नई दिल्ली: देश के रसोई घरों में जल्द ही एक बड़ा बदलाव देखने को मिल सकता है. आने वाले दिनों में आपके किचन में LPG या PNG सिलेंडर की जगह एथेनॉल से जलने वाले चूल्हे नजर आ सकते हैं. पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्रालय घरेलू खाना पकाने के लिए एथेनॉल को एक प्रमुख ईंधन बनाने के उद्देश्य से जल्द ही एक नई नीति पेश करने की तैयारी में है.
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‘द इकनॉमिक टाइम्स’ की एक रिपोर्ट के अनुसार, उद्योग जगत के वरिष्ठ अधिकारियों ने पुष्टि की है कि यह नीति आगामी सितंबर महीने तक तैयार हो सकती है. इस महत्वाकांक्षी योजना के तहत एथेनॉल को बढ़ावा देने के लिए सब्सिडी देने की शर्तों और इसकी सप्लाई चेन (आपूर्ति श्रृंखला) को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया जाएगा.
2 लाख करोड़ रुपये की होगी महा-बचत
फरवरी में जारी ‘इंटरनेशनल इंस्टीट्यूट फॉर सस्टेनेबल डेवलपमेंट’ की ‘इंडियाज क्लीन कुकिंग शिफ्ट’ रिपोर्ट के मुताबिक, ई-कुकिंग और बायोगैस जैसे विकल्पों की ओर कदम बढ़ाने से भारत सरकार को साल 2050 तक एलपीजी सब्सिडी में 2 लाख करोड़ रुपये (लगभग 24 अरब डॉलर) से अधिक की भारी-भरकम बचत हो सकती है. सरकार एथेनॉल को बढ़ावा देने के लिए एकमुश्त निवेश या फिर लगातार वित्तीय सहायता (सब्सिडी) देने पर विचार कर रही है.
आखिर क्यों पड़ी एथेनॉल की जरूरत?
एथेनॉल पूरी तरह से पर्यावरण के अनुकूल (Eco-friendly) ईंधन है, जिसे गन्ना, अनाज और अन्य शुगर वाली फसलों के फर्मेंटेशन (किण्वन) से तैयार किया जाता है. रसोई में इसके इस्तेमाल के मुख्य फायदे निम्नलिखित हैं. वर्तमान में भारत एलपीजी आयात के लिए खाड़ी देशों पर बहुत अधिक निर्भर है. पश्चिम एशिया के युद्धों के कारण सप्लाई चेन प्रभावित होने का खतरा हमेशा बना रहता है. एथेनॉल के आने से यह निर्भरता घटेगी. देश की ईंधन सुरक्षा को बढ़ाने के लिए सरकारी तेल कंपनियां 30 दिनों की ‘एलपीजी स्ट्रेटजिक रिजर्व स्कीम’ पर भी काम कर रही हैं, लेकिन एथेनॉल इसका एक स्थाई और घरेलू विकल्प बनकर उभरेगा.
भारत में एथेनॉल की ‘बंपर पैदावार’
एथेनॉल को कुकिंग फ्यूल बनाने के पीछे सबसे बड़ा कारण देश में इसकी भारी उपलब्धता है.
भारत की मौजूदा एथेनॉल उत्पादन क्षमता 20 अरब लीटर सालाना से अधिक हो चुकी है.
चालू वित्त वर्ष में इसमें 4 अरब लीटर की और बढ़ोतरी होने की उम्मीद है.
पेट्रोल में 20% एथेनॉल ब्लेंडिंग (E20) के लिए 11 अरब लीटर और फार्मा-शराब कंपनियों को 3.5 अरब लीटर देने के बाद भी देश में लगभग 7 अरब लीटर एथेनॉल बिना इस्तेमाल के बच जाता है.भारत के पास मौजूद इस अतिरिक्त एथेनॉल को नेपाल, बांग्लादेश और इंडोनेशिया जैसे पड़ोसी देशों में निर्यात भी किया जा सकता है, क्योंकि वहां 10% मिश्रण का लक्ष्य तो है लेकिन उनके पास पर्याप्त कच्चा माल और संसाधन नहीं हैं.
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कैसे होगी शुरुआत? खुलेंगे ‘एथेनॉल ATM’
इस योजना को धरातल पर उतारने के लिए ऑयल मार्केटिंग कंपनियों (OMCs) ने एथेनॉल आधारित चूल्हों (स्टोव्स) पर रिसर्च और टेस्टिंग तेज कर दी है. योजना के शुरुआती चरण में तेल कंपनियों को अपने पेट्रोल पंपों पर ‘एथेनॉल एटीएम’ स्थापित करने के लिए कहा जा सकता है. इन एटीएम के जरिए आम लोग आसानी से गैलनों में खाना पकाने के लिए एथेनॉल खरीद सकेंगे.


