Ayodhya News: रामनगरी की प्राचीनता और समृद्ध सांस्कृतिक विरासत से जुड़े पुरावशेषों की खोज में बड़ी उपलब्धि सामने आई है. डॉ. राममनोहर लोहिया अवध विश्वविद्यालय के कोशल संग्रहालय की टीम ने ऐतिहासिक ऋण मोचन घाट पर व्यापक सर्वेक्षण कर मौर्य, शुंग और कुषाण काल से जुड़े कई महत्वपूर्ण पुरावशेष संग्रहित किए हैं. इनमें मौर्यकालीन हाथी और कुषाणकालीन वृषभ (बैल) की दुर्लभ टेराकोटा आकृतियां शामिल हैं.
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सर्वेक्षण संग्रहालय के समन्वयक डॉ. राजेश कुमार सिंह, गैलरी असिस्टेंट डॉ. देशराज उपाध्याय और शोध छात्रों की टीम ने किया. टीम ने ऋण मोचन घाट निवासी डॉ. राजेश कुमार श्रीवास्तव के आवास से इन प्राचीन अवशेषों का संग्रहण किया.
मौर्य और कुषाण काल के मृदभांड मिले
संग्रहित पुरावशेषों में उत्तरी कृष्ण परिमार्जित मृदभांड (NBPW) परंपरा से जुड़ा एक प्राचीन लोटा, डायस और मौर्य, शुंग तथा कुषाण कालीन बर्तनों के अवशेष शामिल हैं. इनसे अयोध्या क्षेत्र में प्राचीन काल से मानव गतिविधियों और सांस्कृतिक विकास की जानकारी मिलने की संभावना है.
इसके अलावा करीब 9वीं शताब्दी यानी प्रतिहार काल की लाल बलुआ पत्थर से निर्मित अत्यंत कलात्मक उमा-महेश प्रतिमा भी मिली है. यह प्रतिमा क्षेत्र की मध्यकालीन धार्मिक और कलात्मक परंपरा के लिहाज से महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
पुरातत्वविद ने की काल निर्धारण की पुष्टि
नई दिल्ली के प्रसिद्ध पुरातत्वविद विजय कुमार ने इन अवशेषों के काल निर्धारण की पुष्टि की है. उनके अनुसार, मिले मृदभांड मौर्य और कुषाण काल से संबंधित हैं, जबकि उमा-महेश प्रतिमा करीब 9वीं शताब्दी की पुरातात्विक धरोहर है.
अयोध्या के इतिहास पर पड़ेगा नया प्रकाश
इस महत्वपूर्ण उपलब्धि पर विश्वविद्यालय के कुलपति ने कोशल संग्रहालय की टीम को बधाई दी. उन्होंने कहा कि अयोध्या की भूमि ऐतिहासिक और सांस्कृतिक दृष्टि से अत्यंत समृद्ध है. ऋण मोचन घाट से मिले मौर्य, शुंग और कुषाण कालीन पुरावशेष अयोध्या के निरंतर और व्यवस्थित पुरातात्विक इतिहास पर नई जानकारी उपलब्ध कराते हैं.
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कुलपति ने कहा कि यह खोज शोधार्थियों और विद्यार्थियों के लिए अध्ययन के नए अवसर खोलेगी और अयोध्या की प्राचीनता को वैश्विक स्तर पर स्थापित करने में मदद करेगी. विश्वविद्यालय इस ऐतिहासिक धरोहर के संरक्षण, शोध और प्रदर्शन के लिए लगातार प्रयासरत है.


