राशन कार्ड धारकों के लिए राशन लेने की प्रक्रिया में बदलाव किया गया है. पहले राशन दुकान पर अंगूठा या उंगली का निशान लगाने के दौरान फिंगरप्रिंट मैच नहीं होने की समस्या सामने आती थी. इससे कई बार लाभार्थियों को परेशानी होती थी और उन्हें राशन लिए बिना ही लौटना पड़ता था.
अब इस समस्या से राहत मिलने वाली है. सरकार ने 1 अक्टूबर से राशन वितरण प्रणाली यानी ePDS को आसान और पारदर्शी बनाने के लिए फेस ऑथेंटिकेशन की सुविधा लागू कर दी है. सरकार ने 29 सितंबर को इसकी आधिकारिक घोषणा की थी और अब इसे लागू किया गया है.
नई व्यवस्था के तहत अगर राशन कार्ड धारक का फिंगरप्रिंट मैच नहीं करता है, तो उसके चेहरे के जरिए भी वेरिफिकेशन किया जा सकेगा. इसके बाद लाभार्थी को राशन दिया जा सकेगा.
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आधार डेटाबेस से वेरिफिकेशन
राशन कार्ड धारकों को अनाज लेने के लिए राशन दुकान पर लगी e-POS मशीन में बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन कराना होता है. इसके लिए पहले अंगूठा या उंगली का निशान लिया जाता है.
कई बार नेटवर्क की कमी, तकनीकी खराबी या स्किन की संवेदनशीलता के कारण फिंगरप्रिंट मैच नहीं हो पाता. ऐसी स्थिति में लाभार्थी को राशन लेने में परेशानी होती है.
अब नई व्यवस्था के तहत अगर किसी उपभोक्ता का फिंगरप्रिंट मैच नहीं होता है, तो e-POS मशीन में मौजूद कैमरे से लाभार्थी के चेहरे को स्कैन किया जाएगा. इसके बाद आधार डेटाबेस से उसका वेरिफिकेशन किया जाएगा.
इस तरह फिंगरप्रिंट के जरिए पहचान नहीं होने की स्थिति में फेस ऑथेंटिकेशन एक वैकल्पिक वेरिफिकेशन माध्यम के तौर पर काम करेगा.
बुजुर्गों और कामगारों को मिलेगी सबसे बड़ी राहत
नई व्यवस्था से बुजुर्गों और दिन-रात मेहनत-मजदूरी करने वाले श्रमिकों को राहत मिलने की उम्मीद है. उम्र बढ़ने और लगातार शारीरिक श्रम करने की वजह से कई लोगों की उंगलियों के निशान घिस जाते हैं.
ऐसे मामलों में मशीन के लिए फिंगरप्रिंट को ठीक से पढ़ना मुश्किल हो सकता है. इसके कारण राशन लेने के दौरान लाभार्थियों को परेशानी का सामना करना पड़ता है.
फेस ऑथेंटिकेशन की सुविधा लागू होने के बाद ऐसे लाभार्थियों के लिए वेरिफिकेशन का एक दूसरा विकल्प उपलब्ध होगा. अगर फिंगरप्रिंट मैच नहीं करता है, तो चेहरे के जरिए पहचान की प्रक्रिया पूरी की जा सकेगी.
राशन दुकानों की मशीनों में होगा सॉफ्टवेयर अपडेट
इस व्यवस्था को लागू करने के लिए सरकार देशभर की राशन दुकानों में इस्तेमाल होने वाली ePOS मशीनों और उनके मुख्य सिस्टम में जरूरी तकनीकी बदलाव और सॉफ्टवेयर अपडेट करने जा रही है.
हालांकि, नई सुविधा का लाभ शुरुआत में उन्हीं स्थानों पर लिया जा सकेगा, जहां ePOS मशीन में कैमरा उपलब्ध है और फेस ऑथेंटिकेशन से जुड़ी तकनीक का अपडेट लाइव हो चुका है.
इसका मतलब यह है कि 1 अक्टूबर से सुविधा लागू होने के बावजूद हर राशन दुकान पर यह सुविधा एक साथ उपलब्ध होना जरूरी नहीं है. जहां सिस्टम और जरूरी तकनीकी अपडेट लाइव होंगे, वहीं लाभार्थी फेस ऑथेंटिकेशन के जरिए वेरिफिकेशन करा सकेंगे.
क्या है ePDS सिस्टम?
ePDS यानी Electronic Public Distribution System सरकार की डिजिटल व्यवस्था है, जिसके जरिए राशन कार्ड धारकों और लाभार्थियों से जुड़े डेटा को ऑनलाइन मैनेज किया जाता है.
राशन वितरण से लेकर लाभार्थियों के वेरिफिकेशन तक की मॉनिटरिंग इसी डिजिटल सिस्टम के जरिए की जाती है. राशन दुकानों पर इस्तेमाल होने वाली ePOS मशीनें भी इसी व्यवस्था का हिस्सा हैं.
फेस ऑथेंटिकेशन की नई सुविधा इसी डिजिटल व्यवस्था को और मजबूत बनाने की दिशा में एक बदलाव है. इसका उद्देश्य उन लाभार्थियों के लिए वेरिफिकेशन को आसान बनाना है, जिनका फिंगरप्रिंट किसी कारण से मशीन में मैच नहीं हो पाता.
नई व्यवस्था में फिंगरप्रिंट मैच नहीं होने की स्थिति में चेहरे के जरिए लाभार्थी का वेरिफिकेशन किया जा सकेगा. हालांकि, इसके लिए संबंधित राशन दुकान की ePOS मशीन में कैमरा और फेस ऑथेंटिकेशन तकनीक का अपडेट लाइव होना जरूरी होगा.
PDS Face Authentication से जुड़े प्रमुख बदलाव
| व्यवस्था | पहले | नई व्यवस्था |
|---|---|---|
| प्राथमिक वेरिफिकेशन | फिंगरप्रिंट | फिंगरप्रिंट |
| फिंगरप्रिंट मैच न होने पर | परेशानी की स्थिति | फेस ऑथेंटिकेशन का विकल्प |
| फेस वेरिफिकेशन | उपलब्ध नहीं | कैमरे के जरिए |
| डेटा वेरिफिकेशन | आधार आधारित | आधार डेटाबेस से |
| जरूरी मशीन | ePOS | कैमरा और अपडेटेड ePOS |
| सुविधा लागू | — | 1 अक्टूबर से |
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