पश्चिम एशिया में बढ़ते तनाव, महंगे fuel imports और LPG सप्लाई पर दबाव के बीच भारत अब अपनी energy strategy में बड़ा बदलाव करने की तैयारी कर रहा है. सरकार Coal Gasification यानी “कोयले से गैस बनाने” की technology पर तेजी से काम कर रही है, ताकि आने वाले वर्षों में imported LPG और LNG पर निर्भरता कम की जा सके.
हाल ही में केंद्र सरकार ने Coal Gasification Projects को बढ़ावा देने के लिए ₹37,500 करोड़ की बड़ी योजना को मंजूरी दी है. सरकार का दावा है कि इससे भारत की energy security मजबूत होगी और विदेशों से आने वाले fuel पर खर्च कम किया जा सकेगा.
अब घरों में रखा सोना बनेगा देश की ताकत? PM मोदी की अपील के बाद Gold Industry ने दिया बड़ा सुझाव
आखिर क्या है Coal Gasification?
Coal Gasification एक ऐसी प्रक्रिया है जिसमें कोयले को सीधे जलाने की बजाय उसे chemical process के जरिए “Synthetic Gas” यानी Syngas में बदला जाता है. इस gas का इस्तेमाल:
- LPG alternatives
- fertilizers
- methanol
- ammonia
- power generation
- petrochemicals
जैसे sectors में किया जा सकता है. Experts के अनुसार यह technology traditional coal burning की तुलना में ज्यादा efficient मानी जाती है और इससे industrial fuel production घरेलू स्तर पर बढ़ाया जा सकता है.
सरकार अचानक इतना जोर क्यों दे रही है?
पिछले कुछ महीनों में वैश्विक energy supply chain पर भारी दबाव देखने को मिला. खासकर Strait of Hormuz और West Asia crisis के कारण LPG और LNG सप्लाई को लेकर चिंता बढ़ी. भारत अपनी LPG जरूरतों का बड़ा हिस्सा import करता है, इसलिए अंतरराष्ट्रीय संकट का असर सीधे घरेलू बाजार पर दिखाई देता है. यही वजह है कि अब सरकार:
- imported fuel dependence घटाना
- domestic energy production बढ़ाना
- और forex reserves पर दबाव कम करना
चाहती है.
भारत के पास कितना Coal है?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक भारत के पास दुनिया के सबसे बड़े coal reserves में से एक मौजूद है. Reuters की रिपोर्ट के अनुसार भारत के पास लगभग 401 billion tonnes coal reserves और 47 billion tonnes lignite reserves हैं. यानी सरकार अब उसी घरेलू resource को energy security के लिए इस्तेमाल करना चाहती है.
₹37,500 करोड़ की योजना में क्या होगा?
सरकार की नई scheme के तहत:
- Coal और lignite gasification projects को financial support दिया जाएगा
- plant machinery cost का करीब 20% तक सहायता दी जा सकती है
- private और public sector companies को निवेश के लिए प्रोत्साहन मिलेगा
सरकार का लक्ष्य 2030 तक लगभग 100 million tonnes coal gasification capacity तैयार करना है. कुछ industry estimates के मुताबिक इससे करीब ₹3 लाख करोड़ तक का निवेश आकर्षित हो सकता है.
इससे आम लोगों को क्या फायदा हो सकता है?
अगर Coal Gasification बड़े स्तर पर सफल होती है तो आने वाले वर्षों में:
- LPG imports कम हो सकते हैं
- fuel supply ज्यादा stable हो सकती है
- energy prices पर दबाव घट सकता है
- fertilizer production घरेलू स्तर पर बढ़ सकती है
- और industrial fuel availability बेहतर हो सकती है
हालांकि experts का कहना है कि इसका असर तुरंत नहीं दिखेगा क्योंकि बड़े gasification plants तैयार होने में कई साल लग सकते हैं.
क्या इससे LPG सस्ता हो जाएगा?
यह कहना अभी जल्दबाजी होगी कि LPG prices सीधे कम हो जाएंगे. लेकिन energy experts मानते हैं कि domestic fuel ecosystem मजबूत होने से future supply shocks का असर कम हो सकता है. सरल शब्दों में: अगर भारत imported fuel पर कम निर्भर होगा, तो वैश्विक संकट का असर भी कम पड़ सकता है.
दुनिया के दूसरे देश भी अपना रहे यह मॉडल
Coal Gasification पर सिर्फ भारत ही नहीं बल्कि:
- China
- United States
- और कई energy-import dependent countries
भी काम कर रहे हैं. Reuters की रिपोर्ट के मुताबिक China पहले से बड़े scale पर coal-to-chemicals ecosystem चला रहा है. Experts का कहना है कि चीन ने इसी मॉडल की मदद से कई global energy shocks के दौरान supply stability बनाए रखी.
लेकिन क्या यह पूरी तरह “Clean Energy” है?
यहीं सबसे बड़ी बहस शुरू होती है. हालांकि Coal Gasification को traditional coal burning से बेहतर माना जाता है, लेकिन environmental experts का कहना है कि यह पूरी तरह green technology नहीं है. कुछ विशेषज्ञों के मुताबिक:
- carbon emissions concern बने रह सकते हैं
- water usage ज्यादा हो सकता है
- और long-term climate targets पर असर पड़ सकता है.
इसी वजह से सरकार parallel में:
- Green Hydrogen
- Solar Energy
- Renewable Infrastructure
पर भी जोर दे रही है.
Passport Ranking 2026: पाकिस्तान फिर फिसला, दुनिया में 100वें नंबर पर पहुंचा; भारत की स्थिति बेहतर
आने वाले समय में क्या बदल सकता है?
भारत फिलहाल एक “multi-energy strategy” पर काम करता दिख रहा है, जिसमें:
- renewable energy
- coal gasification
- nuclear power
- domestic gas production
- और electric mobility
सभी को साथ लेकर चलने की कोशिश की जा रही है. Energy analysts का मानना है कि अगर Coal Gasification projects समय पर पूरे हुए तो भारत अगले दशक में imported LPG और LNG dependence को काफी हद तक कम कर सकता है.
aa

