स्कूलों में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की समझ विकसित करने के लिए राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान और प्रशिक्षण परिषद (NCERT) ने कक्षा 9 से 12 तक के विद्यार्थियों के लिए 20 घंटे का शुरुआती मॉड्यूल जारी किया है. इसमें छात्रों को रोजमर्रा की जिंदगी में AI के इस्तेमाल, मशीनों के सीखने की प्रक्रिया, डीपफेक की पहचान, डेटा प्राइवेसी और AI टूल्स के जिम्मेदार इस्तेमाल के बारे में सिखाया जाएगा.
यह मॉड्यूल कंप्यूटेशनल थिंकिंग (CT) और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस पर आधारित है. इसे भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान मद्रास (IIT Madras), IIT जोधपुर और NCERT के शिक्षकों ने मिलकर विकसित किया है. इसका उद्देश्य छात्रों को यह समझने में मदद करना है कि AI कैसे काम करता है, उसकी सीमाएं क्या हैं और उसके जवाबों पर आंख बंद करके भरोसा करने के बजाय उनकी जांच कैसे की जाए.
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राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP) 2020 के अनुरूप तैयार इस मॉड्यूल को ऐसे विद्यार्थियों के लिए बनाया गया है, जिन्हें पहले से AI की जानकारी नहीं है. NCERT के अनुसार, इसका मकसद छात्रों को तकनीक का समझदारी, आत्मविश्वास और जिम्मेदारी के साथ इस्तेमाल करना सिखाना है. इसमें मानवीय निर्णय, रचनात्मकता और नैतिक जिम्मेदारी को भी महत्वपूर्ण बताया गया है.
AI मॉड्यूल में क्या-क्या पढ़ेंगे छात्र?
NCERT के इस मॉड्यूल को पांच यूनिट में बांटा गया है. इनमें तकनीक की बुनियादी समझ से लेकर AI टूल्स के इस्तेमाल और उनसे जुड़े जोखिमों तक के विषय शामिल हैं.
1. रोजमर्रा की जिंदगी में AI
पहली यूनिट में छात्र पहचानेंगे कि वे अपने दैनिक जीवन में कहां-कहां AI का इस्तेमाल करते हैं. इसमें स्मार्टफोन के कीबोर्ड पर शब्दों का अनुमान लगाने और पसंद के अनुसार संगीत सुझाने वाले ऐप जैसे उदाहरण शामिल हैं.
इस यूनिट के जरिए छात्रों को पैटर्न पहचानने की क्षमता समझाई जाएगी. इंसान रोजमर्रा की जिंदगी में भीड़ में किसी परिचित को पहचानने या गाने की कुछ धुनों से उसे पहचानने जैसे काम करता है. मॉड्यूल इन उदाहरणों के माध्यम से समझाता है कि AI सिस्टम भी पैटर्न पहचानने के लिए बनाए जाते हैं, लेकिन उनके पास इंसानों जैसी परिस्थितियों की पूरी समझ हमेशा नहीं होती.
2. मशीनें उदाहरणों से कैसे सीखती हैं?
दूसरी यूनिट में बताया जाएगा कि मशीनें उदाहरणों और डेटा से पैटर्न सीखती हैं. इसके लिए छात्र ऐसी गतिविधियां करेंगे, जिनमें किसी इमेज क्लासिफायर को रोजमर्रा की वस्तुओं के बीच अंतर करना सिखाया जाएगा.
इसके बाद छात्र जानबूझकर ऐसी परिस्थितियां बनाएंगे, जिनमें सिस्टम गलत परिणाम दे सकता है. इससे उन्हें समझने में मदद मिलेगी कि ट्रेनिंग डेटा की गुणवत्ता और विविधता AI के प्रदर्शन को प्रभावित करती है.
3. AI से गलतियां क्यों होती हैं?
तीसरी यूनिट का नाम ‘When AI Gets It Wrong’ है. इसमें छात्रों को बताया जाएगा कि आत्मविश्वास के साथ दिया गया AI का जवाब जरूरी नहीं कि सही भी हो.
इस भाग में AI से तैयार गलत जानकारी, डीपफेक और हैलुसिनेशन जैसे विषय शामिल हैं. छात्रों को जानकारी पर भरोसा करने या उसे दूसरों के साथ साझा करने से पहले उसकी जांच करने के लिए पांच चरणों वाला तरीका भी सिखाया जाएगा.
इसका उद्देश्य छात्रों में तथ्य जांचने की आदत विकसित करना है, ताकि वे AI से मिले जवाबों को बिना सत्यापन के सही न मान लें.
4. डेटा प्राइवेसी और AI का जिम्मेदार इस्तेमाल
चौथी यूनिट में व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा, सहमति, निष्पक्षता और डिजिटल सुरक्षा पर ध्यान दिया गया है. इसमें छात्रों को डिजिटल पर्सनल डेटा प्रोटेक्शन (DPDP) एक्ट, 2023 से भी परिचित कराया जाएगा.
छात्रों को अपने इस्तेमाल वाले ऐप की प्राइवेसी पॉलिसी पढ़ने और समझने के लिए प्रोत्साहित किया जाएगा. वे जानेंगे कि ऐप कौन-सी जानकारी इकट्ठा करते हैं, उसे किसके साथ साझा किया जा सकता है और कितने समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है.
