चित्रकूट, 30 अगस्त 2026: मध्य प्रदेश के सतना जिले के चित्रकूट में अतिवृष्टि के बाद मंदाकिनी नदी ने रौद्र रूप धारण कर लिया. नदी का जलस्तर खतरे के निशान से कई मीटर ऊपर पहुंचने के बाद चित्रकूट के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी भर गया. कई परिवारों के घरों में पानी पहुंचने के बाद लोग छतों पर फंस गए. सड़क संपर्क बाधित होने पर जिला प्रशासन ने सेना और वायुसेना की मदद ली.
सेना की बचाव टुकड़ी और वायुसेना के दो हेलीकॉप्टरों ने बाढ़ प्रभावित इलाकों में rescue operation चलाया और फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया. लगातार बारिश के कारण हालात बिगड़ने के बाद प्रशासन ने राहत और बचाव कार्य तेज किया.
मूसलाधार बारिश के बाद बिगड़े हालात
28 और 29 अगस्त की दरमियानी रात हुई मूसलाधार बारिश का असर सतना जिले में साफ दिखाई दिया. जिले में कुल 73.6 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई. इस अतिवृष्टि का सबसे ज्यादा असर चित्रकूट क्षेत्र में देखने को मिला.
लगातार बारिश के कारण मंदाकिनी नदी का जलस्तर तेजी से बढ़ा. नदी का जलस्तर 146.74 मीटर तक पहुंच गया, जबकि सामान्य अधिकतम स्तर 139.60 मीटर बताया गया है.
जलस्तर में इस बढ़ोतरी के बाद चित्रकूट के निचले इलाकों में बाढ़ का पानी घुस गया. कई घरों और सड़कों पर पानी भरने से लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ा.
कई परिवार घरों की छतों पर फंसे
बाढ़ का पानी बढ़ने के बाद कई परिवारों के लिए घर से बाहर निकलना मुश्किल हो गया. कुछ लोग अपने घरों की छतों पर फंसे रहे.
सड़क संपर्क बाधित होने के कारण प्रभावित इलाकों तक पहुंचना भी चुनौतीपूर्ण हो गया. स्थिति को देखते हुए जिला प्रशासन ने स्थानीय स्तर पर राहत प्रयासों के साथ सेना और वायुसेना से मदद ली.
सेना की rescue team और वायुसेना के दो helicopters को प्रभावित क्षेत्रों में लगाया गया. इनके जरिए बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया.
सेना और वायुसेना ने संभाला मोर्चा
बाढ़ प्रभावित इलाकों में सेना की बचाव टुकड़ी ने रेस्क्यू ऑपरेशन चलाया. वहीं वायुसेना के दो हेलीकॉप्टरों ने भी लोगों को सुरक्षित निकालने में मदद की.
प्रशासन के सामने सबसे बड़ी चुनौती उन इलाकों तक पहुंचने की थी जहां सड़क संपर्क बाढ़ के कारण बाधित हो चुका था. ऐसे स्थानों पर हवाई मदद के जरिए rescue operation किया गया.
इस कार्रवाई का उद्देश्य बाढ़ में फंसे लोगों को सुरक्षित निकालना और उन्हें खतरे वाले इलाकों से बाहर पहुंचाना था.
मुख्यमंत्री ने रीवा पहुंचकर की स्थिति की समीक्षा
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने रीवा पहुंचकर वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए सतना और रीवा जिलों में बारिश, जलभराव और बाढ़ की स्थिति की समीक्षा की.
उन्होंने अधिकारियों से प्रभावित क्षेत्रों की स्थिति की जानकारी ली और राहत एवं बचाव कार्यों को लेकर आवश्यक निर्देश दिए.
मुख्यमंत्री ने सतना कलेक्टर को निर्देश दिया कि बाढ़ प्रभावित लोगों के साथ-साथ चित्रकूट में रुके श्रद्धालुओं और रहवासियों के लिए भोजन, वस्त्र और शुद्ध पेयजल की व्यवस्था सुनिश्चित की जाए.
