Jhansi Solar Park: उत्तर प्रदेश के बुंदेलखंड क्षेत्र को ऊर्जा के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में योगी सरकार ने एक और बड़ा कदम उठाया है. झांसी की गरौठा तहसील में 213 मेगावाट क्षमता का एक भव्य सोलर पार्क स्थापित होने जा रहा है, जो वर्ष 2028 तक पूरी तरह बनकर तैयार हो जाएगा. इस बेहद महत्वाकांक्षी परियोजना के लिए शासन से हरी झंडी मिलने के बाद अब उत्तर प्रदेश नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा विकास अभिकरण (यूपीएनईडीए) के साथ लीज डीड पर हस्ताक्षर की प्रक्रिया अंतिम चरण में है.
601 एकड़ सरकारी जमीन 30 साल की लीज पर
सौर ऊर्जा के लिए बेहद मुफीद माने जाने वाले बुंदेलखंड के गरौठा क्षेत्र में यह नया पार्क पूरी तरह से सरकारी भूमि पर आकार लेगा. इसके लिए गरौठा तहसील के छह प्रमुख गांवों झिझिरिया, मलेहटा, अहरौरा, कुरैठा, बरमाईन और खरवाच में 601.06 एकड़ सरकारी भूमि को 30 साल की लीज पर दिया जा रहा है. इस परियोजना में जमीन की व्यवस्था की जिम्मेदारी पारीछा तापीय विद्युत परियोजना को सौंपी गई है, जबकि प्लांट की स्थापना का काम एनटीपीसी (NTPC) द्वारा किया जाएगा. पारीछा विद्युत परियोजना की ओर से नेडा (UPNEDA) के खाते में 602 रुपये का वार्षिक लीज रेंट भी जमा करा दिया गया है.
पारीछा तापीय विद्युत परियोजना के अधीक्षण अभियंता वैभव कुमार त्रिपाठी ने बताया कि छह गांवों की 601.06 एकड़ सरकारी भूमि का लीज रेंट यूपीनेडा के खाते में जमा हो चुका है. अब लीज डीड हस्ताक्षरित करने के लिए परियोजना अधिकारी को पत्र लिखा गया है. यह प्रक्रिया पूरी होते ही धरातल पर काम शुरू हो जाएगा और 2028 तक यह पार्क बिजली उत्पादन के लिए तैयार होगा.”
बीडा (BIDA) और डिफेंस कॉरिडोर को मिलेगी ‘ऊर्जा’
यह सोलर पार्क न सिर्फ बुंदेलखंड को रोशन करेगा, बल्कि क्षेत्र में आ रहे बड़े औद्योगिक निवेश की रीढ़ बनेगा. नोएडा की तर्ज पर झांसी में विकसित हो रहे बुंदेलखंड औद्योगिक विकास प्राधिकरण (BIDA) के लिए 33 गांवों में 62,599 एकड़ भूमि खरीदी जा रही है. वहीं, एरच में बन रहे डिफेंस कॉरिडोर के लिए भी पहले चरण की 1076 हेक्टेयर भूमि के बाद अब दूसरे चरण में 728 हेक्टेयर भूमि अधिग्रहण की प्रक्रिया चल रही है. इन दोनों मेगा प्रोजेक्ट्स के संचालन के लिए भारी मात्रा में बिजली की आवश्यकता होगी. ऐसे में यह 213 मेगावाट का सोलर पार्क बीडा और डिफेंस कॉरिडोर की बिजली मांगों को पूरा करने में गेम-चेंजर साबित होगा.
परियोजना से होने वाले मुख्य लाभ
उत्तर प्रदेश के मुख्य बिजली ग्रिड को अतिरिक्त ग्रीन एनर्जी की सप्लाई होगी, जिससे बिजली संकट कम होगा. सोलर पार्क के निर्माण कार्य के दौरान स्थानीय स्तर पर बड़े पैमाने पर मजदूरी और रोजगार के अवसर मिलेंगे. प्लांट के शुरू होने के बाद इसके संचालन और रखरखाव (O&M) के लिए टेक्निकल और नॉन-टेक्निकल पदों पर युवाओं को नौकरियां मिलेंगी. बुंदेलखंड में इतनी बड़ी परियोजना आने से क्षेत्र में अन्य औद्योगिक और रिन्यूएबल एनर्जी निवेशकों का आकर्षण और बढ़ेगा.
गौरतलब है कि गरौठा में सौर ऊर्जा की यह पहली परियोजना नहीं है. इससे पहले भी नेडा ने यहां के आठ गांवों में 600 मेगावाट बिजली उत्पादन के लिए 263.77 एकड़ सरकारी और 2500 एकड़ निजी भूमि अधिग्रहीत की है, और अब यह दूसरा पार्क क्षेत्र को देश का बड़ा ‘सोलर हब’ बनाने की ओर अग्रसर है.