मॉड्यूल में आधार और पैन नंबर, पासवर्ड, ओटीपी तथा व्यक्तिगत दस्तावेज जैसी संवेदनशील जानकारी AI टूल्स में दर्ज करने से बचने की सलाह भी दी गई है.
5. AI टूल्स का सही इस्तेमाल और बेहतर प्रॉम्प्ट
पांचवीं यूनिट में छात्रों को AI टूल्स से बेहतर जवाब पाने के लिए प्रॉम्प्ट लिखना और उन्हें सुधारना सिखाया जाएगा. छात्र अपने काम से जुड़े प्रॉम्प्ट तैयार करेंगे, AI के जवाबों का मूल्यांकन करेंगे और यह दर्ज करेंगे कि उन्हें जवाब में क्या सुधार करना पड़ा.
मॉड्यूल AI को स्वतंत्र सोच का विकल्प बनाने के बजाय सहायक के रूप में इस्तेमाल करने पर जोर देता है. इसका मतलब है कि छात्र खुद सोचें और AI का इस्तेमाल अपने काम को बेहतर बनाने के लिए करें.
20 घंटे में कैसे पूरी होगी पढ़ाई?
इस मॉड्यूल की सुझाई गई शिक्षण योजना 20 क्लासरूम घंटों की है. इसमें गतिविधियों को तीन तरीकों से कराया जा सकता है.
- हर छात्र या जोड़ी के लिए डिवाइस: विद्यार्थी कंप्यूटर या अन्य उपलब्ध डिवाइस पर गतिविधियां कर सकते हैं.
- शिक्षक के माध्यम से प्रदर्शन: शिक्षक साझा स्क्रीन पर AI से जुड़ी गतिविधियां दिखा सकते हैं.
- बिना डिजिटल डिवाइस की गतिविधियां: कागज, चर्चा और दूसरे अभ्यासों के माध्यम से भी मुख्य अवधारणाएं समझाई जा सकती हैं.
इस व्यवस्था से उन स्कूलों को भी मदद मिल सकती है, जहां पर्याप्त डिवाइस या इंटरनेट कनेक्टिविटी उपलब्ध नहीं है. शिक्षक मार्गदर्शन में चर्चा, प्रयोग और गलतियों से सीखने पर जोर दिया गया है. छात्रों को पांचों यूनिट के दौरान अपने अनुभव, तर्क और विचार दर्ज करने के लिए ‘Curious Notebook’ नाम का एक पोर्टफोलियो भी बनाए रखना होगा.
स्कूलों ने AI शिक्षा को बताया महत्वपूर्ण कदम
CBSE से संबद्ध स्कूलों के कुछ प्रधानाचार्यों ने नए मॉड्यूल का स्वागत किया है. पुणे के संस्कृति ग्रुप ऑफ स्कूल्स के ट्रस्टी प्रनीत मुंगली ने कहा कि कक्षा 9 से AI की शिक्षा शुरू करना विद्यार्थियों को तकनीक आधारित दुनिया के लिए तैयार करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
उनके अनुसार, शुरुआती स्तर पर AI सीखने से छात्रों में आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता, तार्किक क्षमता और समस्या सुलझाने जैसे कौशल विकसित करने में मदद मिल सकती है. उन्होंने AI टूल्स के उपयोग और उनकी सीमाओं को समझने की जरूरत पर भी जोर दिया.
दिल्ली के माउंट आबू पब्लिक स्कूल की प्रिंसिपल डॉ. ज्योति अरोड़ा ने कहा कि यह मॉड्यूल आलोचनात्मक सोच, रचनात्मकता और समस्या सुलझाने की क्षमता को मजबूत करने के साथ तकनीक के जिम्मेदार इस्तेमाल को बढ़ावा दे सकता है.
NCERT के निदेशक प्रो. दिनेश प्रसाद सकलानी ने मॉड्यूल की प्रस्तावना में कहा कि तकनीक मानवीय क्षमताओं को बढ़ा सकती है, लेकिन निर्णय, रचनात्मकता, जिम्मेदारी और सीखने का स्वामित्व विद्यार्थी के पास ही रहता है.
कक्षा 3 से 8 के लिए भी शुरू हुआ था AI पाठ्यक्रम
इससे पहले 2 अप्रैल को CBSE ने कक्षा 3 से 8 तक के विद्यार्थियों के लिए कंप्यूटेशनल थिंकिंग और AI का संरचित पाठ्यक्रम शुरू किया था. इसका उद्देश्य कम उम्र से ही छात्रों को AI के लिए तैयार करना है.
इस पाठ्यक्रम में कक्षा 3 से 5 के लिए हर साल 50 घंटे और कक्षा 6 से 8 के लिए 100 घंटे की पढ़ाई की सिफारिश की गई है. इसका उद्देश्य विद्यार्थियों को उम्र के अनुसार धीरे-धीरे कंप्यूटेशनल थिंकिंग और AI की अवधारणाओं से परिचित कराना है.
कक्षा 9 से 12 के लिए NCERT का नया 20 घंटे का मॉड्यूल इसी व्यापक शैक्षिक दिशा में AI की समझ, तथ्य जांचने की आदत, डेटा सुरक्षा और जिम्मेदार तकनीकी इस्तेमाल पर जोर देता है.
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