केंद्र शासित प्रदेश लद्दाख में अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में लिलियम यानी लिली के फूलों की खेती की सफलता के बाद अब बड़े पैमाने पर केसर की खेती शुरू करने का प्रयोग किया जा रहा है. उप राज्यपाल वी. के. सक्सेना ने सोशल मीडिया मंच ‘एक्स’ पर शुक्रवार को इसकी जानकारी साझा की.
वी. के. सक्सेना ने लिखा कि उन्हें यह घोषणा करते हुए खुशी हो रही है कि लद्दाख में पहली बार बड़े पैमाने पर केसर की खेती शुरू करने के लिए एक महत्वाकांक्षी प्रयोग किया जा रहा है.
सक्सेना ने चट्टानों से बनी पहाड़ियों की पृष्ठभूमि में केसर के कंदों की बुवाई की तस्वीरें भी साझा कीं. इस बुवाई अभियान का नेतृत्व उन्होंने स्वयं किया.
उन्होंने बताया कि ईरान के करीब 90,000 उच्च गुणवत्ता वाले केसर कंदों का कुल 800 किलोग्राम बीज बोया गया है. ये कंद लद्दाख की अधिक ऊंचाई वाली कृषि-जलवायु परिस्थितियों के अनुकूल हैं.
यह भी पढ़ें- हरिद्वार में 500 रुपये से कम में ठहरने के लिए सबसे साफ-सुथरे आश्रमों की सूची
4,000 वर्ग मीटर जमीन पर हो रही केसर की खेती
एलजी ने कहा कि लेह के स्पितुक फरका में पहले बंजर रही 4,000 वर्ग मीटर जमीन पर केसर की खेती की जा रही है. परियोजना ‘हिम सरोवर’ के तहत इस जमीन को फिर से उपजाऊ बनाकर खेती के योग्य बनाया गया है.
उन्होंने कहा कि इस पहल के पीछे प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की कृषि विविधीकरण की परिकल्पना है. इसका उद्देश्य किसानों की आर्थिक स्थिति को मजबूत करना और उन्हें सशक्त बनाना है.
किसानों और युवाओं के लिए नए अवसर की उम्मीद
उप राज्यपाल ने कहा कि यह अग्रणी परियोजना स्थानीय अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की क्षमता रखती है. इसके साथ ही किसानों, युवाओं और स्वयं सहायता समूहों के लिए आजीविका के नए और टिकाऊ अवसर पैदा हो सकते हैं.
लद्दाख में अधिक ऊंचाई वाले क्षेत्रों में खेती से जुड़े प्रयोगों के बीच बड़े पैमाने पर केसर की खेती की यह पहल शुरू की गई है. इस प्रयोग के तहत ईरान से लाए गए करीब 90,000 उच्च गुणवत्ता वाले केसर कंदों की बुवाई की गई है.
यह भी पढ़ें- आउटसोर्सिंग कर्मचारियों की सैलरी में 25% बढ़ोतरी, अब हर महीने मिलेंगे 23,200 रुपये


