भिवानी: प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के “विकसित भारत 2047”, “आत्मनिर्भर भारत”, “वोकल फॉर लोकल” और “लोकल टू ग्लोबल” के विजन को आगे बढ़ाते हुए खादी एवं ग्रामोद्योग आयोग (KVIC) ने हरियाणा के भिवानी जिले के सिवानी में भव्य “खादी रोजगार उत्सव” का आयोजन किया. कार्यक्रम में हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए, जबकि KVIC के अध्यक्ष मनोज गोयल विशिष्ट अतिथि रहे.
इस अवसर पर देशभर के कारीगरों और ग्रामीण उद्यमियों को आधुनिक मशीनें, टूलकिट और वित्तीय सहायता प्रदान की गई. कार्यक्रम का उद्देश्य ग्रामीण रोजगार, स्वरोजगार और स्थानीय उद्योगों को मजबूत करना था.
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972 कारीगरों को मिली 3,645 मशीनें और टूलकिट
खादी रोजगार उत्सव के दौरान ग्रामोद्योग विकास योजना (GVY) के तहत 972 कारीगरों को कुल 3,645 आधुनिक मशीनें और टूलकिट वितरित किए गए.
इनमें 700 मधुमक्खी पालकों को बी-बॉक्स और मधुमक्खी कॉलोनियां, 220 इलेक्ट्रिक चाक, 100 सिलाई मशीनें, 80 टर्न वुड टूलकिट, 59 फुटवियर निर्माण टूलकिट, 128 चरखे और 8 पत्तल निर्माण मशीनें शामिल थीं.
इसके अलावा दिल्ली, हिमाचल प्रदेश, ओडिशा, उत्तराखंड, उत्तर प्रदेश, गोवा और त्रिपुरा सहित सात राज्यों एवं केंद्र शासित प्रदेशों में 2,350 बी-बॉक्स और मधुमक्खी कॉलोनियां वर्चुअल माध्यम से वितरित की गईं.
PMEGP के तहत 504 करोड़ रुपये की सहायता
कार्यक्रम के दौरान प्रधानमंत्री रोजगार सृजन कार्यक्रम (PMEGP) के तहत देशभर में 22,259 नई परियोजनाओं के लिए 504.68 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सब्सिडी ऑनलाइन जारी की गई.
इन परियोजनाओं के लिए बैंकों द्वारा लगभग 1,485 करोड़ रुपये के ऋण स्वीकृत किए गए हैं. अनुमान है कि इससे 2.44 लाख से अधिक लोगों को रोजगार के अवसर मिलेंगे.
हरियाणा में अकेले 253 परियोजनाओं को इस सहायता का लाभ मिलेगा. इनके लिए लगभग 7.50 करोड़ रुपये की सब्सिडी और 23.19 करोड़ रुपये के बैंक ऋण स्वीकृत किए गए हैं, जिससे 2,783 नए रोजगार सृजित होने की उम्मीद है.
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने क्या कहा
मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि खादी केवल कपड़ा नहीं बल्कि श्रम, सम्मान और आत्मनिर्भरता का प्रतीक है. स्वतंत्रता आंदोलन के दौरान खादी ने स्वदेशी आंदोलन को मजबूत किया और आज प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसे “Khadi for Nation, Khadi for Fashion और Khadi for Transformation” का नया स्वरूप दिया है.
उन्होंने कहा कि सिवानी में आयोजित यह कार्यक्रम उसी सोच को जमीन पर उतारने का प्रयास है. खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा है.
महिलाओं के सशक्तिकरण पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने बताया कि खादी क्षेत्र से जुड़े लगभग 80 प्रतिशत कारीगर महिलाएं हैं. यह महिला सशक्तिकरण की दिशा में एक सकारात्मक बदलाव का संकेत है.
उन्होंने कहा कि जब कोई महिला आत्मनिर्भर बनती है तो उसका पूरा परिवार और समाज आगे बढ़ता है. राज्य सरकार स्वयं सहायता समूहों द्वारा बनाए गए उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय बाजारों तक पहुंचाने के लिए लगातार प्रयास कर रही है.
हरियाणा में 58,796 कारीगरों को रोजगार
मुख्यमंत्री ने बताया कि हरियाणा में KVIC के अंतर्गत संचालित 96 खादी एवं ग्रामोद्योग संस्थानों के माध्यम से 58,796 कारीगरों को रोजगार मिल रहा है.
इसके अलावा ग्रामोद्योग विकास योजना के माध्यम से राज्य में 1.27 लाख से अधिक लोगों को रोजगार प्राप्त हुआ है. अब तक 5,533 मशीनें और टूलकिट वितरित किए जा चुके हैं.
KVIC अध्यक्ष ने गिनाईं उपलब्धियां
KVIC के अध्यक्ष मनोज गोयल ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र ने अभूतपूर्व प्रगति की है.
उन्होंने बताया कि इस क्षेत्र का कुल उत्पादन बढ़कर लगभग 1.25 लाख करोड़ रुपये तक पहुंच गया है, जबकि कारोबार 1.87 लाख करोड़ रुपये के रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच चुका है.
देशभर में खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र के माध्यम से 2.04 करोड़ लोगों को रोजगार मिला है. KVIC ने अब 2.51 लाख करोड़ रुपये के कारोबार का नया लक्ष्य निर्धारित किया है.
PMEGP से 97 लाख से अधिक लोगों को रोजगार
मनोज गोयल ने बताया कि पिछले 12 वर्षों में PMEGP के तहत देशभर में 10.84 लाख से अधिक नई इकाइयां स्थापित की गई हैं.
इन परियोजनाओं के लिए केंद्र सरकार ने 29,623 करोड़ रुपये की मार्जिन मनी सहायता प्रदान की है, जिससे लगभग 97.95 लाख लोगों को रोजगार मिला है.
हरियाणा में इसी अवधि के दौरान 18,683 नई इकाइयां स्थापित हुईं और 1.50 लाख से अधिक रोजगार सृजित हुए.
आत्मनिर्भर ग्रामीण अर्थव्यवस्था की ओर कदम
विशेषज्ञों का मानना है कि खादी रोजगार उत्सव जैसे कार्यक्रम ग्रामीण क्षेत्रों में स्वरोजगार और उद्यमिता को बढ़ावा देने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहे हैं.
मशीनों, टूलकिट और वित्तीय सहायता के माध्यम से कारीगरों को आधुनिक उत्पादन सुविधाएं मिल रही हैं, जिससे उनकी आय और उत्पादकता दोनों में वृद्धि हो सकती है.
सरकार का मानना है कि खादी और ग्रामोद्योग क्षेत्र भविष्य में ग्रामीण भारत की अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने और “विकसित भारत 2047” के लक्ष्य को हासिल करने में महत्वपूर्ण योगदान देगा.
स्रोत: Ministry of Micro,Small & Medium Enterprises


