नई दिल्ली, 28 जून 2026. उत्तर प्रदेश के बागपत जिला प्रशासन ने देशभर के नागरिकों, युवाओं, नवाचारकर्ताओं (Innovators) और संस्थानों को एक अनूठी पहल से जुड़ने का अवसर दिया है. MyGov के माध्यम से “Bhakti Bhi, Prakriti Bhi” थीम पर Shri Parshurameshwar Pura Mahadev Mahashivratri Mela को Zero Waste Mahotsav बनाने के लिए सुझाव आमंत्रित किए गए हैं.
इस पहल का उद्देश्य धार्मिक आयोजनों को अधिक स्वच्छ, पर्यावरण-अनुकूल और टिकाऊ (Sustainable) बनाना है, ताकि भविष्य में बड़े मेलों के लिए एक राष्ट्रीय मॉडल विकसित किया जा सके.
क्या है Zero Waste Mahotsav पहल?
बागपत प्रशासन ने बताया कि फाल्गुनी महाशिवरात्रि 2026 के दौरान सफल Zero Waste मॉडल लागू किया गया था. अब इसी अनुभव को आगे बढ़ाते हुए श्रावणी महाशिवरात्रि मेला 2026 को और अधिक पर्यावरण-अनुकूल बनाने की तैयारी की जा रही है.
यह पहल Mission LiFE (Lifestyle for Environment), स्वच्छ भारत मिशन और सस्टेनेबल टूरिज्म के लक्ष्यों के अनुरूप है.
किन विषयों पर मांगे गए हैं सुझाव?
प्रतिभागी निम्नलिखित विषयों पर अपने व्यावहारिक और नवाचारी सुझाव भेज सकते हैं-
- Zero Waste और कचरा प्रबंधन प्रणाली
- प्लास्टिक मुक्त धार्मिक मेले
- पर्यावरण-अनुकूल सामग्री और ग्रीन इंफ्रास्ट्रक्चर
- जनजागरूकता एवं व्यवहार परिवर्तन अभियान
- स्वयंसेवकों और युवाओं की भागीदारी
- मोबाइल ऐप, QR आधारित सेवाएं और डिजिटल मॉनिटरिंग
- टिकाऊ पर्यटन और आगंतुक प्रबंधन
कैसे करें भागीदारी?
इच्छुक प्रतिभागियों को-
- 200 से 300 शब्दों में अपना सुझाव लिखना होगा.
- ऐसा समाधान देना होगा जिसे जमीन पर आसानी से लागू किया जा सके.
- आवश्यकता होने पर उदाहरण, मॉडल या किसी सफल पहल का संदर्भ भी शामिल किया जा सकता है.
चुने गए सुझावों का क्या होगा?
जिला प्रशासन के अनुसार, चयनित सुझावों की विशेषज्ञों द्वारा समीक्षा की जाएगी.
बेहतरीन विचारों को अगस्त 2026 के दूसरे सप्ताह में आयोजित होने वाले श्रावणी महाशिवरात्रि मेले में लागू करने पर विचार किया जाएगा.
साथ ही चयनित प्रतिभागियों के योगदान को जिला प्रशासन की नवाचार पहल (Innovation Initiative) के तहत मान्यता भी दी जा सकती है और उन्हें अच्छे उदाहरण (Best Practices) के रूप में दस्तावेज़ित किया जाएगा.
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पर्यावरण संरक्षण में नागरिकों की भागीदारी
इस पहल का उद्देश्य केवल सुझाव जुटाना नहीं है, बल्कि नागरिकों को पर्यावरण संरक्षण, स्वच्छता और जिम्मेदार धार्मिक पर्यटन से जोड़ना भी है.
जिला प्रशासन का मानना है कि परंपरा, तकनीक और सतत विकास (Sustainability) को साथ लेकर धार्मिक आयोजनों को अधिक स्वच्छ और पर्यावरण-अनुकूल बनाया जा सकता है.
Source: MyGov / District Administration Baghpat.


