Sant Kabir Nagar News: मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की घोषणा के बाद संत कबीर नगर में बंद पड़ी संत कबीर कताई मिल्स लिमिटेड-मगहर की जमीन पर टेक्सटाइल पार्क बनाने की कवायद तेज हो गई है. प्रस्तावित पार्क के संचालन से जिले में औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने और पांच हजार से अधिक लोगों के लिए रोजगार के अवसर पैदा होने की उम्मीद है.
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सीएम योगी ने की थी औद्योगिक गतिविधियां बढ़ाने की घोषणा
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ 11 अगस्त 2026 को संत कबीर नगर पहुंचे थे. उन्होंने विकास भवन के पास स्थित कांशीराम स्पोर्ट्स स्टेडियम में आयोजित कार्यक्रम में करीब 684 करोड़ रुपये की 201 परियोजनाओं का लोकार्पण और शिलान्यास किया था. इस दौरान उन्होंने बंद पड़ी संत कबीर कताई मिल-मगहर से जुड़ी औद्योगिक गतिविधियों को गति देने की बात कही थी. इसके बाद प्रस्तावित टेक्सटाइल पार्क को लेकर विभागीय स्तर पर गतिविधियां तेज हुई हैं.
सूत से कपड़ा और रेडीमेड गारमेंट तक होगा काम
प्रस्तावित टेक्सटाइल पार्क में कपड़ा उद्योग से जुड़ी कई इकाइयां स्थापित किए जाने की योजना है. यहां सूत से धागा, धागे से कपड़ा, फिनिशिंग, रंगाई, साइजिंग, प्रिंटिंग और रेडीमेड गारमेंट जैसी गतिविधियां संचालित की जा सकती हैं. पार्क के लिए निवेशकों से आवेदन लेने की प्रक्रिया चल रही है. शासन स्तर पर प्राप्त आवेदनों के आधार पर निवेशकों का चयन किया जाना है.
निर्बाध बिजली के लिए उपकेंद्र बनाने की तैयारी
टेक्सटाइल पार्क के संचालन में बिजली की कमी बाधा न बने, इसके लिए एक विद्युत उपकेंद्र स्थापित करने की कवायद भी शुरू हो गई है. कुछ दिन पहले ट्रांसमिशन विभाग के एसडीओ मनोज कुमार के नेतृत्व में टीम बंद कताई मिल परिसर पहुंची थी. टीम प्रस्तावित पार्क के लिए आवश्यक बिजली की क्षमता का आकलन कर रही है. इस संबंध में विद्युत वितरण खंड-खलीलाबाद के एक्सईएन राजेश कुमार और हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग के अधिकारियों से भी बातचीत की गई है.
कताई मिल बंद होने से हजारों लोगों पर पड़ा था असर
संत कबीर कताई मिल के बंद होने से पहले यहां बड़ी संख्या में लोगों को रोजगार मिलता था. गुजरात के सूरत, अहमदाबाद और वडोदरा समेत अन्य क्षेत्रों से मिल में सूत आता था, जिसकी कताई कर धागा तैयार किया जाता था. यह धागा कपड़ा मिलों, छोटे उद्यमियों और बुनकरों को बेचा जाता था. मिल से तैयार धागा बस्ती, गोरखपुर, देवरिया, महराजगंज, सिद्धार्थनगर, अंबेडकरनगर के टांडा, बाराबंकी, कानपुर और लखनऊ समेत कई क्षेत्रों में जाता था. बड़ी संख्या में बुनकर भी इसी धागे से कपड़ा तैयार कर अपनी आजीविका चलाते थे.
वर्ष 1990 में मिल बंद होने के बाद तीन हजार से अधिक कर्मचारी बेरोजगार हो गए थे. इसके साथ ही कई बुनकरों के पारंपरिक रोजगार पर भी असर पड़ा और कुछ लोग काम की तलाश में दूसरे राज्यों की ओर चले गए.
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जमीन की रजिस्ट्री पूरी, अब निवेशकों के चयन पर नजर
अधिकारियों के मुताबिक कताई मिल की जमीन की रजिस्ट्री हो चुकी है. अब टेक्सटाइल पार्क की स्थापना और उसके संचालन की दिशा में आगे की प्रक्रिया चल रही है. निवेश आने और औद्योगिक इकाइयां स्थापित होने के बाद क्षेत्र में रोजगार और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है. हथकरघा एवं वस्त्रोद्योग विभाग के सहायक आयुक्त, परिक्षेत्र-गोरखपुर सिद्धार्थ सिंह के अनुसार, टेक्सटाइल पार्क की स्थापना और संचालन से औद्योगिक गतिविधियों को गति मिलेगी और रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे. इससे क्षेत्र में व्यापक बदलाव देखने को मिल सकता है.


