श्रीगंगानगर, 30 अगस्त 2026: हुनर और जुनून के मेल से साधारण चीजों को भी खास बनाया जा सकता है. राजस्थान के श्रीगंगानगर के डॉ. एम.एम. सक्सेना अपनी अनूठी कला के जरिए इसका उदाहरण पेश कर रहे हैं. वे चाकू की मदद से लकड़ी और टहनियों पर बेहद बारीकी से नक्काशी कर आकर्षक कलाकृतियां तैयार करते हैं.
उनकी बनाई कलाकृतियों को देखने वालों का ध्यान खास तौर पर इस बात की ओर जाता है कि छोटे-छोटे लकड़ी के टुकड़ों और टहनियों को किस तरह बारीक नक्काशी के जरिए नया रूप दिया गया है.
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चाकू से करते हैं बारीक नक्काशी
डॉ. सक्सेना लकड़ी और टहनियों के छोटे-छोटे हिस्सों पर चाकू से बारीक काम करते हैं. सामान्य नजर से देखने पर ये टुकड़े साधारण लग सकते हैं, लेकिन उनकी रचनात्मकता और मेहनत के बाद यही लकड़ी आकर्षक कलाकृतियों में बदल जाती है.
उनकी नक्काशी में बारीकी साफ दिखाई देती है. लकड़ी के छोटे आकार के बावजूद उस पर किए गए काम में काफी मेहनत और धैर्य की जरूरत होती है.
टहनियों और लकड़ी को देते हैं नया रूप
डॉ. सक्सेना टहनियों और लकड़ी के छोटे-छोटे टुकड़ों को अपनी कला के जरिए अलग और आकर्षक रूप देते हैं. उनकी बनाई कृतियां इस बात को दिखाती हैं कि रचनात्मक सोच के साथ सामान्य सामग्री का भी इस्तेमाल खूबसूरत कला तैयार करने में किया जा सकता है.
चाकू से लकड़ी को तराशने का उनका तरीका देखने वालों के लिए खास आकर्षण का विषय बना हुआ है.
मेहनत, धैर्य और रचनात्मकता का मेल
लकड़ी पर इतनी बारीकी से नक्काशी करना आसान काम नहीं है. इसके लिए धैर्य के साथ-साथ हाथों की पकड़ और लगातार अभ्यास की जरूरत होती है. डॉ. सक्सेना की कलाकृतियों में उनकी मेहनत और creativity दोनों नजर आती हैं.
हर छोटे टुकड़े पर किए गए काम में बारीकी उनकी कला की खास पहचान बनती है. यही वजह है कि उनकी कलाकृतियां देखने वाले लोगों को आकर्षित करती हैं.
लोगों के बीच आकर्षण का केंद्र बनी कला
डॉ. सक्सेना की लकड़ी पर की गई नक्काशी स्थानीय स्तर पर लोगों के बीच चर्चा और आकर्षण का विषय बनी हुई है. खास बात यह है कि वे किसी महंगी या विशेष सामग्री के बजाय लकड़ी और टहनियों जैसे साधारण टुकड़ों को अपनी कला का माध्यम बनाते हैं.
उनकी कलाकृतियां यह दिखाती हैं कि हुनर और रचनात्मकता के जरिए साधारण वस्तुओं में भी अलग पहचान पैदा की जा सकती है.
अनोखे हुनर की अलग पहचान
श्रीगंगानगर के डॉ. एम.एम. सक्सेना का यह हुनर पारंपरिक लकड़ी की नक्काशी से अलग इसलिए भी नजर आता है क्योंकि इसमें छोटे टुकड़ों और टहनियों को चाकू की मदद से आकार दिया जाता है.
उनकी कला में बारीकी के साथ प्रयोग भी दिखाई देता है. यह काम उनकी मेहनत, धैर्य और रचनात्मक सोच को सामने लाता है.
लकड़ी और टहनियों पर बनाई गई उनकी ये कलाकृतियां देखने वालों को यह एहसास कराती हैं कि कला के लिए हमेशा महंगी सामग्री की जरूरत नहीं होती. सही हुनर और कल्पनाशीलता के साथ साधारण चीजों को भी खास बनाया जा सकता है.


