Saharanpur Industrial Corridor: दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे और हाईवे के किनारे प्रस्तावित औद्योगिक गलियारे की जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया किसानों की आपत्तियों के चलते अटक गई है. सदर तहसील के 11 प्रस्तावित गांवों में से 8 गांवों के किसानों ने जमीन देने से इनकार कर दिया है. किसानों ने कम सर्किल रेट को इसका मुख्य कारण बताया है. मामले की रिपोर्ट तहसील प्रशासन ने उच्च अधिकारियों को भेज दी है.
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13 गांवों की करीब 1,000 हेक्टेयर जमीन पर बनना है औद्योगिक गलियारा
उत्तर प्रदेश एक्सप्रेसवेज औद्योगिक विकास प्राधिकरण (यूपीडा) की योजना के तहत सहारनपुर में करीब 1,000 हेक्टेयर भूमि पर लॉजिस्टिक्स हब और औद्योगिक गलियारा विकसित किया जाना प्रस्तावित है. परियोजना में 2,000 करोड़ रुपये से अधिक के निवेश का लक्ष्य रखा गया है. प्रस्तावित भूमि में सदर तहसील के लाखनौर मुस्तकम, कोटा, सीडकी, उमाही, भलस्वा ईसापुर, वाजिदपुर सानी, कपासी, सुभरी महराब, सैदपुर, लतीफपुर मुस्तकम और अलीपुरा गांव शामिल हैं. इसके अलावा नकुड़ तहसील के कुम्हारहेड़ा और सरगथवाला गांवों की जमीन भी प्रस्तावित परियोजना का हिस्सा है.
इन 3 गांवों के किसानों ने जताई सहमति
सदर तहसील के 11 गांवों में से फिलहाल केवल सैदपुर, सीडकी और सुभरी महराब के किसानों ने जमीन देने पर सहमति जताई है. वहीं आठ गांवों के किसानों ने आपत्ति दर्ज कराते हुए भूमि देने से इनकार किया है. नकुड़ तहसील के कुम्हारहेड़ा और सरगथवाला गांवों की स्थिति अभी स्पष्ट नहीं है.
कम सर्किल रेट बना सबसे बड़ा मुद्दा
किसानों का कहना है कि उनकी जमीन एक्सप्रेसवे और हाईवे के किनारे स्थित है, इसलिए बाजार में इसकी कीमत सर्किल रेट से कहीं अधिक है. किसानों का तर्क है कि यदि मौजूदा सर्किल रेट के आधार पर मुआवजा मिला तो जमीन बेचने के बाद वे दूसरी जगह उतनी ही जमीन खरीदने की स्थिति में नहीं होंगे. यही वजह है कि किसानों ने भूमि अधिग्रहण से पहले मुआवजे की दर पर पुनर्विचार करने की मांग की है.
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अब आगे क्या होगा?
किसानों की आपत्तियों के बाद प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती भूमि अधिग्रहण और उचित मुआवजे के बीच संतुलन बनाने की है. सदर तहसील प्रशासन ने किसानों की आपत्तियों की रिपोर्ट उच्च अधिकारियों को भेज दी है. अब शासन और संबंधित विभाग को तय करना होगा कि किसानों की मांग के मुताबिक मुआवजे की दर में बदलाव किया जाएगा या किसी अन्य विकल्प के जरिए परियोजना को आगे बढ़ाया जाएगा. अगर किसानों की सहमति नहीं बनी तो सहारनपुर के इस प्रस्तावित औद्योगिक गलियारे की जमीन अधिग्रहण प्रक्रिया में और देरी हो सकती है.


