Ayodhya News: डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के 31 वें दीक्षांत समारोह में कुलाधिपति एवं राज्यपाल आनन्दीबेन पटेल ने विश्विद्यालय द्वारा गोद लिये गये गांवों के विद्यालयों में आयोजित प्रतियोगिताओं के तीनों विजेता विद्यार्थियों को पुरस्कार प्रदान कर उनका उत्साहवर्धन किया. इसके साथ ही कुलाधिपति ने विद्यार्थियों को शिक्षा के साथ रचनात्मक एवं सामाजिक गतिविधियों में सक्रिय सहभागिता के लिए प्रेरित किया.
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कुलाधिपति ने 10 आंगनबाड़ी किट का किया वितरण
अयोध्या. 31वें दीक्षांत समारोह में विश्वविद्यालय की सामाजिक सहभागिता एवं सामुदायिक विकास की पहल के अंतर्गत राज्यपाल एवं कुलाधिपति ने आंगनबाड़ी किट का वितरण किया. उन्होंने आंगनबाड़ी केन्द्रों के माध्यम से बच्चों के पोषण, स्वास्थ्य एवं प्रारंभिक शिक्षा को सुदृढ़ करने पर बल दिया.
तीन जनपदों के अधिकारियों को एचपीवी टीकाकरण अभियान के लिए मिला प्रशस्ति पत्र
अयोध्या. 31वें दीक्षांत समारोह में एचपीवी टीकाकरण अभियान में उल्लेखनीय योगदान के लिए अयोध्या, बाराबंकी एवं सुलतानपुर के अधिकारियों को सम्मानित किया गया. कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने संबंधित जिलाधिकारियों, मुख्य विकास अधिकारियों एवं पुलिस अधिकारियों को प्रशस्ति पत्र प्रदान किए. उन्होंने किशोरियों के स्वास्थ्य एवं सुरक्षित भविष्य के लिए एचपीवी टीकाकरण के महत्व को रेखांकित किया. उन्होंने अधिकारियों के प्रयासों की सराहना करते हुए उन्होंने जनजागरूकता अभियानों को निरंतर आगे बढ़ाने का आह्वान किया.
प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों को प्रदान की गईं पुस्तकें
अयोध्या. 31वें दीक्षांत समारोह में जनभवन से प्राप्त पुस्तकों का वितरण प्राथमिक विद्यालय के शिक्षकों को किया गया. कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल ने प्राथमिक विद्यालय के दो शिक्षकों को पुस्तकें प्रदान कीं. उन्होंने शिक्षकों को पुस्तकों के माध्यम से विद्यार्थियों में अध्ययन एवं ज्ञान के प्रति रुचि विकसित करने के लिए प्रेरित किया. उन्होंने कहा कि गुणवत्तापूर्ण शिक्षा के लिए शिक्षक का निरंतर अध्ययन और ज्ञानवर्धन आवश्यक है.
कुलपति ने कुलाधिपति महोदया को भेंट कीं पुस्तकें
अयोध्या. 31वें दीक्षांत समारोह के अवसर पर कुलपति द्वारा विवि की कुलाधिपति एवं राज्यपाल श्रीमती आनंदीबेन पटेल को पुस्तकें भेंट की गईं. कुलपति ने विश्वविद्यालय की शैक्षणिक, शोध एवं साहित्यिक गतिविधियों से संबंधित प्रकाशनों से उन्हें अवगत कराया. उन्होंने विश्वविद्यालय की अकादमिक उपलब्धियों एवं ज्ञान-सृजन की दिशा में किए जा रहे प्रयासों की जानकारी दी. कुलाधिपति महोदया ने विश्वविद्यालय के शिक्षकों एवं विद्यार्थियों को अध्ययन, शोध एवं नवाचार के लिए प्रोत्साहित किया.
मोलेला टेराकोटा कला को नई पहचान दिलाने वाले हल्दी घाटी के भग्गा लाल कुम्हार को ‘विद्या वाचस्पति’ की मानद उपाधि
अयोध्या. राजस्थान की प्रसिद्ध पारंपरिक मोलेला टेराकोटा कला के कुशल शिल्पकार श्री भग्गा लाल कुम्हार को भारतीय लोककला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण में उल्लेखनीय योगदान के लिए डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय, अयोध्या द्वारा मानद उपाधि ‘विद्या वाचस्पति’ से सम्मानित किया गया. श्री भग्गा लाल कुम्हार ने मोलेला टेराकोटा कला की पारंपरिक तकनीकों को संरक्षित करने के साथ-साथ उनमें नए प्रयोग कर इस लोककला को आधुनिक स्वरूप प्रदान किया है. उनकी कलाकृतियों में राजस्थान की धार्मिक, सांस्कृतिक एवं स्थानीय परंपराओं की समृद्ध झलक देखने को मिलती है. वे पारंपरिक मिट्टी और प्राकृतिक रंगों का प्रयोग कर आकर्षक एवं विशिष्ट कलाकृतियों का निर्माण करते हैं. उन्होंने कार्यशालाओं एवं लाइव प्रदर्शन के माध्यम से विद्यार्थियों और युवा कलाकारों को मोलेला टेराकोटा कला की बारीकियों से परिचित कराया है.
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उनकी कलाकृतियों को राष्ट्रीय प्रदर्शनियों तथा विभिन्न सांस्कृतिक आयोजनों में पहचान मिली है. कला के क्षेत्र में उनके योगदान के लिए उन्हें राजस्थान सरकार का राज्य पुरस्कार तथा वेस्ट जोन कल्चरल सेंटर का शिल्प सम्मान भी प्राप्त हो चुका है. मोलेला टेराकोटा कला को जीआई संरक्षण दिलाने में भी श्री भग्गा लाल कुम्हार की महत्वपूर्ण भूमिका रही है. उन्होंने अपनी कला के माध्यम से न केवल राजस्थान की समृद्ध लोक परंपरा को जीवंत बनाए रखा, बल्कि नई पीढ़ी को इससे जोड़ने का भी निरंतर प्रयास किया है. भारतीय लोककला एवं सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण, संवर्धन और प्रचार-प्रसार में उनके उल्लेखनीय योगदान को देखते हुए विश्वविद्यालय द्वारा उन्हें ‘विद्या वाचस्पति’ की मानद उपाधि प्रदान की गई.


