कुछ शुभचिंतक ऐसे होते हैं,
जो आपका शुभ होता देख
चिंता में आ जाते हैं.
आपकी आंखों में चमक दिखे,
तो उनकी नींद उड़ जाती है,
आपके होंठों पर मुस्कान आए,
तो उनके सवाल बढ़ जाते हैं.
वे कहते हैं,
“हम तो तुम्हारे भले की सोचते हैं”,
मगर उनकी बातों में
आपकी उड़ान का डर छिपा होता है.
आप एक कदम आगे बढ़ें,
तो वे दस कारण गिनाते हैं
कि रास्ता कितना कठिन है,
मंजिल कितनी दूर है
और गिरने का खतरा कितना बड़ा है.
आप सफल हों,
तो उन्हें आपकी मेहनत नहीं दिखती,
उन्हें दिखती है
सिर्फ आपकी किस्मत.
आप आगे बढ़ें,
तो कहते हैं, “समय अच्छा था.”
आप हारकर फिर उठें,
तो कहते हैं, “देखो, हमने पहले ही कहा था.”
अजीब होते हैं ऐसे रिश्ते,
जहां आपकी खुशी
दूसरे के मन में बेचैनी पैदा करती है.
आपका सम्मान बढ़े,
तो उनके भीतर तुलना जागती है.
आपकी तारीफ हो,
तो उन्हें अपनी कमी याद आती है.
आपके सपनों को पंख मिलें,
तो उन्हें अपनी अधूरी उड़ान
याद आने लगती है.
ऐसे लोग रोकते सीधे नहीं,
बस डराते रहते हैं.
कभी दुनिया का नाम लेकर,
कभी रिश्तों का,
कभी समाज का,
और कभी आपकी औकात का.
कहते हैं,
“इतना मत सोचो.”
“इतना मत उड़ो.”
“लोग क्या कहेंगे?”
लेकिन सच यह है,
उन्हें डर लोगों की बातों का नहीं,
आपके बदल जाने का होता है.
क्योंकि जब आप बदलते हैं,
तो उनकी बनाई हुई
आपकी पुरानी तस्वीर टूट जाती है.
जब आप खुद पर भरोसा करते हैं,
तो उनका प्रभाव कम हो जाता है.
और जब आप अपनी राह चुन लेते हैं,
तो उनके हाथ से
आपको चलाने की डोर छूट जाती है.
इसलिए ऐसे शुभचिंतकों से
नफरत मत करना.
बस उनकी बातों को
अपनी दिशा मत बनने देना.
उनकी चिंता को
अपना डर मत बना लेना.
हर सलाह सच नहीं होती,
हर चिंता प्रेम नहीं होती
और हर मुस्कुराता चेहरा
आपकी खुशी में खुश हो,
यह भी जरूरी नहीं.
कुछ लोग आपके गिरने पर
आपको उठाने आते हैं,
और कुछ आपके उठने पर
आपका हाथ खींचने.
फर्क सिर्फ इतना है
कि सच्चे शुभचिंतक
आपकी सफलता से खुश होते हैं,
और नकली शुभचिंतक
आपकी सफलता का कारण
ढूंढते-ढूंढते
आपकी सफलता से ही परेशान हो जाते हैं.
इसलिए चलते रहिए.
धीरे चलिए, मगर रुकिए मत.
अपनी रोशनी कम मत कीजिए
किसी की आंखों की जलन के डर से.
जिस दिन आपकी खुशी
किसी की चिंता का कारण बन जाए,
उस दिन बस इतना याद रखिए—
आपका जीवन
उनकी चिंता का समाधान नहीं,
आपके सपनों का सफर है.
और जो सच में आपके अपने हैं,
वे आपकी जीत देखकर
प्रतिस्पर्धा नहीं करेंगे,
वे ताली बजाएंगे.
क्योंकि सच्चे शुभचिंतक
आपका शुभ देखकर
चिंता में नहीं आते,
वे आपके शुभ में
अपना सुख खोज लेते हैं.


