ग्रेटर नोएडा वेस्ट में रहने वाले लाखों लोगों का लंबे समय से चला आ रहा मेट्रो का इंतजार अब जल्द खत्म हो सकता है. क्षेत्र की बहुप्रतीक्षित मेट्रो परियोजना को पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड (PIB) से जल्द हरी झंडी मिलने की संभावना जताई जा रही है. यदि यह मंजूरी मिलती है तो परियोजना अगले महत्वपूर्ण चरण में प्रवेश कर जाएगी और निर्माण कार्य का रास्ता काफी हद तक साफ हो जाएगा.
ग्रेटर नोएडा वेस्ट पिछले कुछ वर्षों में NCR के सबसे तेजी से विकसित होने वाले आवासीय क्षेत्रों में शामिल रहा है. यहां बड़ी संख्या में नई हाउसिंग सोसाइटियां बनी हैं, लेकिन आबादी बढ़ने के मुकाबले सार्वजनिक परिवहन सुविधाओं का विस्तार उतनी तेजी से नहीं हो पाया. ऐसे में मेट्रो परियोजना को क्षेत्र की सबसे महत्वपूर्ण जरूरतों में गिना जा रहा है.
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जल्द मिल सकती है PIB की मंजूरी
रिपोर्ट्स के अनुसार परियोजना को पब्लिक इन्वेस्टमेंट बोर्ड के समक्ष रखा जाना है और अधिकारियों को उम्मीद है कि इसे जल्द स्वीकृति मिल सकती है. PIB की मंजूरी किसी भी बड़े सार्वजनिक निवेश वाले प्रोजेक्ट के लिए महत्वपूर्ण चरण माना जाता है क्योंकि इसके बाद परियोजना आगे की प्रशासनिक प्रक्रिया में बढ़ती है.
इस मंजूरी के बाद केंद्र और राज्य स्तर पर अन्य आवश्यक प्रक्रियाओं को गति मिलने की उम्मीद है.
कितनी लागत से तैयार होगा प्रोजेक्ट?
प्रस्तावित ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो परियोजना की अनुमानित लागत करीब 900 करोड़ रुपये बताई जा रही है. अधिकारियों का मानना है कि यह निवेश क्षेत्र की भविष्य की परिवहन जरूरतों को ध्यान में रखते हुए किया जा रहा है.
तेजी से बढ़ती आबादी और वाहनों की संख्या को देखते हुए सार्वजनिक परिवहन नेटवर्क का विस्तार अब आवश्यक माना जा रहा है.
कितने स्टेशन होंगे?
परियोजना के तहत 5 स्टेशन वाले मेट्रो कॉरिडोर की योजना बनाई गई है. यह कॉरिडोर ग्रेटर नोएडा वेस्ट के महत्वपूर्ण आवासीय और व्यावसायिक क्षेत्रों को जोड़ने में मदद करेगा.
विशेषज्ञों का मानना है कि सीमित लेकिन रणनीतिक रूप से चुने गए स्टेशन शुरुआती चरण में बेहतर यात्री घनत्व सुनिश्चित कर सकते हैं और परियोजना को आर्थिक रूप से अधिक व्यवहारिक बना सकते हैं.
1.25 लाख लोगों को मिलेगा फायदा
मेट्रो परियोजना का सबसे बड़ा लाभ क्षेत्र के दैनिक यात्रियों को मिलने की उम्मीद है. अनुमान है कि लगभग 1.25 लाख लोगों को इस कॉरिडोर से प्रत्यक्ष लाभ मिलेगा.
इसमें शामिल हैं:
- ऑफिस जाने वाले कर्मचारी
- छात्र
- कारोबारी
- स्थानीय निवासी
- नोएडा और ग्रेटर नोएडा के बीच यात्रा करने वाले लोग
मेट्रो शुरू होने के बाद सड़क यातायात पर दबाव कम हो सकता है और यात्रा का समय भी घट सकता है.
