Jaipur, August 18: राजस्थान के अजमेर में साइबर अपराधियों ने दो अलग-अलग मामलों में लोगों को निशाना बनाकर करीब 58.50 लाख रुपये की ठगी कर ली. एक मामले में निवेश पर भारी मुनाफे का झांसा देकर दंपति से 50.70 लाख रुपये निवेश कराए गए, जबकि दूसरे मामले में संदिग्ध APK फाइल डाउनलोड करवाकर एक युवक के मोबाइल और बैंक खाते तक पहुंच बनाई गई और 7.80 लाख रुपये निकाल लिए गए. दोनों मामलों में अजमेर साइबर पुलिस थाने में शिकायत के आधार पर केस दर्ज किया गया है.
पुलिस अब दोनों मामलों में तकनीकी जांच कर रही है. जांच के दौरान ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों, फर्जी ऐप्स, APK फाइल और उन बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है, जिनमें ठगी की रकम ट्रांसफर हुई.
निवेश में भारी मुनाफे का झांसा देकर 50.70 लाख की ठगी
पहला मामला सोनी नगर निवासी अर्पित सिंगल और उनकी पत्नी से जुड़ा है. दंपति पहले से निवेश का काम करते हैं. साइबर ठगों ने इसी बात का फायदा उठाते हुए उनसे व्हाट्सऐप कॉल के जरिए संपर्क किया.
ठगों ने दंपति को निवेश पर बेहतर रिटर्न और भारी मुनाफे का लालच दिया. इसके बाद उन्हें VIP ELITE और B R NOVA नाम के कथित ऐप डाउनलोड करवाए गए. निवेश के नाम पर दंपति से अलग-अलग समय में रकम ट्रांसफर कराई गई.
जुलाई महीने के दौरान दंपति ने इन ऐप्स के जरिए कुल 50 लाख 70 हजार रुपये निवेश कर दिए. इसके बाद जब ठगों ने उनसे और अधिक कमीशन की मांग की, तो दंपति को शक हुआ.
उन्हें समझ आया कि निवेश और मुनाफे का जो लालच दिया जा रहा था, वह साइबर ठगी का हिस्सा था. इसके बाद दंपति ने अजमेर साइबर पुलिस थाने पहुंचकर शिकायत दर्ज कराई.
APK फाइल डाउनलोड करवाकर खाते से 7.80 लाख निकाले
दूसरा मामला पुष्कर क्षेत्र के बांसेली निवासी गोपाल राम से जुड़ा है. पुलिस के अनुसार करीब 10-12 दिन पहले किसी अज्ञात व्यक्ति ने उन्हें धोखे से एक APK फाइल डाउनलोड करवाई.
फाइल डाउनलोड करने के बाद गोपाल राम को इस बात का अंदाजा नहीं था कि इसके जरिए उनके मोबाइल तक साइबर ठगों की पहुंच बन सकती है. आरोप है कि इसके बाद ठगों ने मोबाइल तक पहुंच हासिल कर उनके बैंक खाते से 7 लाख 80 हजार 866 रुपये निकाल लिए.
बैंक खाते से रकम कटने का SMS मिलने के बाद गोपाल राम को ठगी का पता चला. इसके बाद उन्होंने तत्काल साइबर पुलिस थाने पहुंचकर मामले की शिकायत दर्ज कराई.
फर्जी ऐप और बैंक खातों की जांच कर रही पुलिस
अजमेर साइबर थाने के DYSP शमशेर खान के अनुसार, दोनों पीड़ितों की शिकायत के आधार पर मामले दर्ज कर लिए गए हैं. पुलिस अब तकनीकी जांच के जरिए साइबर ठगी से जुड़ी पूरी कड़ी को जोड़ने में जुटी है.
जांच के दौरान ठगी में इस्तेमाल किए गए मोबाइल नंबरों, फर्जी ऐप्स, APK फाइल और बैंक खातों की जानकारी जुटाई जा रही है. पुलिस यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि ठगी की रकम किन खातों में पहुंची और डिजिटल सुरागों के जरिए आरोपियों तक कैसे पहुंचा जा सकता है.
अलग-अलग तरीकों से लोगों को निशाना बना रहे साइबर ठग
अजमेर में सामने आए दोनों मामलों में साइबर ठगी के अलग-अलग तरीके सामने आए हैं. पहले मामले में निवेश पर असामान्य मुनाफे का लालच देकर दंपति से बड़ी रकम ट्रांसफर कराई गई. दूसरे मामले में संदिग्ध APK फाइल डाउनलोड करवाकर बैंक खाते से रकम निकालने का आरोप है.
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इन मामलों के बाद साइबर सुरक्षा को लेकर सतर्क रहने की जरूरत भी सामने आती है. अनजान लोगों की ओर से निवेश पर असामान्य मुनाफे का दावा करने वाले ऑफर पर बिना जांच भरोसा करना नुकसानदेह हो सकता है. इसी तरह किसी अनजान स्रोत से APK फाइल डाउनलोड करने से पहले उसकी विश्वसनीयता की जांच करना जरूरी है.
किसी भी संदिग्ध लिंक, ऐप या फाइल को डाउनलोड करने और निवेश के नाम पर बैंकिंग जानकारी साझा करने से पहले उसकी पुष्टि करना जरूरी है.


