UP Elections 2027: संसद के मानसून सत्र के दौरान लोकसभा में एंटी-पेपर लीक बिल (Public Examinations Amendment Bill) पर चर्चा के दौरान समाजवादी पार्टी (सपा) के अध्यक्ष और कन्नौज से सांसद अखिलेश यादव ने केंद्र सरकार पर जमकर निशाना साधा. अपने भाषण में उन्होंने NEET पेपर लीक, राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) की जवाबदेही, प्राथमिक शिक्षा की स्थिति और छात्र आंदोलनों जैसे गंभीर मुद्दों पर सरकार को कटघरे में खड़ा किया.
हालांकि, तकनीकी रूप से यह बहस केंद्र सरकार द्वारा लाए गए कानून पर थी, लेकिन अखिलेश यादव के पूरे भाषण का राजनीतिक केंद्र उत्तर प्रदेश और आने वाला 2027 का यूपी विधानसभा चुनाव नजर आया. राजनीतिक विशेषज्ञों के मुताबिक, अखिलेश यादव ने संसद के मंच का इस्तेमाल सीधे तौर पर यूपी की योगी आदित्यनाथ सरकार को घेरने और 2027 के लिए सपा का एजेंडा तय करने के लिए किया. आइए समझते हैं अखिलेश यादव के भाषण के पीछे का पूरा सियासी गणित…
केंद्रीय नेतृत्व पर हमला
तत्कालीन केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे और छात्र आंदोलन के दबाव को अखिलेश ने प्रमुखता से उठाया. उन्होंने चुटकी लेते हुए कहा कि “एक प्रधान जी को हटाकर आपने प्रधानमंत्री को बड़े संकट से बचा लिया.” इसके जरिए उन्होंने यह संदेश दिया कि जब युवा एकजुट होते हैं, तो ताकतवर सरकार को भी झुकना पड़ता है.
पेपर लीक को बनाया युवाओं का सबसे बड़ा चुनावी मुद्दा
अखिलेश यादव ने अपने भाषण में 10 साल में हुई 20 से अधिक भर्ती परीक्षाओं के पेपर लीक होने का आंकड़ा दिया. उन्होंने तंज कसा कि सरकार 2024 में भी कानून लाई थी, फिर 2026 तक संशोधन क्यों करने पड़ रहे हैं? यूपी में पुलिस दरोगा भर्ती, जूनियर इंजीनियर और यूपीटीईटी जैसी परीक्षाओं के पेपर लीक होने का मुद्दा बेहद संवेदनशील है. युवाओं और प्रतियोगी छात्रों को अपने पाले में लाकर सपा 2027 में ‘युवा विरोधी सरकार’ का नरेटिव तैयार कर रही है.
योगी सरकार पर सीधा वार
संसद में एंटी-पेपर लीक बिल केंद्र से जुड़ा था, लेकिन अखिलेश ने जानबूझकर इसमें उत्तर प्रदेश की 10वीं-12वीं और स्थानीय भर्ती बोर्ड की धांधलियों को पिरोया. उन्होंने दिखाया कि देश का सबसे बड़ा राज्य (यूपी) परीक्षा प्रणाली के संकट से सबसे ज्यादा प्रभावित है, जिससे सीधे तौर पर राज्य सरकार के प्रशासनिक इकबाल पर सवाल खड़े हुए.
जो चढ़ावा चोर नहीं रोक पाए, वो पेपर लीक क्या रोकेंगे?
भाषण का यह वाक्य संसद के साथ-साथ सोशल मीडिया पर सबसे ज्यादा चर्चित रहा. मंदिर के चढ़ावे और धार्मिक आयोजनों में चोरी/भ्रष्टाचार का हवाला देकर अखिलेश ने बीजेपी की ‘सुशासन’ और ‘कट्टर ईमानदारी’ की छवि पर प्रशासनिक असफलता का ठप्पा लगाने की कोशिश की.
प्राथमिक स्कूलों को बंद करने का मुद्दा: गरीब वोट बैंक पर साध
अखिलेश ने आरोप लगाया कि सरकार ने योजनाबद्ध तरीके से प्राथमिक स्कूलों को निशाना बनाकर बंद किया है. उन्होंने कहा कि इन सरकारी स्कूलों में दलित, पिछड़े और गरीब परिवारों के बच्चे पढ़ते हैं. नींव पर ही हमला करके गरीब बच्चों को शिक्षा से दूर किया जा रहा है. यह सीधे तौर पर पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) वोट बैंक को साधने की रणनीति का हिस्सा है.
2027 के लिए युवाओं और रोजगार का नया नरेटिव
अखिलेश यादव ने स्पष्ट किया कि 2027 का चुनाव केवल धार्मिक या जातीय आधार पर नहीं लड़ा जाएगा, बल्कि इसका केंद्र ‘शिक्षा, परीक्षा और रोजगार’ होगा. उन्होंने कहा, “अगर शिक्षा अच्छी होगी, परीक्षा सच्ची होगी, तो तरक्की भी पक्की होगी.” उन्होंने चेतावनी दी कि युवा आबादी को अगर अवसर नहीं मिले तो यह सरकार के लिए आपदा बन जाएगी.
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RSS और शिक्षा के वैचारिक मॉडल पर प्रहार
सपा प्रमुख ने आरएसएस पर हमला बोलते हुए कहा कि देश के शीर्ष शैक्षणिक संस्थानों में एक ही विचारधारा के लोगों को बैठाकर उन्हें ध्वस्त कर दिया गया है. उन्होंने पेपर लीक के मुद्दे को केवल एक प्रशासनिक विफलता न बताकर बीजेपी के वैचारिक एजेंडे से जोड़ा, जिससे धर्मनिरपेक्ष और प्रगतिशील वोट बैंक को लामबंद किया जा सके.


