नई दिल्ली, 28 जून 2026. ग्रामीण भारत में सड़क पहचान और डिजिटल मैपिंग को मजबूत बनाने की दिशा में केंद्र सरकार ने एक नई पहल शुरू की है. पंचायती राज मंत्रालय ने MyGov के सहयोग से Intra-Village Road Coding and Grading System पर देशभर के नागरिकों, पंचायत प्रतिनिधियों, विशेषज्ञों और अन्य हितधारकों से सुझाव आमंत्रित किए हैं.
इस पहल का उद्देश्य गांवों के भीतर मौजूद प्रत्येक सड़क को एक यूनिक नाम, कोड और डिजिटल पहचान देना है, ताकि आपातकालीन सेवाओं, डाक वितरण, सरकारी योजनाओं और डिजिटल नेविगेशन को अधिक प्रभावी बनाया जा सके.
Zero Waste Mahotsav के लिए मांगे गए नागरिकों के सुझाव, 200-300 शब्दों में भेजें अपने आइडिया
क्यों जरूरी है यह नई व्यवस्था?
सरकार के अनुसार, भारत में ग्रामीण सड़कों का बड़ा नेटवर्क मौजूद है, लेकिन गांवों के अंदर की अधिकांश गलियों और सड़कों का अभी तक व्यवस्थित रिकॉर्ड या डिजिटल मैपिंग नहीं है.
इस कारण कई समस्याएं सामने आती हैं, जैसे-
- एम्बुलेंस को सही स्थान तक पहुंचने में देरी.
- पुलिस और फायर ब्रिगेड जैसी आपातकालीन सेवाओं को रास्ता खोजने में कठिनाई.
- डाक और कूरियर सेवाओं को सटीक पता नहीं मिल पाना.
- सरकारी योजनाओं के तहत सड़क निर्माण और रखरखाव की बेहतर योजना बनाने में परेशानी.
- डिजिटल मैप और नेविगेशन ऐप्स पर गांवों के अंदर की सड़कों की सही जानकारी उपलब्ध नहीं होना.
क्या है सरकार की योजना?
प्रस्तावित व्यवस्था के तहत देश के प्रत्येक गांव की हर आंतरिक सड़क को-
- एक यूनिक कोड दिया जाएगा.
- मानकीकृत नाम (Standardized Name) मिलेगा.
- डिजिटल मैप से जोड़ा जाएगा.
- सड़क पर संकेतक (Signage) लगाए जाएंगे.
- राष्ट्रीय डेटाबेस में दर्ज किया जाएगा.
सरकार का उद्देश्य है कि गांव के किसी भी पते तक एम्बुलेंस, पुलिस, डाक सेवा, सरकारी अधिकारी या अन्य सेवाएं बिना भ्रम के आसानी से पहुंच सकें.
किन विषयों पर मांगे गए सुझाव?
पंचायती राज मंत्रालय ने नागरिकों से विशेष रूप से इन बिंदुओं पर सुझाव मांगे हैं-
- सड़कों की ग्रेडिंग और कोडिंग प्रणाली.
- DIGIPIN के साथ एकीकरण.
- Gram Manchitra प्लेटफॉर्म का उपयोग.
- PMGSY रोड कोडिंग व्यवस्था.
- QR कोड आधारित सड़क पहचान.
- स्थानीय समुदाय की भागीदारी बढ़ाने के उपाय.
- बेहतर साइनेज और डिजिटल मैपिंग.
कौन दे सकता है सुझाव?
इस सार्वजनिक परामर्श में-
- ग्रामीण और शहरी नागरिक
- ग्राम पंचायतें एवं जनप्रतिनिधि
- स्थानीय समुदाय
- शिक्षाविद और शोधकर्ता
- शहरी एवं ग्रामीण योजनाकार
- सामाजिक संगठन
- सरकारी अधिकारी
- विकास क्षेत्र के विशेषज्ञ
सभी भाग ले सकते हैं.
कब तक भेज सकते हैं सुझाव?
यह सार्वजनिक परामर्श 25 जून 2026 से शुरू हो चुका है और 14 जुलाई 2026 (रात 11:59 बजे) तक खुला रहेगा.
इच्छुक नागरिक MyGov के माध्यम से अपने सुझाव ऑनलाइन भेज सकते हैं.
ग्रामीण सेवाओं को मिलेगा बड़ा लाभ
सरकार का मानना है कि इस व्यवस्था के लागू होने के बाद गांवों में अंतिम छोर (Last Mile) तक सेवाएं पहुंचाना अधिक आसान होगा.
इससे चिकित्सा सहायता, डाक सेवाएं, सरकारी योजनाओं की निगरानी, डिजिटल गवर्नेंस, सड़क रखरखाव और ग्रामीण विकास योजनाओं के क्रियान्वयन में पारदर्शिता और दक्षता बढ़ेगी.
इस पहल का मूल उद्देश्य है-
“यदि किसी स्थान की सही पहचान हो सकती है, तो वहां सेवाएं भी प्रभावी ढंग से पहुंचाई जा सकती हैं.”
Source: Ministry of Panchayati Raj | MyGov.


