छत्तीसगढ़ के इंद्रावती टाइगर रिजर्व में बाघों और अन्य वन्यजीवों की सुरक्षा को मजबूत करने के लिए अब छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र संयुक्त रूप से काम करेंगे. इस दिशा में बीजापुर जिले में तीनों राज्यों के वन अधिकारियों की महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई, जिसमें सीमा से लगे वन क्षेत्रों में समन्वित कार्रवाई और शिकारियों पर प्रभावी नियंत्रण की रणनीति तैयार की गई.
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तीन राज्यों के वन अधिकारियों की हुई बैठक
बीजापुर में आयोजित बैठक में छत्तीसगढ़, तेलंगाना और महाराष्ट्र के वन विभाग के अधिकारियों ने भाग लिया. बैठक का मुख्य उद्देश्य इंद्रावती टाइगर रिजर्व और उससे जुड़े वन क्षेत्रों में वन्यजीवों की सुरक्षा को और मजबूत बनाना था.
बैठक में निर्णय लिया गया कि तीनों राज्य आपसी समन्वय के साथ कार्य करेंगे, ताकि सीमा पार गतिविधियों पर प्रभावी निगरानी रखी जा सके और वन्यजीवों के शिकार की घटनाओं को रोका जा सके.
टास्क फोर्स का होगा गठन
बैठक में संयुक्त टास्क फोर्स के गठन पर सहमति बनी. इसके अलावा इंद्रावती टाइगर रिजर्व क्षेत्र में नियमित और समन्वित पेट्रोलिंग अभियान चलाने की रणनीति भी तैयार की गई.
वन अधिकारियों का मानना है कि संयुक्त निगरानी से शिकारियों की गतिविधियों पर अंकुश लगाने और वन्यजीव संरक्षण को अधिक प्रभावी बनाने में मदद मिलेगी.
पर्यटन शुरू करने पर भी हुई चर्चा
बैठक में नवंबर-दिसंबर 2026 से इंद्रावती टाइगर रिजर्व में पर्यटकों के प्रवेश को लेकर भी चर्चा की गई. वन विभाग इस क्षेत्र में पर्यटन गतिविधियों को शुरू करने की संभावनाओं पर विचार कर रहा है.
नक्सल प्रभावित क्षेत्र से पर्यटन की ओर बढ़ता कदम
करीब 2,799 वर्ग किलोमीटर में फैला इंद्रावती टाइगर रिजर्व कभी नक्सली संगठन के बड़े नेताओं का गढ़ माना जाता था. अब क्षेत्र में नक्सल गतिविधियों में कमी आने के बाद यहां पर्यटन को बढ़ावा देने की दिशा में प्रयास तेज किए जा रहे हैं.
वन विभाग का मानना है कि सुरक्षा व्यवस्था मजबूत होने के साथ इंद्रावती टाइगर रिजर्व को वन्यजीव पर्यटन के महत्वपूर्ण केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है.
स्रोत: वन विभाग की बैठक से प्राप्त आधिकारिक जानकारी.