श्रद्धालुओं के लिए भी जरूरी इंतजाम
चित्रकूट धार्मिक और तीर्थ स्थल होने के कारण बारिश और बाढ़ के बीच वहां रुके श्रद्धालुओं की सुरक्षा भी प्रशासन की प्राथमिकता में रही.
मुख्यमंत्री ने निर्देश दिया कि प्रभावित लोगों और चित्रकूट में मौजूद श्रद्धालुओं को जरूरी सुविधाएं उपलब्ध कराई जाएं. इनमें भोजन, कपड़े और clean drinking water की व्यवस्था शामिल है.
इससे प्रशासन को बाढ़ प्रभावित क्षेत्र में फंसे लोगों के साथ तीर्थ यात्रियों की जरूरतों पर भी एक साथ ध्यान देना होगा.
प्रभावित लोगों को राहत राशि देने के निर्देश
मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराने के निर्देश भी दिए हैं.
सर्वे के बाद प्रभावित लोगों को RBC 6/4 के तहत राहत राशि उपलब्ध कराने के निर्देश दिए गए हैं. इसके जरिए बारिश और बाढ़ से प्रभावित लोगों को निर्धारित राहत उपलब्ध कराने की प्रक्रिया आगे बढ़ाई जाएगी.
प्रशासन को नुकसान का आकलन कर प्रभावित परिवारों तक राहत पहुंचाने पर ध्यान देने को कहा गया है.
जनहानि और पशुहानि रोकने पर विशेष जोर
मुख्यमंत्री ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि बारिश और बाढ़ के कारण किसी भी तरह की जनहानि और पशुहानि न हो, इसके लिए पूरी सतर्कता बरती जाए.
उन्होंने अधिकारियों को प्रभावित क्षेत्रों की लगातार निगरानी करने और जरूरत के अनुसार तत्काल कदम उठाने को कहा.
बाढ़ की स्थिति में निचले इलाकों में मौजूद लोगों की सुरक्षा को प्राथमिकता देने और rescue resources का प्रभावी इस्तेमाल करने पर जोर दिया गया है.
दूसरे जिलों के बचाव उपकरण भी भेजे जाएंगे
मुख्यमंत्री ने उन जिलों में उपलब्ध rescue equipment को भी बाढ़ प्रभावित जिलों में भेजने के निर्देश दिए हैं, जहां बारिश का असर कम है.
इसका उद्देश्य उपलब्ध बचाव संसाधनों का बेहतर उपयोग करना है. जिन जिलों में उपकरणों की तत्काल जरूरत नहीं है, वहां मौजूद संसाधनों को प्रभावित क्षेत्रों में भेजकर राहत एवं बचाव अभियान को मजबूत करने की योजना है.
इससे बाढ़ प्रभावित जिलों में उपलब्ध manpower और equipment की कमी को कम करने में मदद मिल सकती है.
चित्रकूट में राहत और बचाव कार्य जारी
मंदाकिनी नदी का जलस्तर सामान्य से काफी ऊपर पहुंचने और निचले क्षेत्रों में बाढ़ आने के बाद चित्रकूट में प्रशासन की प्राथमिकता प्रभावित लोगों को सुरक्षित रखना बनी हुई है.
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सेना और वायुसेना की मदद से कई लोगों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाया गया है. वहीं प्रशासन को राहत सामग्री, भोजन और पेयजल की व्यवस्था के साथ प्रभावित क्षेत्रों का सर्वे कराने के निर्देश दिए गए हैं.
लगातार बारिश के बाद पैदा हुई स्थिति को देखते हुए अधिकारियों को सतर्क रहने और उपलब्ध संसाधनों का इस्तेमाल करने के निर्देश दिए गए हैं. बाढ़ प्रभावित क्षेत्रों में राहत और बचाव अभियान पर प्रशासन की लगातार नजर बनी हुई है.


