मथुरा: श्रीकृष्ण जन्मभूमि मामले में पक्षकार एवं कथावाचक कौशल किशोर ठाकुर ने शाही ईदगाह कमेटी के सचिव तनवीर अहमद को एक सुझाव पत्र भेजकर विवादित शाही ईदगाह को हटाने का प्रस्ताव दिया है. पत्र में उन्होंने लिखा है कि श्रीकृष्ण जन्मभूमि यदुवंशी समाज, जादौन, जडेजा एवं भाटी वंश, गोप-ग्वाल, अहीर समाज तथा समस्त ब्रजवासियों के आराध्य भगवान श्रीकृष्ण की जन्मस्थली है. उन्होंने दावा किया कि इस स्थल पर इस्लामिक आक्रांताओं ने अवैध कब्जा कर गर्भगृह के मूल स्वरूप को बदलकर ईदगाह का निर्माण कराया तथा वहां स्थापित प्राण-प्रतिष्ठित विग्रह को आगरा की जामा मस्जिद की सीढ़ियों में दबा दिया गया.
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श्रीकृष्ण जन्मभूमि का वास्तविक गर्भगृह
कौशल किशोर ठाकुर ने अपने पत्र में यह भी कहा कि श्री चित्रगुप्त पीठ एवं अखिल भारतीय अखाड़ा परिषद के संयुक्त तत्वावधान में कारसेवा का आह्वान किया जा चुका है. उनका कहना है कि यदि कारसेवा होती है तो बड़ी जनहानि हो सकती है, जिसकी जिम्मेदारी शाही ईदगाह कमेटी की होगी. उन्होंने कमेटी से विवादित स्थल, जिसे उन्होंने श्रीकृष्ण जन्मभूमि का वास्तविक गर्भगृह बताया है, सम्मानपूर्वक सनातन समाज को सौंपने का आग्रह किया. साथ ही प्रस्ताव दिया कि इसके बदले सनातन धर्म रक्षापीठ मथुरा के बाहरी क्षेत्र में दोगुनी भूमि उपलब्ध कराने में सहयोग करेगी.
पत्र में ठाकुर ने यह भी लिखा कि यदि शाही ईदगाह कमेटी और तनवीर अहमद इस प्रस्ताव को स्वीकार नहीं करते हैं, तो इसे मुस्लिम समुदाय के हित में नहीं माना जाएगा. उनका दावा है कि यदि कारसेवा के दौरान कोई जनहानि होती है तो उसका सबसे अधिक नुकसान मुस्लिम समुदाय को उठाना पड़ सकता है.
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उन्होंने पत्र में यह भी उल्लेख किया कि मामला अत्यंत संवेदनशील होने के कारण सर्वोच्च न्यायालय के निर्देश पर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण को दोनों पक्षों के बीच सुलह-समझौते का प्रयास करने के लिए कहा गया था. उनके अनुसार, शाही ईदगाह पक्ष सुलह-समझौते की प्रक्रिया में उपस्थित नहीं हुआ और किसी समझौते पर सहमति भी नहीं जताई. इसके बावजूद उन्होंने अपनी ओर से यह प्रस्ताव भेजते हुए अनुरोध किया है कि तनवीर अहमद अपनी कमेटी से विचार-विमर्श कर इस पर संतोषजनक जवाब दें. अब इस प्रस्ताव पर शाही ईदगाह कमेटी क्या निर्णय लेती है, यह आने वाला समय बताएगा.


