Ayodhya News: डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या के व्यवसाय प्रबंधन एवं उद्यमिता विभाग एवं श्रीराम शोधपीठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित दो दिवसीय राष्ट्रीय संगोष्ठी “प्रबंधन में भारतीयता: भारतीय ज्ञान परंपरा का समकालीन महत्व” के विभिन्न अकादमिक सत्रों का सफल आयोजन किया गया, जिसमें भारतीय ज्ञान परंपरा एवं आधुनिक प्रबंधन के विविध आयामों पर व्यापक चर्चा हुई. प्रथम दिवस का पहला अकादमिक कार्यक्रम पैनल चर्चा–I रहा, जिसकी मेजबानी डॉ. दीपा सिंह ने की. इस सत्र में प्रो. हिमांशु शेखर सिंह एवं श्री चन्द्र भूषण शास्त्री ने भारतीय ज्ञान परंपरा, सनातन संस्कृति, भारतीय चिंतन एवं नैतिक नेतृत्व के सिद्धांतों को आधुनिक प्रबंधन से जोड़ते हुए अपने विचार प्रस्तुत किए. उन्होंने कहा कि भारतीय ज्ञान प्रणाली केवल अतीत की धरोहर नहीं, बल्कि भविष्य के प्रबंधन मॉडल की आधारशिला है. सत्र के अंत में डॉ. अंकिता यादव ने धन्यवाद ज्ञापित किया.
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इसके पश्चात आयोजित पैनल चर्चा–II की मेजबानी डॉ. महेन्द्र पाल सिंह ने की. इस चर्चा में डॉ. संजीब कुमार सिंह, प्रो. शैलेन्द्र कुमार वर्मा एवं डॉ. राणा रोहित सिंह ने भारतीय प्रबंधन दर्शन, मूल्यपरक नेतृत्व, संगठनात्मक संस्कृति, आत्मनिर्भर भारत तथा भारतीय ज्ञान परंपरा की वैश्विक उपयोगिता पर अपने विचार रखे. वक्ताओं ने भारतीय प्रबंधन सिद्धांतों को वर्तमान कॉर्पोरेट एवं प्रशासनिक व्यवस्था में अपनाने की आवश्यकता पर बल दिया. सत्र का धन्यवाद ज्ञापन डॉ. अंशुमन पाठक ने किया.
सायंकाल आयोजित तकनीकी सत्र–I में देश के विभिन्न विश्वविद्यालयों एवं संस्थानों से प्राप्त शोधपत्रों का प्रस्तुतीकरण किया गया. इस सत्र की मॉडरेटर डॉ. अंकिता अग्रवाल रहीं, जबकि डॉ. दीपा सिंह, डॉ. रविन्द्र भारद्वाज एवं डॉ. राम लखन सिंह ने सत्राध्यक्ष के रूप में शोधपत्रों का मूल्यांकन एवं प्रतिभागियों का मार्गदर्शन किया. सत्र के अंत में डॉ. अनुराग तिवारी ने धन्यवाद ज्ञापित किया.
तकनीकी सत्र में प्रस्तुत शोधपत्रों में भारतीय ज्ञान परंपरा के पर्यटन में महत्व, राष्ट्रीय शिक्षा नीति-2020 एवं गुरुदेव रवीन्द्रनाथ टैगोर की शिक्षा-दृष्टि, प्राचीन भारत की व्यावसायिक नैतिकता, सतत व्यवसाय प्रबंधन में भारतीय ज्ञान प्रणाली का समावेश, डिजिटल मार्केटिंग एवं उपभोक्ता क्रय व्यवहार, ग्रीन एचआरएम में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की भूमिका, समकालीन प्रबंधन में भारतीयता, स्वदेशी भारतीय प्रबंधन मॉडल, भारतीय ज्ञान प्रणाली के संदर्भ में कृत्रिम बुद्धिमत्ता की नैतिकता, उपभोक्ता व्यवहार पर कृत्रिम बुद्धिमत्ता का प्रभाव तथा भारतीय प्रबंधन में डिजिटल परिवर्तन एवं नैतिक नेतृत्व जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर सारगर्भित शोध प्रस्तुत किए गए.
शोधपत्र प्रस्तुतकर्ताओं ने भारतीय ज्ञान परंपरा को आधुनिक प्रबंधन, कृत्रिम बुद्धिमत्ता, सतत विकास, डिजिटल परिवर्तन, विपणन, मानव संसाधन प्रबंधन तथा व्यावसायिक नैतिकता से जोड़ते हुए नवीन दृष्टिकोण प्रस्तुत किए. सत्राध्यक्षों ने शोधपत्रों की गुणवत्ता की सराहना करते हुए प्रतिभागियों को शोध की गुणवत्ता, व्यावहारिक उपयोगिता तथा प्रकाशन संबंधी महत्वपूर्ण सुझाव दिए. तकनीकी सत्र के अंत में विशेषज्ञ समिति द्वारा प्रस्तुत शोधपत्रों का मूल्यांकन किया गया, जिसमें डॉ. दिवाकर मौर्य को उनके उत्कृष्ट शोध कार्य के लिए “सर्वश्रेष्ठ शोधपत्र पुरस्कार प्रदान किए जाने की घोषणा की गई.
प्रथम दिवस के सभी अकादमिक सत्रों में देशभर से आए शिक्षकों, शोधार्थियों एवं विद्यार्थियों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता की तथा भारतीय ज्ञान परंपरा और समकालीन प्रबंधन के विविध आयामों पर गंभीर एवं सार्थक विमर्श किया. संगोष्ठी का द्वितीय दिवस तकनीकी सत्र–II एवं समापन समारोह के साथ सम्पन्न होगा.


