Delhi GPA Property Rule: दिल्ली में जनरल पावर ऑफ अटॉर्नी (GPA) के जरिए जमीन और मकान की खरीद-फरोख्त करने वाले लाखों लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है. दिल्ली सरकार राजधानी में जीपीए के माध्यम से संपत्ति की बिक्री को कानूनी मान्यता देने की तैयारी कर रही है. इसके लिए दिल्ली विधानसभा के आगामी मॉनसून सत्र में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन एक्ट में संशोधन विधेयक लाया जा सकता है. इस संशोधन के लागू होने के बाद, तय सरकारी शुल्क देकर लोग जीपीए के जरिए खरीदी गई संपत्ति का भी सब-रजिस्ट्रार के पास कानूनी रजिस्ट्रेशन करा सकेंगे.
जीपीए रजिस्ट्रेशन को कानूनी दर्जा देने के लिए सर्किल रेट के हिसाब से करीब 4% शुल्क देना हो सकता है. DDA फ्लैट्स और स्वीकृत कॉलोनियों के अलावा अनाधिकृत कॉलोनियों व JJ क्लस्टर्स की संपत्तियों के विवादों में कमी आएगी. स्टांप ड्यूटी की चोरी रुकेगी और सरकार को बड़े पैमाने पर राजस्व (Revenue) का फायदा होगा. गैर-रक्त संबंधियों (Non-blood relatives) के जीपीए मामलों की जांच ‘कलेक्टर ऑफ स्टांप’ करेंगे और 30 दिनों के भीतर तर्कसंगत आदेश जारी करेंगे.
क्यों पड़ी नियम बदलने की जरूरत?
वर्तमान में दिल्ली में प्रॉपर्टी रजिस्ट्रेशन एक्ट के तहत केवल स्वीकृत कॉलोनियों, डीडीए (DDA) द्वारा आवंटित जमीन या फ्लैट्स की ही सीधी रजिस्ट्री होती है. अनाधिकृत कॉलोनियों में लोग मजबूरीवश जीपीए के जरिए ही संपत्ति खरीदते और बेचते हैं. कई मामलों में लोग केवल ‘जीपीए’ का नाम देकर नाममात्र की स्टांप ड्यूटी पर मालिकाना हक ट्रांसफर कर लेते हैं, जो सीधे तौर पर स्टांप ड्यूटी की चोरी है. जीपीए रजिस्टर्ड होने के बावजूद उसे कानूनी रूप से बिक्री का अधिकार नहीं माना जाता था, जिससे दिल्ली में प्रॉपर्टी को लेकर हजारों अदालती मामले और विवाद पेंडिंग हैं.
सर्किल रेट के हिसाब से लगेगी फीस
नए नियमों के लागू होने के बाद जीपीए के जरिए होने वाली खरीद-बिक्री में संपत्ति के क्षेत्र और श्रेणी के अनुसार सर्किल रेट पर शुल्क देना होगा. यदि किसी संपत्ति की कीमत सर्किल रेट के अनुसार ₹20 लाख है, तो उस पर 4% के हिसाब से 80,000 रुपये फीस देकर जीपीए को कानूनी रूप से रजिस्टर्ड कराया जा सकेगा.
गैर-रक्त संबंधियों के GPA पर सख्ती
राजस्व नुकसान और धांधली को रोकने के लिए सरकार ने फिलहाल रक्त संबंधियों (Blood Relations) के अलावा अन्य व्यक्तियों के पक्ष में होने वाले जीपीए को लेकर कड़े निर्देश जारी किए हैं. ऐसे सभी जीपीए अनिवार्य रूप से जांच के लिए ‘कलेक्टर ऑफ स्टांप’ को भेजे जा रहे हैं. कलेक्टर ऑफ स्टांप को हर मामले में कारण बताते हुए 30 दिनों के भीतर लिखित आदेश जारी करना होगा. इस ऐतिहासिक कदम से न केवल खरीदारों के पैसों और संपत्ति को कानूनी सुरक्षा मिलेगी, बल्कि वर्षों से चले आ रहे संपत्ति विवादों पर भी लगाम लगेगी.


