Weather Update 17 July 2026: देश के मौसम में एक बार फिर बड़ा बदलाव देखने को मिल रहा है. भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के अनुसार उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी और उससे सटे उत्तर ओडिशा-पश्चिम बंगाल तट पर बना सुस्पष्ट निम्न दबाव क्षेत्र (Well-marked Low Pressure Area) अब कई राज्यों के मौसम को प्रभावित कर रहा है. इसके प्रभाव से पूर्वी भारत, पूर्वोत्तर भारत, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में अगले कुछ दिनों तक बारिश की गतिविधियों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी होने की संभावना है. कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रह सकता है, जबकि कुछ इलाकों में अत्यधिक भारी वर्षा की भी चेतावनी जारी की गई है.
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दूसरी ओर पश्चिम-मध्य भारत, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत और उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी हिस्सों में वर्षा अपेक्षाकृत कमजोर बनी रहने का अनुमान है, हालांकि कुछ स्थानों पर गरज-चमक और तेज हवा के साथ बारिश हो सकती है.
देशभर में मौसम की बड़ी तस्वीर
| क्षेत्र | 17 जुलाई से प्रमुख स्थिति |
|---|---|
| पूर्वी भारत | कई राज्यों में भारी से बहुत भारी बारिश |
| पूर्वोत्तर भारत | लगातार तेज बारिश, कुछ स्थानों पर बहुत भारी वर्षा |
| पश्चिमी हिमालय | उत्तराखंड, हिमाचल और जम्मू-कश्मीर में बारिश बढ़ने की संभावना |
| उत्तर प्रदेश | पूर्वी हिस्से में भारी बारिश का खतरा, पश्चिमी भाग में बाद में बढ़ेगी गतिविधि |
| मध्य भारत | मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़ और विदर्भ में बारिश का विस्तार |
| पश्चिम भारत | कोंकण-गोवा में अच्छी बारिश, गुजरात और महाराष्ट्र में छिटपुट वर्षा |
| दक्षिण भारत | सामान्य से कम बारिश, कुछ इलाकों में गरज-चमक और तेज हवा |
| उत्तर-पश्चिम मैदान | अगले तीन दिनों तक अपेक्षाकृत कमजोर मानसूनी गतिविधियां |
बंगाल की खाड़ी का सिस्टम क्यों महत्वपूर्ण है
मौसम विभाग के अनुसार उत्तर-पश्चिम बंगाल की खाड़ी में सक्रिय सुस्पष्ट निम्न दबाव क्षेत्र मानसूनी हवाओं को अतिरिक्त नमी प्रदान कर रहा है. इसी कारण पूर्वी और उत्तर-पूर्वी राज्यों में वर्षा की तीव्रता बढ़ने की संभावना बनी हुई है. इस सिस्टम का प्रभाव धीरे-धीरे उत्तर प्रदेश और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों तक भी देखने को मिलेगा.
उत्तर भारत का मौसम
हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर में 17 जुलाई तक हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना बनी हुई है. इसके बाद 18 से 22 जुलाई के बीच वर्षा का दायरा और तीव्रता दोनों बढ़ सकती हैं.
उत्तराखंड में 16 से 22 जुलाई तक व्यापक वर्षा का अनुमान है. 18 से 21 जुलाई के दौरान कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश हो सकती है. पर्वतीय क्षेत्रों में भूस्खलन और अचानक जलभराव का खतरा भी बढ़ सकता है.
हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब में 17 से 19 जुलाई तक कहीं-कहीं बारिश की संभावना रहेगी, जबकि 20 से 22 जुलाई के दौरान वर्षा का विस्तार बढ़ सकता है. इसी अवधि में कुछ स्थानों पर भारी वर्षा भी संभव है.
पूर्वी उत्तर प्रदेश में 17 और 18 जुलाई को भारी वर्षा की संभावना है. 19 से 21 जुलाई के बीच कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश हो सकती है. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 19 जुलाई के बाद बारिश की गतिविधियां तेज होने का अनुमान है.
राजस्थान के पूर्वी और पश्चिमी हिस्सों में 22 जुलाई तक छिटपुट वर्षा जारी रह सकती है. 20 से 22 जुलाई के बीच कुछ इलाकों में गरज-चमक और तेज हवा चलने की संभावना है.
