नई दिल्ली: भारत और थाईलैंड ने रक्षा क्षेत्र में अपने सहयोग को और मजबूत करने पर सहमति जताई है. बैंकॉक में आयोजित 10वें भारत-थाईलैंड रक्षा संवाद (Thailand-India Defence Dialogue) के दौरान दोनों देशों ने रक्षा विनिर्माण, अनुसंधान, नवाचार और क्षमता विकास जैसे महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सहयोग बढ़ाने पर चर्चा की. साथ ही हिंद-प्रशांत क्षेत्र में शांति, स्थिरता और समृद्धि के प्रति अपनी साझा प्रतिबद्धता भी दोहराई.
यह बैठक 16 जून 2026 को बैंकॉक में आयोजित हुई. संवाद की सह-अध्यक्षता थाईलैंड के उप स्थायी रक्षा सचिव एडमिरल नुत्तापोल दीवानिच और भारत के रक्षा मंत्रालय में संयुक्त सचिव सत्यजीत मोहंती ने की. बैठक में द्विपक्षीय रक्षा सहयोग की व्यापक समीक्षा की गई और क्षेत्रीय एवं वैश्विक सुरक्षा मुद्दों पर विचार-विमर्श हुआ.
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हिंद-प्रशांत क्षेत्र की सुरक्षा पर चर्चा
बैठक के दौरान दोनों देशों ने हिंद-प्रशांत क्षेत्र के बदलते सुरक्षा परिदृश्य पर विस्तार से चर्चा की. प्रतिनिधिमंडलों ने क्षेत्रीय घटनाक्रमों और उभरती चुनौतियों पर अपने विचार साझा किए.
भारत और थाईलैंड ने इस बात पर सहमति व्यक्त की कि क्षेत्र में शांति, स्थिरता और आर्थिक समृद्धि बनाए रखने के लिए सहयोग और संवाद को और मजबूत करना आवश्यक है. दोनों देशों ने साझा सुरक्षा हितों की रक्षा के लिए मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई.
रक्षा सहयोग की प्रगति की समीक्षा
संवाद के दौरान पिछले रक्षा संवाद के बाद हुई प्रगति की समीक्षा भी की गई. दोनों पक्षों ने सैन्य-से-सैन्य संपर्क, संयुक्त प्रशिक्षण कार्यक्रम, क्षमता निर्माण पहल, समुद्री सहयोग और अन्य रक्षा गतिविधियों का मूल्यांकन किया.
विशेषज्ञों का मानना है कि हाल के वर्षों में भारत और थाईलैंड के बीच रक्षा संबंध लगातार मजबूत हुए हैं. संयुक्त अभ्यासों और प्रशिक्षण कार्यक्रमों ने दोनों देशों की सेनाओं के बीच समन्वय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है.
रक्षा विनिर्माण और अनुसंधान पर विशेष जोर
बैठक का सबसे महत्वपूर्ण पहलू रक्षा उद्योग सहयोग को लेकर हुई चर्चा रही. दोनों देशों ने रक्षा विनिर्माण, अनुसंधान, नवाचार और क्षमता विकास के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने की संभावनाओं पर विचार किया.
भारत की “मेक इन इंडिया” और रक्षा आत्मनिर्भरता की नीति के तहत रक्षा उत्पादन में तेजी से विस्तार हो रहा है. ऐसे में थाईलैंड के साथ तकनीकी और औद्योगिक साझेदारी दोनों देशों के लिए लाभकारी साबित हो सकती है.
विशेषज्ञों का मानना है कि रक्षा अनुसंधान और नवाचार में सहयोग से नई तकनीकों के विकास और रक्षा क्षमताओं के आधुनिकीकरण को गति मिल सकती है.
समुद्री सुरक्षा सहयोग को मिलेगी मजबूती
भारत और थाईलैंड दोनों हिंद-प्रशांत क्षेत्र के महत्वपूर्ण समुद्री राष्ट्र हैं. ऐसे में समुद्री सुरक्षा, समुद्री मार्गों की सुरक्षा और आपदा प्रबंधन सहयोग उनके संबंधों का महत्वपूर्ण हिस्सा बन चुके हैं.
बैठक में समुद्री सहयोग से जुड़े विभिन्न पहलुओं पर भी चर्चा हुई. दोनों देशों ने समुद्री क्षेत्र में व्यावहारिक सहयोग को और मजबूत बनाने की आवश्यकता पर जोर दिया.
ASEAN ढांचे में सहयोग बढ़ाने पर सहमति
प्रतिनिधिमंडलों ने ASEAN (Association of Southeast Asian Nations) के नेतृत्व वाले रक्षा तंत्रों और बहुपक्षीय मंचों में सहयोग बढ़ाने पर भी विचार-विमर्श किया.
दोनों देशों ने क्षेत्रीय सुरक्षा चुनौतियों से निपटने के लिए बहुपक्षीय सहयोग को महत्वपूर्ण बताया. साथ ही संवाद और सहयोग के माध्यम से साझा चुनौतियों का समाधान खोजने की प्रतिबद्धता व्यक्त की.
2025 में बना था रणनीतिक साझेदारी का नया अध्याय
भारत और थाईलैंड ने वर्ष 2025 में अपने संबंधों को औपचारिक रूप से रणनीतिक साझेदारी (Strategic Partnership) के स्तर तक उन्नत किया था. इसके बाद दोनों देशों के बीच रक्षा, व्यापार, निवेश, समुद्री सहयोग और क्षेत्रीय सुरक्षा मामलों में सहयोग और तेज हुआ है.
विशेषज्ञों का कहना है कि रणनीतिक साझेदारी के बाद यह रक्षा संवाद दोनों देशों के बीच बढ़ते विश्वास और सहयोग का संकेत है.
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भविष्य की योजनाओं पर भी हुई चर्चा
बैठक के अंत में दोनों पक्षों ने भविष्य में होने वाले रक्षा सहयोग कार्यक्रमों और आगामी पहलों पर चर्चा की. दोनों देशों ने रक्षा संबंधों को और व्यापक बनाने तथा व्यावहारिक सहयोग बढ़ाने के लिए नियमित संवाद जारी रखने पर सहमति व्यक्त की.
विशेषज्ञों का मानना है कि भारत और थाईलैंड के बीच मजबूत होते रक्षा संबंध हिंद-प्रशांत क्षेत्र में स्थिरता और संतुलन बनाए रखने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं. रक्षा विनिर्माण, अनुसंधान, समुद्री सुरक्षा और क्षमता निर्माण जैसे क्षेत्रों में सहयोग दोनों देशों के लिए दीर्घकालिक लाभ प्रदान कर सकता है.
स्रोत: Ministry of Defence


