Gurugram-Jhajjar Highway: गुरुग्राम और झज्जर के बीच करीब 33 किमी हाईवे के लिए NHAI ने 3 रूट विकल्प तैयार किए हैं. परियोजना की अनुमानित लागत 3,000-4,000 करोड़ रुपये है. एक विकल्प में 400 एकड़ सरकारी जमीन का इस्तेमाल हो सकता है.
हरियाणा में गुरुग्राम और झज्जर के बीच सड़क कनेक्टिविटी को मजबूत करने की तैयारी तेज हो गई है. भारतीय राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण यानी NHAI ने करीब 33 किलोमीटर लंबे प्रस्तावित कॉरिडोर के लिए तीन संभावित रूट विकल्प तैयार किए हैं. इनमें मौजूदा सड़क को चौड़ा करने से लेकर खेतों के बीच नया हाईवे बनाने तक के विकल्प शामिल हैं. फिलहाल तीनों प्रस्ताव एलाइनमेंट अप्रूवल कमेटी के पास मंजूरी के लिए भेजे गए हैं.
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गुरुग्राम और झज्जर के बीच क्यों जरूरी है नया हाईवे
गुरुग्राम से झज्जर जाने वाले वाहनों के लिए वजीरपुर और धनकोट की तरफ से जाने वाले मार्ग प्रमुख रास्ते हैं. वजीरपुर से झज्जर की ओर वाहनों का दबाव अधिक होने के कारण कई बार जाम की स्थिति बनती है. इसी समस्या को देखते हुए इस कनेक्टिविटी को बेहतर करने के लिए हाईवे परियोजना पर काम आगे बढ़ाया जा रहा है.
यह प्रस्तावित कॉरिडोर गुरुग्राम-पटौदी रोड के हरसारू बाईपास क्षेत्र से झज्जर तक करीब 33 किलोमीटर का है. NHAI की योजना इसे छह लेन की सड़क के रूप में विकसित करने की है.
पहला विकल्प: मौजूदा सड़क होगी चौड़ी
पहले विकल्प में वजीरपुर से झज्जर तक मौजूद सड़क को चौड़ा करने की योजना है. वर्तमान में सड़क दोनों तरफ दो-दो लेन की है. प्रस्ताव के मुताबिक इसे तीन-तीन लेन किया जा सकता है और दोनों तरफ दो-दो लेन की सर्विस रोड भी बनाई जा सकती है.
इस विकल्प के लिए आसपास के गांवों की करीब 395 एकड़ जमीन के अधिग्रहण की जरूरत बताई गई है.
दूसरा विकल्प: हरसारू से बनेगा नया हाईवे
दूसरे विकल्प में NH-352W पर स्थित हरसारू से झज्जर तक खेतों के बीच नया हाईवे बनाने का प्रस्ताव है. इसके लिए करीब 494 एकड़ जमीन की आवश्यकता होगी.
इस विकल्प की सबसे बड़ी खासियत यह है कि प्रस्तावित रास्ते में करीब 400 एकड़ जमीन हरियाणा सरकार की बताई गई है. इसलिए इस हिस्से के लिए निजी जमीन के अधिग्रहण की जरूरत नहीं होगी.
तीसरा विकल्प: वजीरपुर से नया ग्रीनफील्ड रूट
तीसरे विकल्प में गुरुग्राम-पटौदी रोड से वजीरपुर के रास्ते खेतों के बीच से झज्जर तक नया हाईवे बनाने का प्रस्ताव है. इसके लिए करीब 475 एकड़ जमीन की जरूरत बताई गई है.
इस विकल्प में सरकारी जमीन की हिस्सेदारी काफी कम है. उपलब्ध जानकारी के अनुसार करीब साढ़े छह एकड़ जमीन ही सरकारी है, जबकि बाकी जमीन के अधिग्रहण की जरूरत पड़ सकती है.
3 से 4 हजार करोड़ रुपये की लागत
तीनों विकल्पों में से जिस रूट को मंजूरी मिलेगी, उस पर परियोजना की अनुमानित लागत करीब 3,000 से 4,000 करोड़ रुपये बताई गई है. NHAI की ओर से सलाहकार कंपनी ने सर्वे कर तीन एलाइनमेंट तैयार किए हैं.
अब एलाइनमेंट अप्रूवल कमेटी इनमें से किसी एक विकल्प पर फैसला करेगी. इसके बाद विस्तृत परियोजना रिपोर्ट यानी DPR तैयार की जाएगी. इसलिए अभी यह कहना जल्दबाजी होगी कि अंतिम हाईवे किस रूट से बनेगा.
जमीन अधिग्रहण से किसानों पर पड़ेगा असर
प्रस्तावित रूटों में जमीन अधिग्रहण बड़ा मुद्दा है. खास तौर पर पहले और तीसरे विकल्प में बड़ी मात्रा में निजी जमीन की आवश्यकता बताई गई है. वहीं दूसरे विकल्प में करीब 400 एकड़ सरकारी जमीन होने के कारण भूमि अधिग्रहण का दबाव तुलनात्मक रूप से कम हो सकता है.
हाईवे का अंतिम एलाइनमेंट तय होने के बाद ही यह स्पष्ट होगा कि किन गांवों की कितनी जमीन परियोजना की जद में आएगी.
मंजूरी के बाद आगे बढ़ेगा काम
अभी परियोजना निर्माण के चरण में नहीं पहुंची है. तीनों एलाइनमेंट को मंजूरी मिलने के बाद DPR तैयार होगी और उसके बाद परियोजना से जुड़े अगले चरण आगे बढ़ेंगे. यानी फिलहाल गुरुग्राम-झज्जर हाईवे को लेकर सबसे अहम फैसला रूट के चयन का है.
अगर प्रस्तावित हाईवे का निर्माण योजना के मुताबिक आगे बढ़ता है, तो गुरुग्राम, फर्रुखनगर और झज्जर क्षेत्र के बीच सड़क संपर्क बेहतर होने की उम्मीद है. साथ ही मौजूदा मार्ग पर ट्रैफिक दबाव और जाम की समस्या कम करने में भी मदद मिल सकती है.