मध्य भारत में कहां बढ़ेगी बारिश
पूर्वी मध्य प्रदेश में 17 से 21 जुलाई के बीच भारी वर्षा की संभावना जताई गई है. पश्चिमी मध्य प्रदेश में भी 21 और 22 जुलाई को वर्षा का दायरा बढ़ सकता है.
छत्तीसगढ़ में 17 से 21 जुलाई तक कई स्थानों पर भारी बारिश की संभावना बनी हुई है. इससे नदी-नालों का जलस्तर बढ़ सकता है.
विदर्भ क्षेत्र में 17 और 18 जुलाई को भारी वर्षा का अनुमान है. इसके साथ कुछ इलाकों में तेज हवा और बिजली गिरने की भी संभावना बनी रहेगी.
पूर्वी भारत में सबसे ज्यादा असर
ओडिशा में निम्न दबाव क्षेत्र का सबसे अधिक प्रभाव देखने को मिल रहा है. 17 जुलाई को भी कुछ स्थानों पर बहुत भारी वर्षा की संभावना बनी हुई है, जबकि 19 से 20 जुलाई के बीच फिर भारी वर्षा हो सकती है.
बिहार में 17 से 21 जुलाई तक व्यापक वर्षा का दौर जारी रहने की संभावना है. 18 से 20 जुलाई के बीच कुछ स्थानों पर बहुत भारी वर्षा हो सकती है.
झारखंड में 18 जुलाई तक कई इलाकों में भारी बारिश का अनुमान है.
गंगा के मैदानी पश्चिम बंगाल तथा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल और सिक्किम में लगातार वर्षा की गतिविधियां बनी रहेंगी. कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा संभव है.
पूर्वोत्तर भारत में लगातार बारिश
असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में 22 जुलाई तक व्यापक वर्षा का अनुमान है. कई स्थानों पर भारी वर्षा हो सकती है.
अरुणाचल प्रदेश में 17 से 19 जुलाई के दौरान कुछ स्थानों पर बहुत भारी बारिश की संभावना है. लगातार वर्षा के कारण पहाड़ी क्षेत्रों में सतर्क रहने की जरूरत होगी.
पश्चिम भारत का मौसम
कोंकण और गोवा में पूरे सप्ताह अच्छी बारिश का दौर बना रह सकता है.
गुजरात, सौराष्ट्र-कच्छ, मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में छिटपुट वर्षा की संभावना है. कुछ स्थानों पर गरज-चमक और तेज हवा भी चल सकती है.
दक्षिण भारत में कैसी रहेगी स्थिति
तटीय आंध्र प्रदेश, तेलंगाना, तमिलनाडु, रायलसीमा, कर्नाटक और केरल में अधिकांश स्थानों पर हल्की से मध्यम वर्षा की संभावना बनी हुई है.
तटीय आंध्र प्रदेश में 17 जुलाई तक कहीं-कहीं भारी वर्षा हो सकती है.
तेलंगाना और रायलसीमा में तेज सतही हवाएं चलने की संभावना है.
तमिलनाडु, पुडुचेरी और कराईकल में 17 जुलाई तक कुछ स्थानों पर गर्म और उमस भरा मौसम बना रह सकता है.
गरज-चमक और तेज हवा का भी खतरा
मौसम विभाग के अनुसार कई राज्यों में गरज-चमक के साथ बिजली गिरने और 30 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे की रफ्तार से तेज हवा चलने की संभावना है. ऐसे मौसम के दौरान खुले मैदान, पेड़ों के नीचे और बिजली के खंभों के पास खड़े होने से बचना चाहिए.
गर्मी और उमस से राहत अभी सभी जगह नहीं
हालांकि कई राज्यों में बारिश बढ़ रही है, लेकिन हरियाणा, पंजाब, दिल्ली, पश्चिमी उत्तर प्रदेश, पूर्वी उत्तर प्रदेश के कुछ हिस्सों, तमिलनाडु, पुडुचेरी, तटीय आंध्र प्रदेश, रायलसीमा और तेलंगाना के कुछ इलाकों में गर्म और उमस भरा मौसम बना रह सकता है.
