मुंबई: महाराष्ट्र नवनिर्माण सेना (मनसे) प्रमुख राज ठाकरे ने राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के एक कार्यक्रम में वरिष्ठ IPS अधिकारी विश्वास नांगरे पाटिल की मौजूदगी और उनके भाषण को लेकर तीखी प्रतिक्रिया दी है. उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी को किसी संगठन के प्रति सार्वजनिक रूप से अपना समर्थन या लगाव व्यक्त करना है, तो पहले सरकारी सेवा से इस्तीफा देना चाहिए.
RSS मंच पर दिए गए भाषण पर उठाए सवाल
राज ठाकरे ने सोशल मीडिया पर जारी अपने बयान में कहा कि एक पुलिस अधिकारी से निष्पक्ष रहने और केवल अपनी वर्दी के प्रति निष्ठावान रहने की अपेक्षा की जाती है. उन्होंने कहा कि यदि किसी अधिकारी को RSS के प्रति इतना लगाव है कि वह उसके मंच से सार्वजनिक रूप से उसकी प्रशंसा करे, तो उसे सरकारी सेवा छोड़कर सीधे उस संगठन या उससे जुड़े राजनीतिक दल में शामिल हो जाना चाहिए.
उन्होंने व्यंग्य करते हुए कहा कि ऐसे अधिकारियों के लिए राजनीति में जगह बनने की संभावना हमेशा रहती है.
मुख्यमंत्री से भी किया सवाल
मनसे प्रमुख ने महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री से भी सवाल किया कि क्या सरकार एक वरिष्ठ IPS अधिकारी की इस तरह की सार्वजनिक भागीदारी को उचित मानती है. उन्होंने कहा कि यदि आज ऐसी घटनाओं को स्वीकार किया जाता है, तो भविष्य में किसी अन्य विचारधारा से जुड़े कार्यक्रम में अधिकारी की मौजूदगी पर आपत्ति नहीं उठाई जानी चाहिए.
2012 की घटना का किया जिक्र
राज ठाकरे ने अपने बयान में वर्ष 2012 के आजाद मैदान हिंसा के बाद की एक घटना का भी उल्लेख किया. उन्होंने कहा कि उस समय पुलिस बल के समर्थन में उनकी पार्टी के आंदोलन का समर्थन करने वाले एक पुलिसकर्मी के खिलाफ कार्रवाई की गई थी. ऐसे में अब समान परिस्थितियों में अलग-अलग मानदंड अपनाना उचित नहीं होगा.
विश्वास नांगरे पाटिल हाल ही में बने हैं नागपुर पुलिस आयुक्त
विश्वास नांगरे पाटिल को हाल ही में नागपुर का पुलिस आयुक्त नियुक्त किया गया है. वे वर्ष 2008 के मुंबई आतंकी हमलों के दौरान अपनी भूमिका के कारण देशभर में चर्चित रहे थे. हाल ही में वे RSS के एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे, जहां उन्होंने संगठन के अनुशासन, समर्पण और राष्ट्रभक्ति की सराहना की थी.
विपक्ष ने भी जताई आपत्ति
इस मुद्दे पर विपक्षी नेताओं ने भी प्रतिक्रिया दी है. कांग्रेस नेता प्रफुल्ल गुढ़ाढे ने IPS अधिकारी के भाषण पर सवाल उठाते हुए चिंता व्यक्त की कि इससे पुलिस की निष्पक्षता को लेकर सवाल खड़े हो सकते हैं.
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राज ठाकरे ने अपने बयान के अंत में कहा कि एक सक्षम और सम्मानित अधिकारी को अपनी संस्थागत गरिमा बनाए रखनी चाहिए और किसी भी राजनीतिक दल या संगठन के प्रति सार्वजनिक झुकाव दिखाने से बचना चाहिए.


