लखनऊ/अयोध्या: राम मंदिर चढ़ावा चोरी मामले में गठित विशेष जांच दल (SIT) ने राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारी डा. अनिल मिश्रा को लेकर बेहद गंभीर खुलासे किए हैं. एसआईटी की जांच में सामने आए तथ्यों के आधार पर माना जा रहा है कि टीम अपनी अंतिम रिपोर्ट में डा. अनिल मिश्रा को आपराधिक साजिश (Criminal Conspiracy) में शामिल होने का आरोपी बना सकती है. जांच रिपोर्ट में निगरानी के स्तर पर डा. मिश्रा की घोर लापरवाही सामने आई है. उन पर सुरक्षा उपायों और तलाशी के लिए तय पूर्वनिर्धारित व्यवस्था को शिथिल (कमजोर) करने का सीधा उत्तरदायी ठहराया गया है.
वरिष्ठ स्तर पर बड़ी लापरवाही, शिकायतों को किया नजरअंदाज
लखनऊ के मंडलायुक्त विजय विश्वास पंत और आईजी किरण एस. की अगुवाई में गठित एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में स्पष्ट किया है कि डा. अनिल मिश्रा ट्रस्ट के वरिष्ठ पदाधिकारियों में से एक हैं. वह वित्तीय मामलों, नकदी प्रबंधन और पूरी प्रक्रिया की मॉनिटरिंग कर रहे थे. इसके अलावा, भारतीय स्टेट बैंक (SBI) के साथ मिलकर चढ़ावे की रकम की गिनती के लिए मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने में भी वह ट्रस्ट के मुख्य प्रतिनिधि थे.
एसआईटी के अनुसार, डा. अनिल मिश्रा की भूमिका इसलिए सबसे महत्वपूर्ण और सवालों के घेरे में है क्योंकि आंतरिक माध्यमों से उन तक यह शिकायतें पहुंची थीं कि गणना कर्मियों (कैश काउंटिंग स्टाफ) की तलाशी नहीं ली जा रही है. इसके बावजूद उन्होंने तलाशी व्यवस्था लागू कराने के लिए कोई प्रभावी लिखित निर्देश जारी नहीं किया.
बायोमीट्रिक उपस्थिति, निर्धारित वेशभूषा, निजी वस्तुओं पर प्रतिबंध, हुंडीवार गणना, और दैनिक प्रतिवेदन (Daily Reporting) जैसी व्यवस्थाओं को कड़ाई से लागू कराने में उनकी तरफ से भारी उदासीनता बरती गई. एसआईटी ने अपनी रिपोर्ट में साफ तौर पर कहा है कि डा. मिश्रा अपने दायित्वों के प्रति उदासीन रहे, जिससे आरोपियों को चोरी की घटना को अंजाम देने की सहूलियत मिली.
सिफारिश पर बने ‘गणना प्रभारी’ भी घेरे में
जांच में यह भी सामने आया है कि चढ़ावे की रकम की रोजाना गिनती और उसके पर्यवेक्षण में प्रमुख भूमिका निभाने वाले सुभाष श्रीवास्तव को गणना प्रभारी का दायित्व डा. अनिल मिश्रा की सिफारिश पर ही मिला था. सुभाष श्रीवास्तव के कार्यकाल में सुरक्षा और अनुशासन के नियमों की जमकर धज्जियां उड़ीं. सबसे गंभीर बिंदु यह रहा कि गणना कक्ष का प्रभारी होने के बावजूद सुभाष ने कर्मियों की तलाशी सुनिश्चित नहीं कराई. इतना ही नहीं, बिना किसी औपचारिक प्राधिकार (Authority) के चढ़ावा पात्रों (हुंडियों) की चाभियां अनधिकृत लोगों के पास घूमती रहीं और सुभाष श्रीवास्तव इस अनौपचारिक व गैर-कानूनी व्यवस्था को जारी रहने देने के दोषी पाए गए हैं.
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नियुक्ति के एक महीने के भीतर ही शुरू हो गया था चोरी का खेल
एसआईटी की रिपोर्ट में एक और चौंकाने वाला नाम सामने आया है मनीष कुमार यादव. इस मामले के मुख्य आरोपियों में से एक ‘टिन्नू यादव’ का भतीजा है. टिन्नू की सिफारिश पर ही मनीष को गणना कर्मी (Counting Staff) के रूप में नियुक्त किया गया था. मनीष यादव ने 15 अप्रैल 2026 से गणना कक्ष में काम करना शुरू किया था और महज एक महीने के भीतर ही, यानी 11 मई 2026 से वह चढ़ावे की चोरी के इस खेल में पूरी तरह संलिप्त पाया गया. एसआईटी की इस प्रारंभिक और आने वाली अंतिम रिपोर्ट ने अब ट्रस्ट के प्रबंधन और सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं, जिसके बाद डा. अनिल मिश्रा समेत कई करीबियों पर कानूनी शिकंजा कसना तय माना जा रहा है.