लोगों पर संभावित असर
- भारी बारिश वाले क्षेत्रों में शहरी जलभराव की स्थिति बन सकती है.
- निचले इलाकों में पानी भरने से यातायात प्रभावित हो सकता है.
- पहाड़ी क्षेत्रों में भूस्खलन और पत्थर गिरने की आशंका बढ़ सकती है.
- बिजली गिरने और तेज हवा से फसलों तथा बिजली व्यवस्था पर असर पड़ सकता है.
- नदी और नालों के किनारे रहने वाले लोगों को अतिरिक्त सतर्कता बरतनी चाहिए.
- लंबी दूरी की सड़क और रेल यात्रा मौसम के कारण प्रभावित हो सकती है.
क्या सावधानियां रखें
- मौसम विभाग की ताजा चेतावनियों पर लगातार नजर रखें.
- भारी बारिश के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें.
- जलभराव वाले रास्तों से गुजरने की कोशिश न करें.
- गरज-चमक के समय खुले मैदान और ऊंचे पेड़ों के नीचे न रुकें.
- मोबाइल फोन चार्ज रखें और जरूरी दस्तावेज सुरक्षित स्थान पर रखें.
- पहाड़ी क्षेत्रों में यात्रा से पहले स्थानीय प्रशासन की सलाह अवश्य लें.
- किसान खेतों में बिजली चमकने के दौरान काम करने से बचें.
- बच्चों और बुजुर्गों को खराब मौसम में सुरक्षित स्थान पर रखें.
कई राज्यों में भारी से बहुत भारी वर्षा के संकेत
17 जुलाई 2026 से देश के मौसम में स्पष्ट क्षेत्रीय अंतर देखने को मिलेगा. पूर्वी भारत, पूर्वोत्तर भारत, पूर्वी उत्तर प्रदेश और पश्चिमी हिमालयी क्षेत्रों में बारिश का जोर बढ़ने की संभावना है. कई राज्यों में भारी से बहुत भारी वर्षा के कारण स्थानीय स्तर पर जलभराव, भूस्खलन और यातायात बाधित होने जैसी परिस्थितियां बन सकती हैं. वहीं उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी हिस्सों, पश्चिम-मध्य भारत और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के अधिकांश क्षेत्रों में वर्षा अपेक्षाकृत कमजोर रहने का अनुमान है. ऐसे में लोगों को स्थानीय मौसम पूर्वानुमान और प्रशासन की सलाह का पालन करना चाहिए.
स्रोत: स्रोत. भारत मौसम विज्ञान विभाग, राष्ट्रीय मौसम पूर्वानुमान एवं चेतावनी बुलेटिन,
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FAQs
1. 17 जुलाई से किन राज्यों में सबसे ज्यादा बारिश की संभावना है?
पूर्वी उत्तर प्रदेश, बिहार, ओडिशा, झारखंड, पश्चिम बंगाल, सिक्किम, असम, मेघालय, अरुणाचल प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना है.
2. क्या दिल्ली-एनसीआर में लगातार भारी बारिश होगी?
दिल्ली, हरियाणा और पंजाब में 20 से 22 जुलाई के बीच बारिश की गतिविधियां बढ़ने की संभावना है. कुछ स्थानों पर भारी वर्षा भी हो सकती है.
3. क्या पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा सुरक्षित रहेगी?
उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश और जम्मू-कश्मीर के कुछ इलाकों में भारी बारिश और भूस्खलन का खतरा बना रह सकता है. यात्रा से पहले मौसम और प्रशासन की सलाह जरूर देखें.
4. किसानों को इस दौरान क्या करना चाहिए?
बिजली चमकने के दौरान खेतों में काम करने से बचें. फसलों में जलनिकासी की व्यवस्था रखें और स्थानीय कृषि एवं मौसम सलाह का पालन करें.
5. क्या पूरे देश में मानसून सक्रिय हो गया है?
नहीं. पूर्वी और पूर्वोत्तर भारत में मानसून अधिक सक्रिय रहने का अनुमान है, जबकि पश्चिम-मध्य भारत, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत और उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी क्षेत्रों में वर्षा अपेक्षाकृत कमजोर रह सकती है.


