नई दिल्ली: महिलाओं की सुरक्षा, सम्मान और लैंगिक समानता को बढ़ावा देने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने नई दिल्ली में ‘निर्भय चेतना’ प्रशिक्षण मॉड्यूल लॉन्च किया है. पंचायती राज मंत्रालय द्वारा निर्भया फंड परियोजना के तहत आयोजित तीन दिवसीय ट्रेनिंग ऑफ ट्रेनर्स (ToT) कार्यक्रम के दौरान इस मॉड्यूल की शुरुआत की गई. यह पहल ग्रामीण स्तर पर महिलाओं से जुड़े मुद्दों के प्रति पुरुष जनप्रतिनिधियों को संवेदनशील बनाने के लिए शुरू की गई है.
सरकार के अनुसार ‘निर्भय चेतना’ दुनिया के सबसे बड़े जागरूकता अभियानों में से एक है, जिसका उद्देश्य पंचायत स्तर पर लैंगिक संवेदनशील शासन को मजबूत करना है. इस पहल के माध्यम से पुरुष निर्वाचित प्रतिनिधियों को महिलाओं की सुरक्षा, अधिकारों, नेतृत्व और समान अवसरों के विषय में प्रशिक्षित किया जाएगा.
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17.5 लाख से अधिक जनप्रतिनिधियों तक पहुंचेगा अभियान
पंचायती राज मंत्रालय ने बताया कि इस कार्यक्रम के तहत देशभर में 17.5 लाख से अधिक पुरुष निर्वाचित प्रतिनिधियों को प्रशिक्षण देने का लक्ष्य रखा गया है. इसके लिए राज्य, जिला और ब्लॉक स्तर पर 28,500 मास्टर ट्रेनरों का एक मजबूत नेटवर्क तैयार किया जाएगा. ये प्रशिक्षक पंचायत प्रतिनिधियों को लैंगिक समानता और महिलाओं की सुरक्षा से जुड़े विषयों पर जागरूक करेंगे.
कार्यक्रम के पहले चरण में असम, छत्तीसगढ़, हिमाचल प्रदेश, महाराष्ट्र, ओडिशा और उत्तराखंड से लगभग 40 मास्टर ट्रेनरों को प्रशिक्षण दिया गया. बाद में इस मॉडल को सभी राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों तक विस्तारित किया जाएगा.
पंचायतों को बनाया जाएगा बदलाव का केंद्र
कार्यक्रम के उद्घाटन अवसर पर पंचायती राज मंत्रालय के सचिव विवेक भारद्वाज ने कहा कि विकसित भारत का लक्ष्य तभी हासिल किया जा सकता है जब महिलाओं की सुरक्षा, गरिमा और समान भागीदारी सुनिश्चित हो. उन्होंने पंचायतों को सामाजिक और लोकतांत्रिक परिवर्तन का महत्वपूर्ण माध्यम बताते हुए कहा कि ग्रामीण स्तर पर सोच और व्यवहार में सकारात्मक बदलाव लाने में उनकी बड़ी भूमिका है.
मंत्रालय के अतिरिक्त सचिव सुशील कुमार लोहानी ने कहा कि महिलाओं की सुरक्षा केवल सरकारी जिम्मेदारी नहीं बल्कि पूरे समाज की सामूहिक जिम्मेदारी है. उन्होंने कहा कि ‘निर्भय चेतना’ पुरुष जनप्रतिनिधियों में जागरूकता, संवेदनशीलता और जवाबदेही विकसित करने की दिशा में महत्वपूर्ण कदम है.
प्रशिक्षण में अपनाया गया सहभागी मॉडल
तीन दिवसीय प्रशिक्षण कार्यक्रम में विशेषज्ञ सत्र, समूह चर्चा, केस स्टडी और अनुभव आधारित शिक्षण गतिविधियों को शामिल किया गया. इसका उद्देश्य प्रतिभागियों को लैंगिक मुद्दों की गहरी समझ देना और सामाजिक रूढ़ियों को चुनौती देने के लिए तैयार करना है.
कार्यक्रम के दौरान सकारात्मक पुरुषत्व (Positive Masculinity), सामुदायिक भागीदारी, महिला नेतृत्व, सुरक्षा और पंचायतों की भूमिका जैसे विषयों पर विशेष चर्चा की गई. प्रशिक्षण मॉड्यूल को Transform Rural India संस्था द्वारा विकसित किया गया है.
‘निर्भय रहो’ पहल का महत्वपूर्ण हिस्सा
‘निर्भय चेतना’ केंद्र सरकार की ‘निर्भय रहो’ पहल का एक प्रमुख घटक है, जिसकी शुरुआत 11 मार्च 2026 को की गई थी. इस पहल के तीन प्रमुख हिस्से हैं – निर्भय नेत्री, निर्भय चेतना और निर्भय दृष्टि.
‘निर्भय नेत्री’ के तहत निर्वाचित महिला प्रतिनिधियों को कानूनी जागरूकता और क्षमता निर्माण प्रशिक्षण दिया जाता है. ‘निर्भय चेतना’ पुरुष जनप्रतिनिधियों को लैंगिक समानता और महिलाओं की सुरक्षा के मुद्दों पर संवेदनशील बनाने पर केंद्रित है. वहीं ‘निर्भय दृष्टि’ के तहत ग्रामीण क्षेत्रों में रणनीतिक स्थानों पर CCTV कैमरे लगाए जाने की योजना है ताकि महिलाओं की सुरक्षा के लिए तकनीक आधारित ढांचा तैयार किया जा सके.
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ग्रामीण भारत में लैंगिक समानता को मिलेगा बढ़ावा
विशेषज्ञों का मानना है कि पंचायत स्तर पर पुरुष प्रतिनिधियों को लैंगिक मुद्दों के प्रति जागरूक बनाकर महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण को नई दिशा दी जा सकती है. यह पहल महिलाओं की गरिमा, समान अवसर और सुरक्षित वातावरण सुनिश्चित करने के लिए जमीनी स्तर पर सकारात्मक बदलाव लाने में सहायक होगी.
सरकार को उम्मीद है कि ‘निर्भय चेतना’ प्रशिक्षण मॉड्यूल ग्रामीण भारत में महिलाओं के प्रति संवेदनशीलता बढ़ाने और लैंगिक समानता को मजबूत करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण मील का पत्थर साबित होगा.
स्रोत. न्यूज़ ऑन एयर (Akashvani News), पंचायती राज मंत्रालय, PIB.


