Weather Update 18 July 2026: भारत मौसम विज्ञान विभाग (IMD) के नवीनतम मौसम बुलेटिन के अनुसार 18 जुलाई 2026, शनिवार से देश के अलग-अलग हिस्सों में मौसम का स्वरूप अलग-अलग रहने वाला है. पश्चिम बंगाल और आसपास के क्षेत्रों पर बना सुस्पष्ट निम्न दबाव का क्षेत्र कमजोर होकर सामान्य निम्न दबाव के क्षेत्र में बदल गया है, लेकिन इसका प्रभाव अभी भी पूर्वी और मध्य भारत के कई राज्यों पर बना हुआ है. इसके कारण कई इलाकों में भारी से बहुत भारी बारिश का दौर जारी रहने की संभावना है, जबकि पश्चिम-मध्य भारत, दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत और उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी क्षेत्रों के कई हिस्सों में वर्षा गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रह सकती हैं. मौसम विभाग ने लोगों को स्थानीय प्रशासन और आधिकारिक मौसम चेतावनियों पर लगातार नजर बनाए रखने की सलाह दी है.
निम्न दबाव क्षेत्र का असर अभी भी बना हुआ
मौसम विभाग के अनुसार पश्चिम बंगाल एवं आसपास के क्षेत्रों पर स्थित निम्न दबाव का क्षेत्र कमजोर जरूर हुआ है, लेकिन इससे नमी की पर्याप्त आपूर्ति बनी हुई है. इसी कारण पूर्वी भारत, उत्तर-पूर्व भारत, बिहार, उत्तर प्रदेश, पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र तथा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम में अगले सात दिनों तक कई स्थानों पर भारी से बहुत भारी बारिश की संभावना बनी हुई है. विशेष रूप से 18 और 19 जुलाई को उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम में कहीं-कहीं अत्यंत भारी वर्षा होने की संभावना जताई गई है.
देशभर के लिए प्रमुख मौसम अलर्ट
| क्षेत्र | 18 जुलाई से प्रमुख स्थिति |
|---|---|
| उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम | भारी से अत्यंत भारी वर्षा का अलर्ट |
| बिहार | कई स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना |
| पूर्वी उत्तर प्रदेश | भारी वर्षा का दौर जारी रहने की संभावना |
| पश्चिमी हिमालयी क्षेत्र | उत्तराखंड, हिमाचल में भारी वर्षा का खतरा |
| छत्तीसगढ़ | कई क्षेत्रों में भारी से बहुत भारी बारिश का असर जारी |
| ओडिशा | भारी बारिश का सिलसिला जारी रहने की संभावना |
| उत्तर-पूर्व भारत | कई राज्यों में भारी से बहुत भारी वर्षा |
| पश्चिम-मध्य एवं दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत | वर्षा गतिविधियां सामान्य से कमजोर रहने की संभावना |
उत्तर-पश्चिम भारत का मौसम
उत्तर-पश्चिम भारत में 18 जुलाई से मौसम धीरे-धीरे सक्रिय होने लगेगा. जम्मू-कश्मीर, लद्दाख, हिमाचल प्रदेश और उत्तराखंड में वर्षा की गतिविधियां बढ़ेंगी. उत्तराखंड में 17 से 23 जुलाई तक अलग-अलग स्थानों पर गरज-चमक के साथ बारिश होने की संभावना है, जबकि 18 से 21 जुलाई के बीच कई स्थानों पर भारी वर्षा का भी पूर्वानुमान है.
हिमाचल प्रदेश में 18 जुलाई से वर्षा का दायरा बढ़ेगा और 19 से 22 जुलाई के बीच भारी बारिश की संभावना बनी रहेगी. जम्मू-कश्मीर क्षेत्र में भी 20 से 22 जुलाई के दौरान कहीं-कहीं बहुत भारी वर्षा होने की संभावना व्यक्त की गई है.
हरियाणा, चंडीगढ़, दिल्ली और पंजाब में 20 से 22 जुलाई के दौरान वर्षा गतिविधियां तेज हो सकती हैं. पश्चिमी उत्तर प्रदेश में 19 से 23 जुलाई तथा पूर्वी उत्तर प्रदेश में 18 से 23 जुलाई तक व्यापक वर्षा की संभावना है. पूर्वी उत्तर प्रदेश में 19 से 21 जुलाई के दौरान कहीं-कहीं बहुत भारी बारिश का भी अनुमान है.
