हिमाचल प्रदेश में मेडिकल की उच्च शिक्षा और विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने की दिशा में केंद्र सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. केंद्रीय स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्री जगत प्रकाश नड्डा ने राज्य के छह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 320 नई स्नातकोत्तर यानी पीजी मेडिकल सीटें बढ़ाने के प्रस्ताव को मंजूरी दिए जाने की घोषणा की है. इसके लिए भारत सरकार करीब 415 करोड़ रुपये का अनुदान देगी.
इस फैसले से हिमाचल प्रदेश के मेडिकल विद्यार्थियों को अपने राज्य में ही विशेषज्ञता की पढ़ाई करने के अधिक अवसर मिलने की उम्मीद है. साथ ही, विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ने से प्रदेश के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सेवाएं उपलब्ध कराने में मदद मिल सकती है.
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छह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में बढ़ेंगी 320 पीजी सीटें
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री जगत प्रकाश नड्डा के अनुसार, हिमाचल प्रदेश सरकार की ओर से 23 जून 2026 को नई पीजी मेडिकल सीटों के संबंध में प्रस्ताव मिला था. इसके बाद 6 अक्टूबर को एम्स बिलासपुर के दीक्षांत समारोह के दौरान मुख्यमंत्री के साथ भी इस विषय पर चर्चा हुई.
अब केंद्र सरकार ने प्रस्तावित सभी 320 सीटों को मंजूरी दे दी है. इसके लिए करीब 415 करोड़ रुपये का अनुदान दिया जाएगा. नड्डा ने कहा कि केंद्र सरकार ने प्रस्ताव पर तेजी से काम करते हुए मंजूरी दी है. उन्होंने राज्य सरकार से भी जरूरी कदम तेजी से उठाने का आग्रह किया, ताकि विद्यार्थियों और आम लोगों को जल्द लाभ मिल सके.
किस मेडिकल कॉलेज को कितनी नई सीटें मिलेंगी?
हिमाचल प्रदेश के छह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में सीटों का प्रस्तावित वितरण इस प्रकार है.
| मेडिकल कॉलेज का स्थान | नई पीजी सीटें |
|---|---|
| शिमला | 91 |
| टांडा | 57 |
| हमीरपुर | 57 |
| मंडी | 55 |
| नाहन | 32 |
| चंबा | 28 |
| कुल | 320 |
इन सीटों के बढ़ने से मेडिकल की उच्च शिक्षा के लिए राज्य में उपलब्ध अवसरों का विस्तार हो सकता है. हालांकि, नई सीटों पर पढ़ाई शुरू होने का समय संबंधित कॉलेजों में जरूरी तैयारियों और आगे की प्रक्रिया पर निर्भर करेगा.
सर्जरी से लेकर कैंसर उपचार तक विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ाने पर जोर
नई पीजी सीटों का उद्देश्य केवल मेडिकल शिक्षा के अवसर बढ़ाना नहीं है, बल्कि विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता को मजबूत करना भी है. प्रस्ताव के तहत सर्जरी, हड्डी रोग, स्त्री एवं प्रसूति रोग, बाल रोग और कैंसर सहित कई क्षेत्रों में विशेषज्ञ डॉक्टरों की संख्या बढ़ाने में मदद मिलने की उम्मीद है.
विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता बढ़ने से प्रदेश में स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने में सहायता मिल सकती है. इससे मरीजों को अलग-अलग विशेषज्ञताओं में उपचार उपलब्ध कराने की क्षमता मजबूत करने का अवसर मिलेगा.
हालांकि, स्वास्थ्य सेवाओं पर इसका वास्तविक प्रभाव इस बात पर भी निर्भर करेगा कि नई सीटों पर प्रशिक्षण कब शुरू होता है और प्रशिक्षित डॉक्टरों की उपलब्धता किस तरह बढ़ती है.
देशभर में 10 हजार नई मेडिकल सीटें बढ़ाने की योजना
नड्डा ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में पिछले 12 वर्षों के दौरान देश में मेडिकल शिक्षा के विस्तार के लिए कई कदम उठाए गए हैं. इसी क्रम में केंद्र सरकार ने अगले पांच वर्षों में देशभर में 10,000 नई स्नातक और स्नातकोत्तर मेडिकल सीटें बढ़ाने की योजना को मंजूरी दी है.
इस योजना की कुल लागत 15,000 करोड़ रुपये बताई गई है. हिमाचल प्रदेश के छह सरकारी मेडिकल कॉलेजों में 320 नई पीजी सीटों की मंजूरी को भी इसी योजना का हिस्सा बताया गया है.
इस पहल के तहत मेडिकल शिक्षा की क्षमता बढ़ाने और विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है.
हिमाचल सरकार से परियोजनाओं में तेजी लाने का आग्रह
केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्री ने राज्य सरकार से नई पीजी सीटों को समय पर शुरू करने के लिए आवश्यक कदम उठाने की अपील की. उन्होंने हिमाचल प्रदेश में केंद्र सरकार के सहयोग से चल रही अन्य विकास परियोजनाओं में भी तेजी लाने की जरूरत बताई.
नड्डा ने चंडीगढ़-बद्दी और भानुपल्ली-बिलासपुर रेल परियोजनाओं का उल्लेख करते हुए राज्य सरकार की हिस्सेदारी और जमीन से जुड़े लंबित मामलों का जल्द समाधान करने का आग्रह किया.
इसके अलावा, केंद्र सरकार की मदद से बनाए जा रहे क्रिटिकल केयर ब्लॉक्स और जन स्वास्थ्य प्रयोगशालाओं के काम में भी तेजी लाने की जरूरत बताई गई.
हिमाचल में मेडिकल शिक्षा और स्वास्थ्य सुविधाओं को मजबूत करने पर जोर
नड्डा ने कहा कि हिमाचल प्रदेश के लोगों के हित से जुड़े विकास कार्यों में देरी नहीं होनी चाहिए. उन्होंने कहा कि केंद्र सरकार राज्य के विकास के लिए हर संभव सहयोग दे रही है और राज्य सरकार से भी परियोजनाओं को प्राथमिकता देने की अपेक्षा है.
320 नई पीजी मेडिकल सीटों की मंजूरी से हिमाचल प्रदेश में विशेषज्ञ चिकित्सा शिक्षा के विस्तार का रास्ता खुला है. अब इन सीटों को समय पर शुरू करने के लिए आगे की तैयारियां महत्वपूर्ण होंगी. इससे मेडिकल विद्यार्थियों को उच्च शिक्षा के अधिक अवसर मिलने और भविष्य में प्रदेश की विशेषज्ञ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने में मदद मिलने की उम्मीद है.
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