकदमेबाजी मुक्त बनाने में सहयोग दें.
FAQs
1. VISHWAS 2026 क्या है?
यह EPFO की एक बार की विवाद समाधान योजना है, जिसके तहत डैमेज और पेनाल्टी से जुड़े लंबित मामलों का समाधान किया जाएगा.
2. यह योजना कितने समय तक लागू रहेगी?
यह योजना 29 जून 2026 से लागू है और अधिसूचना की तारीख से छह महीने तक प्रभावी रहेगी.
3. आवेदन कैसे किया जाएगा?
आवेदन EPFO Employer Portal पर ऑनलाइन किया जाएगा. इसके लिए DSC या e-Sign का उपयोग करना होगा.
4. किन मामलों को योजना का लाभ नहीं मिलेगा?
पूरी तरह वसूले जा चुके मामलों, धोखाधड़ी या रिकॉर्ड में हेरफेर वाले मामलों तथा जहां पूरा वैधानिक ब्याज जमा नहीं किया गया है, उन्हें इस योजना का लाभ नहीं मिलेगा.
Source: Ministry of Labour & Employment


