CJP Protest in Delhi: कहीं बिखरी चप्पल..तो कहीं बिखरे कपड़े…किसी का टिफिन खुला पड़ा था…तो किसी के बैग से किताबें निकलकर सड़कों पर जिस तरह से बिखरी पड़ी थी, वह जोर-जोर से चीखकर यही कह रही थी कि अगर अभी आवाज न उठाई, तो कल आपका भी नंबर हो सकता है, अपनी आने वाली पीढ़ी से क्या ही नजर मिला पाओगे. चाहे कोई भी पेपर हो, लीक हो जाता है…बेचारे बच्चे सालों तक दिन-रात जागकर डॉक्टर, पुलिसमैन, सरकारी अफसर बनने का सपना देखते हैं लेकिन चंद शिक्षा माफियाओं की लापरवाही इनके सपनों पर ‘बेरोजगारी” का पोस्टर चिपकाकर चली जाती है.
वैसे तो NEET पेपर लीक के बारे में तमाम लोग जानते ही होंगे लेकिन सच तो यह है कि चाहे SI, UPSC, RO, REET समेत देश के अलग-अलग राज्यों में आए दिन पेपर लीकर की घटनाएं सामने आती रहती हैं पर शर्म की बात तो यह है कि सरकार जवाबदेही के बजाय हर बार पल्ला झाड़ लेती है. भारत का युवा बेरोजगार रहकर थक चुका है. एक तरफ हर रोज महंगाई का पारा चढ़ रहा है तो वहीं दूसरी तरफ नौकरी की किल्लत. दोनों से ही जूझ रहे युवाओं को अपने फ्यूचर की टेंशन ने उनसे सरकार से सवालात करने पर मजबूर कर दिया.
आधे लोगों को तो पता है नहीं कि NEET पेपर लीकर के चलते 22 बच्चों ने अपनी जिंदगी खत्म कर ली पर भारत की सरकार ने एक बार इस पर एक स्टेटमेंट तक न दिया. उससे भी ज्यादा शर्मनाक बात यह रही कि जब कॉकरोच जनता पार्टी के आवाह्न पर देश भर के अलग-अलग राज्यों से पहुंचे युवा भा भारत सरकार की दिल्ली पुलिसा लाठियां भांज रही है. प्रदर्शन में पहुंचे छात्रों, बच्चों और महिलाओं को ऐसे पीटा गया कि जैसे वह जानवर हो.
सोशल मीडिया पर प्रदर्शन के ऐसे-ऐसे भयावह वीडियो वायरल हो रहे हैं, जो इस सरकार पर सवाल खड़ कर रहे हैं. मॉनसून सत्र के दिन कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन में शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान की गरिफ्तारी की मांग लेकर पहुंचे एक छात्र का वीडियो वायरल हो रहा है,. जिसमें आप देख सकते हैं कि किस तरह से दिल्ली पुलिस ने शांतिपूर्ण तरीके से चल रहे बच्चों पर पहले लाठी भांजी, इसके बाद जंतर-मंतर खाली करवाने के लिए आंसू गैस के गोले छोड़े. खुद को बचाते हुए भागते हुए एक छात्र पीएम मोदी पर तंज कसते हुए कहता है कि हैप्पी दिवाली, मोदी जी. ये जो आपने छात्रों के साथ दिवाली खेली है ना आंसू गैस के गोले मारकर इससे अच्छा होता कि गोली ही मार देते.
डंडे क्या मार रहे हो. इससे अच्छा तो गोली ही मार देते. खत्म करो. एक ही बार में सब खत्म करो. वैसे भी तो हम मर ही रहे हैं. हम स्टूडेंट्स मर ही रहे हैं. जिस तरह से स्टूडेंट अपनी बात कह रहा है, उससे उसकी सरकार से निराशा साफ झलक रही है.


