इस सप्ताह सर्राफा बाजार (Bullion Market) में सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई. बाजार विशेषज्ञों के अनुसार, भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर सख्त रुख (Hawkish Stance) बनाए रखने की संभावनाओं ने कीमती धातुओं की कीमतों पर दबाव बनाया.
यदि पश्चिम एशिया (West Asia) में तनाव और बढ़ता है, तो निवेशकों की रणनीति और वैश्विक वित्तीय परिस्थितियां भी सोने-चांदी की कीमतों को प्रभावित कर सकती हैं.
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MCX पर सोना 2.6% फिसला
मल्टी कमोडिटी एक्सचेंज (MCX) पर अगस्त डिलीवरी वाले गोल्ड फ्यूचर्स में पूरे सप्ताह के दौरान 2.6 प्रतिशत की गिरावट दर्ज की गई.
सप्ताह के अंत में सोना ₹1,43,478 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ.
यह लगातार कई कारोबारी सत्रों के दौरान आई कमजोरी का परिणाम रहा.
चांदी में रही बड़ी गिरावट
सोने की तुलना में चांदी में अधिक कमजोरी देखने को मिली.
MCX पर सितंबर डिलीवरी वाले सिल्वर फ्यूचर्स में सप्ताहभर में 6.2 प्रतिशत की गिरावट आई.
सप्ताह के अंत में चांदी ₹2,22,664 प्रति किलोग्राम पर बंद हुई.
विशेषज्ञों का मानना है कि औद्योगिक मांग और वैश्विक आर्थिक संकेतकों का असर चांदी की कीमतों पर अधिक दिखाई देता है.
अंतरराष्ट्रीय बाजार में भी नरमी
अमेरिकी कमोडिटी एक्सचेंज COMEX पर भी दोनों कीमती धातुओं में गिरावट दर्ज की गई.
Gold Futures
- अगस्त कॉन्ट्रैक्ट में लगभग 0.3 प्रतिशत की गिरावट.
- सप्ताह के अंत में भाव 4,113.7 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस रहा.
Silver Futures
- सितंबर कॉन्ट्रैक्ट में लगभग 1.5 प्रतिशत की गिरावट.
- सप्ताह के अंत में कीमत 60.16 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस रही.
यह संकेत देता है कि केवल भारतीय बाजार ही नहीं, बल्कि वैश्विक स्तर पर भी कीमती धातुओं पर दबाव बना रहा.
कीमतों में गिरावट की मुख्य वजहें
विश्लेषकों के अनुसार इस सप्ताह सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट के पीछे कई प्रमुख कारण रहे.
- पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव.
- अमेरिकी डॉलर का मजबूत होना.
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर सख्त रुख बनाए रखने की संभावना.
- वैश्विक निवेशकों की सतर्क रणनीति.
- कमोडिटी बाजार में मुनाफावसूली.
इन सभी कारकों ने सुरक्षित निवेश (Safe Haven) मानी जाने वाली धातुओं की कीमतों को प्रभावित किया.
निवेशकों के लिए क्या संकेत?
सोना और चांदी को लंबे समय से सुरक्षित निवेश विकल्प माना जाता है, लेकिन इनकी कीमतें भी वैश्विक आर्थिक और राजनीतिक घटनाओं से प्रभावित होती हैं.
विशेषज्ञों का कहना है कि निवेशकों को.
- वैश्विक ब्याज दरों पर नजर रखनी चाहिए.
- अमेरिकी डॉलर की चाल पर ध्यान देना चाहिए.
- अंतरराष्ट्रीय भू-राजनीतिक घटनाक्रम को समझना चाहिए.
- निवेश से पहले अपने वित्तीय लक्ष्यों और जोखिम क्षमता का आकलन करना चाहिए.
कीमती धातुओं में निवेश करते समय केवल अल्पकालिक उतार-चढ़ाव के बजाय दीर्घकालिक रणनीति अपनाना अधिक उपयुक्त माना जाता है.
आगे किन बातों पर रहेगी बाजार की नजर?
आने वाले दिनों में सोने और चांदी की कीमतों पर कई अंतरराष्ट्रीय घटनाओं का असर पड़ सकता है.
इनमें प्रमुख हैं.
- अमेरिकी फेडरल रिजर्व की मौद्रिक नीति.
- पश्चिम एशिया की स्थिति.
- अमेरिकी डॉलर इंडेक्स.
- वैश्विक महंगाई के आंकड़े.
- प्रमुख अर्थव्यवस्थाओं के आर्थिक संकेतक.
इन कारकों के आधार पर कीमती धातुओं की कीमतों में आगे भी उतार-चढ़ाव देखने को मिल सकता है.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. इस सप्ताह MCX पर सोने की कीमत में कितनी गिरावट आई?
MCX पर अगस्त कॉन्ट्रैक्ट वाला सोना सप्ताहभर में 2.6 प्रतिशत गिरकर ₹1,43,478 प्रति 10 ग्राम पर बंद हुआ.
2. चांदी की कीमत में कितनी गिरावट दर्ज की गई?
MCX पर सितंबर कॉन्ट्रैक्ट वाली चांदी 6.2 प्रतिशत गिरकर ₹2,22,664 प्रति किलोग्राम पर बंद हुई.
3. अंतरराष्ट्रीय बाजार में सोने का भाव क्या रहा?
COMEX पर अगस्त गोल्ड फ्यूचर्स 0.3 प्रतिशत गिरकर 4,113.7 डॉलर प्रति ट्रॉय औंस पर बंद हुआ.
4. सोने और चांदी की कीमतों में गिरावट क्यों आई?
भू-राजनीतिक अनिश्चितताओं, अमेरिकी डॉलर की मजबूती और अमेरिकी फेडरल रिजर्व द्वारा ब्याज दरों पर सख्त रुख बनाए रखने की उम्मीदों के कारण कीमतों पर दबाव रहा.


