Saharanpur Industrial Corridor: दिल्ली-देहरादून इकोनॉमिक कॉरिडोर के आसपास औद्योगिक गतिविधियों को बढ़ावा देने की तैयारी तेज हो गई है. उत्तर प्रदेश राज्य औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीसीडा) रामपुर मनिहारान तहसील क्षेत्र के छह गांवों में नया औद्योगिक गलियारा विकसित करने की योजना पर काम कर रहा है. इसके लिए करीब 650 से 700 हेक्टेयर भूमि चिह्नित कर रिपोर्ट जिला मुख्यालय भेजी गई है.
प्रशासन की ओर से चिह्नित भूमि का जल्द स्थलीय निरीक्षण किया जाएगा. इसके बाद जमीन की उपलब्धता, कनेक्टिविटी और अन्य जरूरी मानकों की जांच के आधार पर औद्योगिक गलियारे के लिए अंतिम निर्णय लिया जाएगा.
इन छह गांवों में चिह्नित हुई जमीन
नई रिपोर्ट के अनुसार शिवदासपुर, नैनपुर नगला, मोहम्मदपुर गाडा, चकवाली, सिरसली कला और सिरसली खुर्द गांवों में औद्योगिक गलियारे के लिए करीब 650 से 700 हेक्टेयर भूमि चिह्नित की गई है. इससे पहले प्रशासन ने कई अन्य गांवों में करीब 10 हजार बीघा जमीन चिह्नित की थी, लेकिन स्थलीय निरीक्षण में पर्याप्त कनेक्टिविटी नहीं मिलने के कारण उस जमीन को औद्योगिक क्षेत्र के लिए उपयुक्त नहीं माना गया.
पहले भी हो चुका है औद्योगिक क्षेत्र का विस्तार
सहारनपुर में यूपीसीडा का अंबाला रोड स्थित पिलखनी में करीब 95 एकड़ का औद्योगिक क्षेत्र पहले से मौजूद है. इसके विस्तार के लिए किसानों से जमीन को लेकर सहमति नहीं बन पाई थी. इसके बाद नए क्षेत्र में औद्योगिक गलियारा विकसित करने की प्रक्रिया शुरू की गई.
सदर तहसील में भी 160 हेक्टेयर जमीन
रामपुर मनिहारान के अलावा सदर तहसील क्षेत्र में भी औद्योगिक गलियारे के लिए जमीन चिह्नित की जा चुकी है. कुराली, बडूली, उमाही और नौजली समेत कुछ गांवों में राजस्व विभाग ने करीब 250 एकड़ भूमि चिह्नित की थी. किसानों की सहमति के बाद उमाही, कुराली और नौजली आदि क्षेत्रों की करीब 160 हेक्टेयर भूमि गलियारे के लिए ली जाएगी.
जमीन खरीद के लिए भेजे गए 50 करोड़ रुपये
यूपीसीडा के प्रोजेक्ट प्रभारी उमेश शुक्ला के अनुसार भूमि खरीद के लिए 50 करोड़ रुपये की राशि भेजी जा चुकी है. अक्टूबर में किसानों से जमीन के बैनामे की प्रक्रिया पूरी कराने के लिए कार्रवाई की जाएगी. रामपुर मनिहारान क्षेत्र में भूमि चिह्नित करने का काम प्रशासनिक स्तर पर जारी है. स्थलीय निरीक्षण और जरूरी प्रक्रियाएं पूरी होने के बाद आगे का निर्णय लिया जाएगा.
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औद्योगिक गलियारे विकसित होने से क्षेत्र में नई औद्योगिक इकाइयों की स्थापना का रास्ता खुल सकता है. इससे स्थानीय स्तर पर निवेश और रोजगार के अवसर बढ़ने की उम्मीद है.


