Bareilly Industrial Corridor: बरेली अब विकास की नई कहानी लिखने जा रहा है, आने वाले समय में यह जिला सिर्फ शिक्षा और व्यापार ही नहीं, बल्कि बड़े औद्योगिक हब के रूप में भी अपनी अलग पहचान बनाएगा. जिले में पांच नए औद्योगिक गलियारे विकसित किए जाएंगे, जहां करीब 13 हजार उद्योग स्थापित होंगे और लाखों सपनों को रोजगार का सहारा मिलेगा.
कहां पर बनेगा?
यूपीडा की इस महत्वाकांक्षी योजना ने बरेली के विकास को नई रफ्तार दे दी है. आंवला तहसील के भमोरा में जमीन चिह्नित की जा चुकी है, जबकि सदर, नवाबगंज, बहेड़ी, मीरगंज और फरीदपुर तहसीलों में भी एक-एक हजार हेक्टेयर भूमि की तलाश शुरू हो गई है. जिलाधिकारी की ओर से संबंधित उपजिलाधिकारियों को जमीन चयन के निर्देश जारी कर दिए गए हैं.
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पलायन पर लगेगा ब्रेक
सबसे खास बात यह है कि इन औद्योगिक गलियारों में करीब 13 हजार उद्योग स्थापित होंगे, जिससे प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रूप से करीब सवा लाख लोगों को रोजगार मिलने की उम्मीद है. यानी अब बरेली के युवाओं को रोजगार के लिए बड़े शहरों की ओर पलायन नहीं करना पड़ेगा. रोजगार, व्यापार और विकास-तीनों की नई राह यहीं खुलेगी.
बरेली की भौगोलिक स्थिति भी इसे निवेशकों के लिए आकर्षण का केंद्र बना रही है. दिल्ली और लखनऊ के बीच स्थित होने के साथ-साथ यहां सड़क, रेल और हवाई संपर्क तेजी से मजबूत हुआ है. गंगा एक्सप्रेसवे की कनेक्टिविटी, बरेली-सीतापुर हाईवे, पीलीभीत-सीतारगंज हाईवे, पूर्वी बाइपास और बरेली-मथुरा हाईवे जैसी परियोजनाएं जिले को औद्योगिक दृष्टि से और मजबूत बना रही हैं. उम्मीद है कि इनमें से कई परियोजनाएं अगले साल मार्च तक पूरी हो जाएंगी.
यूपीडा ने जमीन चयन के लिए भी सख्त मानक तय किए हैं. औद्योगिक गलियारे ऐसी जगह विकसित होंगे जो हाईवे और एक्सप्रेसवे के करीब हों, जहां जलभराव न होता हो, जमीन आबादी से दूर हो और भूमि अधिग्रहण आसान हो सके. साथ ही नहर और हाईटेंशन लाइन से दूरी का भी विशेष ध्यान रखा जाएगा. प्रशासन का मानना है कि हर औद्योगिक गलियारे में करीब ढाई हजार उद्योग स्थापित होंगे और लगभग 25 हजार लोगों को रोजगार मिलेगा. इससे न सिर्फ जिले की अर्थव्यवस्था मजबूत होगी, बल्कि बरेली तेजी से विकास की नई ऊंचाइयों को भी छुएगा.
डीएम के मुताबिक
जिलाधिकारी अविनाश सिंह ने बताया कि आंवला के बाद अन्य पांच तहसीलों में भी औद्योगिक गलियारे विकसित करने की प्रक्रिया शुरू कर दी गई है और जमीन तलाशने का काम तेजी से चल रहा है. अब साफ है कि आने वाले वर्षों में बरेली सिर्फ ‘नाथ नगरी’ नहीं, बल्कि उत्तर प्रदेश का बड़ा औद्योगिक चेहरा बनकर उभरेगा.
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