उत्तराखंड की राजधानी देहरादून में 6वें लोक संवर्धन पर्व का भव्य शुभारंभ हो गया है. अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय और उत्तराखंड सरकार के सहयोग से आयोजित यह पांच दिवसीय आयोजन 11 जुलाई से 15 जुलाई 2026 तक परेड ग्राउंड में चलेगा. इस दौरान देशभर के कलाकार, बुनकर, शिल्पकार और उद्यमी अपने उत्पादों और पारंपरिक कला का प्रदर्शन करेंगे.
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केंद्रीय मंत्री किरेन रिजिजू ने किया उद्घाटन
कार्यक्रम का उद्घाटन केंद्रीय अल्पसंख्यक कार्य मंत्री किरण रिजिजू ने उत्तराखंड के मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी और राज्य के अल्पसंख्यक कल्याण मंत्री खजान दास की उपस्थिति में किया.
अपने संबोधन में किरेन रिजिजू ने कहा कि केंद्र सरकार “सबका साथ, सबका विकास” की भावना के साथ बिना किसी भेदभाव के सभी नागरिकों के विकास के लिए कार्य कर रही है. उन्होंने कहा कि लोक संवर्धन पर्व केवल अल्पसंख्यकों का कार्यक्रम नहीं, बल्कि भारत की समृद्ध सांस्कृतिक विरासत और पारंपरिक शिल्प को बढ़ावा देने वाला राष्ट्रीय उत्सव है.
‘वोकल फॉर लोकल’ को मिलेगा बढ़ावा
केंद्रीय मंत्री ने लोगों से ‘वोकल फॉर लोकल’ अभियान को मजबूत करने की अपील करते हुए कहा कि प्रदर्शनी में प्रदर्शित Made in India हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद और पारंपरिक वस्तुओं की खरीदारी कर स्थानीय कारीगरों का समर्थन करें.
उन्होंने कहा कि ऐसे आयोजन पारंपरिक रोजगार को मजबूत करने के साथ-साथ भारतीय संस्कृति और शिल्पकला को नई पहचान दिलाते हैं.
पहली बार उत्तराखंड सरकार के साथ आयोजन
मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी ने कहा कि उत्तराखंड के लिए यह गर्व का विषय है कि पहली बार राज्य सरकार के सहयोग से लोक संवर्धन पर्व आयोजित किया जा रहा है.
उन्होंने बताया कि इस आयोजन से उत्तराखंड के युवाओं को देश के विभिन्न राज्यों की पारंपरिक कला और शिल्प को करीब से जानने का अवसर मिलेगा. साथ ही राज्य के स्थानीय कारीगरों को भी राष्ट्रीय स्तर पर अपनी प्रतिभा दिखाने का मंच मिलेगा.
150 से अधिक स्टॉल बने आकर्षण
लोक संवर्धन पर्व में लगभग 150 प्रदर्शनी और फूड स्टॉल लगाए गए हैं.
इनमें शामिल हैं.
- उत्तराखंड के पारंपरिक हस्तशिल्प
- अजरख ब्लॉक प्रिंट
- लाख की चूड़ियां
- पीतल और लकड़ी की कलाकृतियां
- टेराकोटा उत्पाद
- बांस और केन से बने उत्पाद
- हथकरघा वस्त्र
- पारंपरिक हस्तनिर्मित सजावटी वस्तुएं
करीब 40 प्रतिशत स्टॉल उत्तराखंड के स्थानीय कलाकारों और शिल्पकारों को समर्पित किए गए हैं.
महिलाओं की भी उल्लेखनीय भागीदारी
कार्यक्रम में लगभग 150 कारीगरों ने हिस्सा लिया है, जिनमें करीब 90 महिला कारीगर भी शामिल हैं. आयोजन का उद्देश्य महिला उद्यमिता, स्थानीय रोजगार और पारंपरिक शिल्प को राष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराना है.
लाइव क्राफ्ट प्रदर्शन और सांस्कृतिक कार्यक्रम
मेले में आने वाले आगंतुक केवल खरीदारी ही नहीं, बल्कि लाइव क्राफ्ट डेमोंस्ट्रेशन भी देख सकेंगे, जहां अनुभवी कारीगर अपने पारंपरिक हुनर का प्रदर्शन करेंगे.
इसके अलावा.
- खरीदार-विक्रेता बैठकें
- उद्यमिता कार्यशालाएं
- डिजिटल मार्केटिंग सत्र
- बाजार से जुड़ने के विशेष कार्यक्रम
भी आयोजित किए जाएंगे.
शाम के सांस्कृतिक कार्यक्रमों में ज्योति नूरान, किशन महिपाल, विवेक नौटियाल, माया उपाध्याय, पांडवास और परमिश वर्मा सहित कई प्रसिद्ध कलाकार अपनी प्रस्तुतियां देंगे.
पारंपरिक व्यंजनों का भी मिलेगा स्वाद
हस्तशिल्प के साथ-साथ मेले में देशभर के पारंपरिक व्यंजनों के फूड स्टॉल भी लगाए गए हैं. विशेष रूप से गढ़वाली, कुमाऊंनी और पहाड़ी व्यंजनों के साथ भारत के विभिन्न राज्यों के लोकप्रिय पकवान भी उपलब्ध रहेंगे.
PM VIKAS योजना के तहत महत्वपूर्ण पहल
लोक संवर्धन पर्व का यह संस्करण PM VIKAS Scheme के तहत पहली बार किसी राज्य सरकार के सहयोग से आयोजित किया जा रहा है. उत्तराखंड इस पहल में साझेदारी करने वाला पहला राज्य बना है.
मंत्रालय के अनुसार, वर्ष 2024 से अब तक आयोजित पांच संस्करणों से 550 से अधिक कारीगरों, बुनकरों और खाद्य उद्यमियों को राष्ट्रीय स्तर पर अपने उत्पादों के प्रदर्शन और बाजार से जुड़ने का अवसर मिल चुका है.
कब और कहां जाएं?
- स्थान: परेड ग्राउंड, देहरादून
- तिथि: 11 से 15 जुलाई 2026
- समय: सुबह 11:30 बजे से रात 9:00 बजे तक
यह आयोजन आम जनता के लिए खुला है.
अक्सर पूछे जाने वाले सवाल (FAQs)
1. लोक संवर्धन पर्व 2026 कहां आयोजित हो रहा है?
यह आयोजन उत्तराखंड के देहरादून स्थित परेड ग्राउंड में हो रहा है.
2. लोक संवर्धन पर्व कब तक चलेगा?
यह पांच दिवसीय आयोजन 11 जुलाई से 15 जुलाई 2026 तक चलेगा.
3. मेले में क्या-क्या देखने को मिलेगा?
हस्तशिल्प, हथकरघा उत्पाद, लाइव क्राफ्ट प्रदर्शन, सांस्कृतिक कार्यक्रम, पारंपरिक व्यंजन और उद्यमिता सत्र आयोजित किए जाएंगे.
4. क्या आम लोग इस आयोजन में जा सकते हैं?
हां. यह आयोजन सभी लोगों के लिए खुला है और सुबह 11:30 बजे से रात 9 बजे तक देखा जा सकता है.
Source: Ministry of Minority Affairs