मध्य भारत में कैसा रहेगा मौसम
मध्य प्रदेश में मौसम दो हिस्सों में बंटा रहेगा. पूर्वी मध्य प्रदेश में 17 से 21 जुलाई तक भारी वर्षा की संभावना बनी हुई है, जबकि पश्चिमी मध्य प्रदेश में 21 से 23 जुलाई के बीच वर्षा का दायरा बढ़ेगा.
छत्तीसगढ़ में 18 जुलाई तक कहीं-कहीं बहुत भारी वर्षा का असर बना रह सकता है. 19 से 21 जुलाई के बीच भी अलग-अलग स्थानों पर भारी बारिश की संभावना बनी हुई है. विदर्भ में 17 से 18 जुलाई तक वर्षा अधिक सक्रिय रहेगी और बाद के दिनों में भी कई स्थानों पर बारिश जारी रह सकती है.
इन क्षेत्रों में गरज-चमक और तेज हवाओं की भी संभावना जताई गई है. मध्य प्रदेश के कई हिस्सों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से झोंकेदार हवाएं चल सकती हैं.
पूर्वी भारत में बारिश का मजबूत दौर
पूर्वी भारत में मानसून सबसे अधिक सक्रिय क्षेत्रों में बना रहेगा. बिहार में 18 से 21 जुलाई तक व्यापक वर्षा की संभावना है. 19 और 20 जुलाई को कहीं-कहीं बहुत भारी वर्षा हो सकती है.
झारखंड में 17 से 20 जुलाई तक कई स्थानों पर भारी बारिश का पूर्वानुमान है. गंगीय पश्चिम बंगाल में भी लगातार वर्षा गतिविधियां बनी रहेंगी.
उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम सबसे अधिक संवेदनशील क्षेत्रों में शामिल हैं. 18 और 19 जुलाई को यहां अत्यंत भारी वर्षा होने की संभावना है, जिससे भूस्खलन, सड़क अवरोध और नदी-नालों के जलस्तर में वृद्धि की आशंका बनी रहेगी.
ओडिशा में 18 से 20 जुलाई तक भारी वर्षा जारी रह सकती है.
उत्तर-पूर्व भारत में सात दिन तक बारिश
अरुणाचल प्रदेश, असम, मेघालय, नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में अगले सात दिनों तक अलग-अलग स्थानों पर भारी वर्षा की संभावना बनी हुई है.
अरुणाचल प्रदेश में 19 से 23 जुलाई तक भारी वर्षा तथा 17 और 18 जुलाई के प्रभाव के बाद भी कई क्षेत्रों में नदियों का जलस्तर बढ़ा रह सकता है.
असम और मेघालय में 20 से 23 जुलाई के बीच भारी वर्षा का अनुमान है, जबकि नागालैंड, मणिपुर, मिजोरम और त्रिपुरा में पूरे सप्ताह कई स्थानों पर भारी बारिश हो सकती है.
पश्चिम भारत में कैसी रहेगी स्थिति
कोंकण और गोवा में 17 से 23 जुलाई तक व्यापक वर्षा जारी रहने की संभावना है. गुजरात क्षेत्र, मध्य महाराष्ट्र, मराठवाड़ा तथा सौराष्ट्र-कच्छ में छिटपुट से मध्यम वर्षा होने का अनुमान है.
मध्य महाराष्ट्र और मराठवाड़ा में 17 जुलाई को भारी वर्षा दर्ज होने की संभावना व्यक्त की गई थी, जबकि आगे वर्षा की तीव्रता अपेक्षाकृत कम रह सकती है.
दक्षिण भारत में बारिश सीमित लेकिन कुछ हिस्सों में अलर्ट
दक्षिण भारत के अधिकांश हिस्सों में अगले सात दिनों तक वर्षा गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रहने का अनुमान है. हालांकि तटीय कर्नाटक, केरल, तेलंगाना, उत्तर एवं दक्षिण आंतरिक कर्नाटक, रायलसीमा और तटीय आंध्र प्रदेश के कुछ क्षेत्रों में गरज-चमक के साथ बारिश जारी रह सकती है.
केरल, तटीय कर्नाटक और दक्षिण आंतरिक कर्नाटक में कुछ स्थानों पर भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना बनी हुई है. तेलंगाना में 17 और 18 जुलाई के दौरान 50 से 70 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार वाली तेज हवाओं के साथ थंडरस्क्वॉल की चेतावनी जारी की गई थी, जिसका प्रभाव आसपास के क्षेत्रों में भी मौसम को प्रभावित कर सकता है.