RRTS से भी जुड़ेगा नेटवर्क
इस परियोजना की एक महत्वपूर्ण विशेषता इसका क्षेत्रीय रैपिड ट्रांजिट सिस्टम (RRTS) से प्रस्तावित जुड़ाव है. इससे यात्रियों को एकीकृत परिवहन सुविधा मिल सकेगी.
यदि मेट्रो और RRTS के बीच प्रभावी कनेक्टिविटी विकसित होती है तो यात्रियों को दिल्ली, गाजियाबाद, नोएडा और अन्य NCR क्षेत्रों तक पहुंचने में बड़ी सुविधा मिल सकती है.
पहले आई थीं कई बाधाएं
ग्रेटर नोएडा वेस्ट मेट्रो परियोजना का सफर आसान नहीं रहा है. इससे पहले परियोजना की DPR को लेकर तकनीकी आपत्तियां सामने आई थीं, जिसके कारण योजना में देरी हुई थी. कुछ समय पहले केंद्र स्तर पर परियोजना रिपोर्ट में संशोधन और पुनरीक्षण की आवश्यकता भी बताई गई थी.
इन चुनौतियों के चलते परियोजना की समयसीमा प्रभावित हुई, लेकिन अब ताजा प्रगति ने क्षेत्र के निवासियों की उम्मीदें फिर बढ़ा दी हैं.
क्यों जरूरी है यह मेट्रो?
ग्रेटर नोएडा वेस्ट, जिसे आमतौर पर नोएडा एक्सटेंशन भी कहा जाता है, NCR का तेजी से विकसित होता आवासीय क्षेत्र बन चुका है.
यहां:
- बड़ी संख्या में हाईराइज सोसाइटियां हैं
- हजारों परिवार रह रहे हैं
- नए निवेश लगातार आ रहे हैं
- रोजगार और व्यावसायिक गतिविधियां बढ़ रही हैं
इसके बावजूद सार्वजनिक परिवहन के सीमित विकल्पों के कारण लोगों को निजी वाहनों या सड़क परिवहन पर अधिक निर्भर रहना पड़ता है.
ट्रैफिक जाम की समस्या हो सकती है कम
मेट्रो परियोजना के पूरा होने के बाद सड़कों पर वाहनों का दबाव कम होने की संभावना है.
विशेष रूप से:
- नोएडा लिंक रोड
- गौर चौक क्षेत्र
- प्रमुख एक्सप्रेसवे कनेक्शन
- व्यस्त कार्यालय मार्ग
पर ट्रैफिक भार कम किया जा सकता है.
विशेषज्ञों का मानना है कि मजबूत मेट्रो नेटवर्क शहरी यातायात प्रबंधन का सबसे प्रभावी समाधान माना जाता है.
रियल एस्टेट सेक्टर को भी मिलेगा फायदा
मेट्रो कनेक्टिविटी का असर अक्सर संपत्ति बाजार पर भी दिखाई देता है. बेहतर सार्वजनिक परिवहन वाले क्षेत्रों में आवासीय और व्यावसायिक परियोजनाओं की मांग बढ़ने की संभावना रहती है.
ग्रेटर नोएडा वेस्ट पहले से ही किफायती आवास के लिए लोकप्रिय है. मेट्रो सुविधा मिलने के बाद इसकी आकर्षण क्षमता और बढ़ सकती है.
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आगे क्या होगा?
यदि PIB से मंजूरी मिल जाती है तो परियोजना अगले प्रशासनिक और वित्तीय चरणों में प्रवेश करेगी. इसके बाद विस्तृत कार्यान्वयन योजना, निविदा प्रक्रिया और निर्माण संबंधी गतिविधियों को गति मिल सकती है.
फिलहाल क्षेत्र के निवासी इस महत्वपूर्ण फैसले का इंतजार कर रहे हैं. लंबे समय से लंबित यह मेट्रो परियोजना यदि तय समय पर आगे बढ़ती है तो ग्रेटर नोएडा वेस्ट की परिवहन व्यवस्था में बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है.


