रायपुर: छत्तीसगढ़ की राजधानी रायपुर से आंध्र प्रदेश के विशाखापट्टनम तक बनने वाला 465 किलोमीटर लंबा रायपुर-विशाखापट्टनम इकोनॉमिक कॉरिडोर मध्य भारत की कनेक्टिविटी की तस्वीर बदलने की तैयारी में है. छह लेन का यह ग्रीनफील्ड और एक्सेस-कंट्रोल्ड कॉरिडोर मौजूदा करीब 597 किलोमीटर के रास्ते को घटाकर लगभग 465 किलोमीटर कर देगा. इससे रायपुर से विशाखापट्टनम का सफर 13-14 घंटे के बजाय करीब 5-6 घंटे में पूरा होने की उम्मीद है. परियोजना को दिसंबर 2026 तक पूरी तरह चालू करने का लक्ष्य रखा गया है.
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बस्तर से विशाखापट्टनम पोर्ट तक सीधी कनेक्टिविटी
यह कॉरिडोर सिर्फ सफर को तेज करने वाली सड़क नहीं है, बल्कि लैंडलॉक्ड मध्य भारत को समुद्र से जोड़ने वाला अहम आर्थिक मार्ग भी है. इसका रास्ता छत्तीसगढ़ के बस्तर, कांकेर और कोंडागांव से होते हुए ओडिशा के नवरंगपुर और कोरापुट तक जाएगा. इसके बाद यह आंध्र प्रदेश से होते हुए विशाखापट्टनम पोर्ट से जुड़ेगा. करीब 16,482 करोड़ से 20,000 करोड़ रुपये की अनुमानित लागत वाली इस परियोजना का निर्माण हाइब्रिड एन्यूटी मॉडल के तहत 19 से अधिक पैकेज में किया जा रहा है. परियोजना के कई हिस्सों पर काम अलग-अलग चरणों में आगे बढ़ चुका है.
बस्तर के उत्पादों को मिलेंगे बड़े बाजार
कॉरिडोर का बड़ा हिस्सा उन क्षेत्रों से गुजर रहा है, जिन्हें लंबे समय तक दुर्गम माना जाता रहा है. बेहतर सड़क संपर्क मिलने से बस्तर, कांकेर और कोंडागांव जैसे इलाकों की स्थानीय उपज बड़े बाजारों तक तेजी से पहुंच सकेगी. महुआ, इमली, धान और हस्तशिल्प जैसे उत्पाद रायपुर और विशाखापट्टनम के बाजारों तक कम समय में पहुंच सकेंगे. इससे स्थानीय कारोबार, परिवहन और रोजगार को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है.
2.83 किमी की ट्विन टनल बनेगी बड़ी इंजीनियरिंग उपलब्धि
परियोजना की प्रमुख विशेषताओं में छत्तीसगढ़ में कोंडागांव और कांकेर के बीच बनने वाली करीब 2.83 किलोमीटर लंबी छह लेन की ट्विन टनल शामिल है. दंडकारण्य के घने जंगलों और पहाड़ी भूभाग को पार करने के लिए इस सुरंग का निर्माण किया जा रहा है. ओडिशा सीमा के पास करीब 1.8 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वियाडक्ट भी बनाया गया है. इसका उद्देश्य पहाड़ी और घाटी वाले क्षेत्रों में सड़क निर्माण के दौरान प्राकृतिक भूगोल पर पड़ने वाले प्रभाव को कम करना है.
जंगल और वन्यजीवों के लिए भी खास इंतजाम
कॉरिडोर का निर्माण संवेदनशील वन क्षेत्रों से होकर हो रहा है. उदांती-सीतानदी टाइगर रिजर्व और आसपास के ईको-सेंसिटिव क्षेत्रों को देखते हुए वन्यजीवों की आवाजाही का भी ध्यान रखा जा रहा है. इसके लिए 27 से अधिक वाइल्डलाइफ अंडरपास, ओवरपास और साउंड बैरियर बनाए जा रहे हैं. इनका उद्देश्य जानवरों की आवाजाही को बाधित होने से बचाना और वाहनों के शोर का असर कम करना है.
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छत्तीसगढ़ के लिए बनेगा समुद्र तक पहुंचने का तेज रास्ता
छत्तीसगढ़ जैसे लैंडलॉक्ड राज्य के लिए विशाखापट्टनम पोर्ट तक तेज और सीधी कनेक्टिविटी बेहद महत्वपूर्ण है. नए कॉरिडोर से खनिज, कृषि और औद्योगिक उत्पादों को समुद्री बंदरगाह तक पहुंचाना आसान होगा. दूरी और यात्रा समय घटने से माल ढुलाई की लागत में कमी आने की उम्मीद है. इससे निर्यात को भी बढ़ावा मिल सकता है और विशाखापट्टनम पोर्ट के जरिए पूर्वी एशिया के बाजारों तक पहुंच आसान हो सकती है. दिसंबर 2026 तक पूरा होने का लक्ष्य रखा गया यह कॉरिडोर बस्तर के जंगलों से लेकर पूर्वी घाट की पहाड़ियों और विशाखापट्टनम के समुद्र तक एक नया आर्थिक गलियारा तैयार करेगा. इसकी अहमियत सिर्फ 13-14 घंटे के सफर को 5-6 घंटे तक सीमित करने में नहीं, बल्कि मध्य भारत के कारोबार, रोजगार और समुद्री व्यापार को नई रफ्तार देने में भी होगी.