गरज, बिजली और तेज हवाओं का भी खतरा
देश के कई राज्यों में केवल बारिश ही नहीं बल्कि गरज-चमक और तेज हवाओं का भी खतरा बना हुआ है. मध्य प्रदेश, झारखंड, पश्चिम बंगाल, जम्मू-कश्मीर, राजस्थान, कर्नाटक, आंध्र प्रदेश, तेलंगाना और अन्य कई राज्यों में 40 से 60 किलोमीटर प्रति घंटे तक की रफ्तार से तेज हवाएं चल सकती हैं.
पहाड़ी क्षेत्रों में बिजली गिरने की घटनाओं की संभावना भी बनी हुई है. ऐसे में खुले स्थानों पर जाने से बचने की सलाह दी गई है.
जहां बारिश कम रहेगी
मौसम विभाग के अनुसार पश्चिम-मध्य भारत और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के अधिकांश हिस्सों में अगले सात दिनों तक वर्षा गतिविधियां सामान्य से कमजोर रह सकती हैं. उत्तर-पश्चिम भारत के मैदानी क्षेत्रों में भी अगले तीन दिनों तक व्यापक बारिश की संभावना कम रहेगी, हालांकि कुछ स्थानों पर स्थानीय स्तर पर वर्षा हो सकती है.
लोगों पर संभावित असर
- अत्यधिक वर्षा वाले क्षेत्रों में जलभराव और शहरी बाढ़ की स्थिति बन सकती है.
- पहाड़ी राज्यों में भूस्खलन और सड़क अवरोध की आशंका बढ़ सकती है.
- नदियों और छोटे जलस्रोतों का जलस्तर तेजी से बढ़ सकता है.
- बिजली गिरने और तेज हवाओं से जनजीवन प्रभावित हो सकता है.
- खेतों में जलभराव से खरीफ फसलों पर स्थानीय प्रभाव पड़ सकता है.
- सड़क और रेल यातायात में देरी संभव है.
क्या सावधानियां बरतें
- मौसम विभाग और स्थानीय प्रशासन की आधिकारिक चेतावनियों का पालन करें.
- भारी बारिश के दौरान नदी, नाले और जलभराव वाले क्षेत्रों से दूर रहें.
- गरज-चमक के समय खुले मैदान, पेड़ों और बिजली के खंभों के पास खड़े न हों.
- पहाड़ी क्षेत्रों की यात्रा से पहले मौसम अपडेट अवश्य जांचें.
- आवश्यक दवाइयां, टॉर्च, मोबाइल चार्जर और आपातकालीन सामान तैयार रखें.
- तेज हवा और बिजली के दौरान अनावश्यक यात्रा से बचें.
Source: यह मौसम अपडेट भारत मौसम विज्ञान विभाग (India Meteorological Department – IMD) द्वारा 17 जुलाई 2026 को जारी आधिकारिक राष्ट्रीय मौसम बुलेटिन और मौसम संबंधी चेतावनी पर आधारित है.
FAQs
Q1. 18 जुलाई 2026 को सबसे ज्यादा भारी बारिश कहां होने की संभावना है?
उत्तर. उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम, बिहार, पूर्वी उत्तर प्रदेश, उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, छत्तीसगढ़, ओडिशा और उत्तर-पूर्व भारत के कई हिस्सों में भारी से बहुत भारी वर्षा की संभावना है.
Q2. क्या दिल्ली और एनसीआर में भारी बारिश होगी?
उत्तर. 18 जुलाई को छिटपुट बारिश संभव है, जबकि 20 से 22 जुलाई के बीच हरियाणा, दिल्ली, चंडीगढ़ और पंजाब में वर्षा गतिविधियां बढ़ने की संभावना है.
Q3. किन राज्यों में भूस्खलन का खतरा अधिक है?
उत्तर. उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश, जम्मू-कश्मीर तथा उप-हिमालयी पश्चिम बंगाल एवं सिक्किम में भारी बारिश के कारण भूस्खलन का जोखिम बढ़ सकता है.
Q4. क्या पूरे देश में मानसून सक्रिय रहेगा?
उत्तर. नहीं. पूर्वी, उत्तर-पूर्वी और हिमालयी क्षेत्रों में मानसून अधिक सक्रिय रहेगा, जबकि पश्चिम-मध्य भारत और दक्षिण प्रायद्वीपीय भारत के कई हिस्सों में वर्षा गतिविधियां अपेक्षाकृत कमजोर रहने की संभावना है.
Q5. भारी बारिश के दौरान आम लोगों को सबसे पहले क्या करना चाहिए?
उत्तर. आधिकारिक मौसम चेतावनी पर नजर रखें, जलभराव वाले क्षेत्रों से बचें, बिजली कड़कने के दौरान खुले स्थानों में न रहें और आवश्यक होने पर ही यात्रा करें.


