नई दिल्ली: अमेरिका के रक्षा विभाग के एक फैसले ने भारत और हिंद-प्रशांत क्षेत्र की रणनीतिक राजनीति में नई चर्चा छेड़ दी है. अमेरिकी प्रशासन ने “US Indo-Pacific Command (USINDOPACOM)” का नाम बदलकर फिर से “US Pacific Command (USPACOM)” कर दिया है. इसके साथ ही कमांड की आधिकारिक वेबसाइट पर भारत का गलत नक्शा दिखाए जाने को लेकर भी विवाद खड़ा हो गया है.
रिपोर्टों के अनुसार, कमांड की वेबसाइट पर प्रदर्शित “Area of Responsibility Map” में पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर (PoK) को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया गया. इस पर भारत में राजनीतिक और रणनीतिक हलकों से प्रतिक्रियाएं सामने आई हैं.
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क्या बदला है अमेरिकी सैन्य ढांचे में
अमेरिका ने 2018 में तत्कालीन रक्षा मंत्री जिम मैटिस के कार्यकाल में “US Pacific Command” का नाम बदलकर “US Indo-Pacific Command” किया था. उस समय इसे भारत की बढ़ती रणनीतिक भूमिका और हिंद महासागर क्षेत्र के बढ़ते महत्व की औपचारिक मान्यता माना गया था.
अब अमेरिकी प्रशासन ने “Indo” शब्द हटाकर कमांड को उसके पुराने नाम “US Pacific Command” में वापस बदल दिया है. अमेरिकी पक्ष का कहना है कि यह कदम ऐतिहासिक पहचान को बहाल करने के लिए उठाया गया है और इससे कमांड की जिम्मेदारियों या भौगोलिक दायरे में कोई बदलाव नहीं होगा.
भारत का गलत नक्शा बना विवाद की वजह
नाम परिवर्तन से भी ज्यादा चर्चा उस नक्शे को लेकर हो रही है जिसमें पाकिस्तान के कब्जे वाले कश्मीर को पाकिस्तान का हिस्सा दिखाया गया. भारत लंबे समय से जम्मू-कश्मीर और लद्दाख को अपना अभिन्न अंग मानता है और ऐसे नक्शों पर आपत्ति दर्ज कराता रहा है.
विशेषज्ञों का मानना है कि इस तरह की प्रस्तुति राजनयिक संवेदनशीलता को प्रभावित कर सकती है और भारत में इसे गंभीरता से देखा जा सकता है.
QUAD और Indo-Pacific रणनीति पर क्या असर
“Indo-Pacific” शब्द पिछले कुछ वर्षों में QUAD (भारत, अमेरिका, जापान और ऑस्ट्रेलिया) की रणनीतिक सोच का प्रमुख हिस्सा रहा है. इस अवधारणा के माध्यम से भारत को हिंद महासागर क्षेत्र में एक प्रमुख शक्ति के रूप में देखा जाता रहा है.
विश्लेषकों का कहना है कि नाम से “Indo” हटाना प्रतीकात्मक रूप से भारत की भूमिका को कम महत्व देने के रूप में देखा जा सकता है. हालांकि अमेरिकी अधिकारियों ने स्पष्ट किया है कि क्षेत्रीय साझेदारों और सहयोगियों के प्रति उनकी प्रतिबद्धता में कोई बदलाव नहीं आया है.
शशि थरूर की प्रतिक्रिया
कांग्रेस सांसद Shashi Tharoor ने इस घटनाक्रम पर प्रतिक्रिया देते हुए सोशल मीडिया पर सवाल उठाया कि क्या यह QUAD के लिए एक और झटका है. उनकी टिप्पणी के बाद यह मुद्दा राजनीतिक बहस का विषय बन गया.
क्या भारत-अमेरिका संबंधों पर पड़ेगा असर
विशेषज्ञों का मानना है कि नाम परिवर्तन का तत्काल प्रभाव भारत-अमेरिका रक्षा सहयोग, मालाबार नौसैनिक अभ्यास, तकनीकी साझेदारी या QUAD की गतिविधियों पर पड़ने की संभावना कम है. अमेरिकी अधिकारियों ने भी कहा है कि कमांड का क्षेत्राधिकार और मिशन पहले जैसे ही रहेंगे.
दिलचस्प बात यह है कि कुछ सप्ताह पहले अमेरिकी रक्षा मंत्री Pete Hegseth ने भारत को हिंद-प्रशांत क्षेत्र में एक महत्वपूर्ण रणनीतिक साझेदार बताया था और भारत की सैन्य आधुनिकीकरण क्षमता की प्रशंसा की थी.
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रणनीतिक संदेश पर बहस
हालांकि अमेरिकी प्रशासन इसे केवल नाम परिवर्तन बता रहा है, लेकिन अंतरराष्ट्रीय मामलों के जानकार इसे प्रतीकात्मक महत्व वाला कदम मान रहे हैं. उनके अनुसार, रणनीतिक शब्दावली और संस्थागत नाम अक्सर विदेश नीति के संकेत भी देते हैं.
भारत के लिए यह घटनाक्रम इस बात की याद दिलाता है कि वैश्विक रणनीतिक समीकरण लगातार बदलते रहते हैं. ऐसे में देश को अपनी समुद्री शक्ति, रक्षा क्षमताओं और क्षेत्रीय प्रभाव को स्वतंत्र रूप से मजबूत बनाए रखने की आवश्यकता है.
स्रोत. Aaj Tak, अमेरिकी रक्षा विभाग से संबंधित रिपोर्टें.


