नई दिल्ली: भारत ने ग्रीन हाइड्रोजन क्षेत्र में एक और महत्वपूर्ण कदम उठाते हुए Green Hydrogen Certification Portal of India (GHCI) लॉन्च कर दिया है. केंद्रीय नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्री प्रह्लाद जोशी ने राष्ट्रीय कार्यशाला के दौरान इस पोर्टल का शुभारंभ किया. सरकार का मानना है कि यह डिजिटल प्लेटफॉर्म ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन, प्रमाणन और नियामकीय अनुपालन को अधिक पारदर्शी और व्यवस्थित बनाएगा.
यह पोर्टल नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय (MNRE) द्वारा विकसित किया गया है और इसका उद्देश्य Green Hydrogen Certification Scheme of India के तहत प्रमाणन प्रक्रिया को डिजिटल और विश्वसनीय बनाना है. इसके माध्यम से उद्योगों, निवेशकों और नियामक संस्थाओं को एकीकृत प्लेटफॉर्म उपलब्ध होगा.
गुजरात को रेलवे का बड़ा तोहफा. 493 करोड़ रुपये से बनेगी आदिपुर-भुज डबल रेल लाइन
ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को मिलेगी नई ताकत
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री प्रह्लाद जोशी ने राज्यों से राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन में सक्रिय भागीदारी की अपील की. उन्होंने बताया कि देश के 6 राज्यों ने पहले ही समर्पित Green Hydrogen Policy अधिसूचित कर दी है, जबकि 7 राज्यों ने अपनी मौजूदा औद्योगिक और नवीकरणीय ऊर्जा नीतियों में ग्रीन हाइड्रोजन को शामिल किया है.
उन्होंने यह भी बताया कि 4 अन्य राज्य अपनी नीतियों को अंतिम रूप देने की प्रक्रिया में हैं. इससे स्पष्ट है कि ग्रीन हाइड्रोजन को लेकर राज्यों के बीच भी तेजी से रुचि बढ़ रही है.
घरेलू निर्माण को बढ़ावा
प्रह्लाद जोशी ने बताया कि सरकार ने इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण क्षमता बढ़ाने के लिए 15 कंपनियों को वित्तीय प्रोत्साहन प्रदान किया है. इन कंपनियों द्वारा प्रतिवर्ष 3,000 मेगावाट की स्वदेशी इलेक्ट्रोलाइजर निर्माण क्षमता विकसित की जाएगी.
विशेषज्ञों का मानना है कि इससे भारत की आयातित तकनीक पर निर्भरता कम होगी और घरेलू विनिर्माण क्षेत्र को नई मजबूती मिलेगी. साथ ही ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन की लागत कम करने में भी मदद मिल सकती है.
रिफाइनरी और उर्वरक क्षेत्र में बड़ा विस्तार
सरकार ने जानकारी दी कि इंडियन ऑयल (IOCL), भारत पेट्रोलियम (BPCL), हिंदुस्तान पेट्रोलियम (HPCL) और नुमालीगढ़ रिफाइनरी (NRL) को 30,000 मीट्रिक टन प्रतिवर्ष ग्रीन हाइड्रोजन की आपूर्ति के लिए अनुबंध दिए गए हैं.
इसके अलावा 11 उर्वरक संयंत्रों के लिए 6.7 लाख मीट्रिक टन प्रतिवर्ष ग्रीन अमोनिया आपूर्ति के समझौते भी किए गए हैं. यह कदम उर्वरक उद्योग की आयात निर्भरता कम करने और स्वच्छ ऊर्जा के उपयोग को बढ़ावा देने की दिशा में महत्वपूर्ण माना जा रहा है.
स्टील उद्योग में हाइड्रोजन उपयोग की तैयारी
सरकार ने स्टील क्षेत्र में 100 प्रतिशत हाइड्रोजन इंजेक्शन परीक्षण के लिए 84 करोड़ रुपये के पायलट प्रोजेक्ट को मंजूरी दी है. यदि यह तकनीक सफल होती है तो स्टील उत्पादन में कार्बन उत्सर्जन को काफी हद तक कम किया जा सकेगा.
विशेषज्ञों के अनुसार स्टील उद्योग भारत के सबसे अधिक ऊर्जा खपत वाले क्षेत्रों में से एक है. ऐसे में ग्रीन हाइड्रोजन का उपयोग औद्योगिक डीकार्बोनाइजेशन की दिशा में बड़ा कदम साबित हो सकता है.
हाइड्रोजन आधारित वाहनों को बढ़ावा
ग्रीन मोबिलिटी को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने 37 हाइड्रोजन ईंधन आधारित वाहनों और 9 रणनीतिक रिफ्यूलिंग स्टेशनों के लिए लगभग 208 करोड़ रुपये आवंटित किए हैं.
इसके अलावा देशभर में 7 राष्ट्रीय परीक्षण सुविधाओं के विकास के लिए 193.35 करोड़ रुपये का निवेश किया जा रहा है. यह बुनियादी ढांचा भविष्य में हाइड्रोजन आधारित परिवहन प्रणाली को बढ़ावा देने में मदद करेगा.
स्टार्टअप्स को मिलेगा 100 करोड़ रुपये का समर्थन
कार्यक्रम के दौरान केंद्रीय मंत्री ने घोषणा की कि ग्रीन हाइड्रोजन तकनीकों पर काम करने वाले स्टार्टअप्स को प्रोत्साहित करने के लिए 100 करोड़ रुपये का विशेष फंड बनाया गया है.
पहले चरण में 9 स्टार्टअप्स को लगभग 22 करोड़ रुपये की सहायता देने की मंजूरी दी गई है. सरकार का मानना है कि स्टार्टअप्स के माध्यम से इस क्षेत्र में नई तकनीकों और नवाचारों को बढ़ावा मिलेगा.
8 लाख करोड़ रुपये से अधिक निवेश की संभावना
राष्ट्रीय ग्रीन हाइड्रोजन मिशन को वर्ष 2023 में 19,744 करोड़ रुपये के बजट के साथ लॉन्च किया गया था. सरकार का लक्ष्य 5 मिलियन मीट्रिक टन ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादन क्षमता विकसित करना है.
इसके लिए 125 गीगावाट समर्पित नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता विकसित की जाएगी. सरकार का अनुमान है कि इस मिशन से 8 लाख करोड़ रुपये से अधिक का निवेश आकर्षित होगा, 6 लाख से ज्यादा रोजगार सृजित होंगे और हर वर्ष लगभग 5 करोड़ टन कार्बन उत्सर्जन में कमी आएगी.
भारतीय रेलवे का बड़ा फैसला. 755 करोड़ रुपये से बनेगी चांपा-कोरबा तीसरी रेल लाइन
भारत बन सकता है ग्रीन हाइड्रोजन हब
विशेषज्ञों का मानना है कि ग्रीन हाइड्रोजन भविष्य की स्वच्छ ऊर्जा अर्थव्यवस्था का प्रमुख आधार बन सकता है. भारत के पास विशाल सौर और पवन ऊर्जा संसाधन हैं, जिससे वह दुनिया के प्रमुख ग्रीन हाइड्रोजन उत्पादकों में शामिल हो सकता है.
Green Hydrogen Certification Portal का लॉन्च इस दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है. इससे निवेशकों का विश्वास बढ़ेगा, पारदर्शिता आएगी और भारत के ग्रीन हाइड्रोजन इकोसिस्टम को गति मिलेगी.
स्रोत: Ministry of New and Renewable Energy


