नई दिल्ली: देश में इंफ्रास्ट्रक्चर से जुड़े सेक्टरों में आने वाले समय में नए निवेश को रफ्तार मिल सकती है. Bank of Baroda Economic Research की एक रिपोर्ट के मुताबिक, Electricals, Capital Goods और Infrastructure के साथ-साथ FMCG सेक्टर में क्षमता उपयोग (Capacity Utilisation) लगातार बेहतर हुआ है. अगर मौजूदा रुझान आगे भी जारी रहता है तो इन क्षेत्रों में कंपनियां नई क्षमता विकसित करने के लिए ज्यादा निवेश कर सकती हैं. बैंक ऑफ बड़ौदा की रिपोर्ट में अलग-अलग उद्योगों की कंपनियों की बैलेंस शीट का विश्लेषण किया गया है. इसमें Gross Sales और Gross Fixed Assets के अनुपात (Asset Turnover Ratio) को क्षमता उपयोग के संकेतक के तौर पर इस्तेमाल किया गया है. इस अनुपात में बढ़ोतरी का मतलब है कि कंपनियां अपनी मौजूदा परिसंपत्तियों का बेहतर इस्तेमाल कर रही हैं और बिक्री तथा उत्पादन बढ़ रहा है. मांग मजबूत बनी रहने पर इससे नई क्षमता में निवेश की जरूरत पैदा हो सकती है.
सागर-सतना एक्सप्रेसवे से बदलेगी एमपी की कनेक्टिविटी, 73 किमी घटेगी दूरी
Electricals में सबसे मजबूत बढ़त
रिपोर्ट के मुताबिक Electricals सेक्टर का Asset Turnover Ratio 2024 में 3.49 था, जो 2025 में बढ़कर 3.69 और 2026 में 3.84 हो गया. इसी तरह Infrastructure सेक्टर में यह अनुपात 2.94 से बढ़कर 3.10 और फिर 3.13 हो गया. Capital Goods में भी लगातार बढ़ोतरी देखी गई. इसका अनुपात 2024 में 2.74 से बढ़कर 2025 में 2.84 और 2026 में 2.93 हो गया. FMCG सेक्टर में भी लगातार सुधार हुआ. यहां Asset Turnover Ratio 2024 के 2.00 से बढ़कर 2025 में 2.16 और 2026 में 2.25 पहुंच गया.
सरकारी खर्च से इंफ्रा सेक्टर को मिला फायदा
Bank of Baroda Research के मुताबिक Electricals, Capital Goods और Infrastructure सेक्टर में सुधार की प्रमुख वजह सरकार का बढ़ा हुआ सार्वजनिक खर्च है. सरकारी पूंजीगत व्यय ने इन उद्योगों के साथ मजबूत कारोबारी संबंध बनाए हैं, जिससे कंपनियों की मौजूदा क्षमता का बेहतर इस्तेमाल हो रहा है. FMCG सेक्टर में मांग में सुधार और नए उत्पादों की लॉन्चिंग, खासकर प्रीमियम सेगमेंट, ने कारोबार को मजबूती दी है.
IT, ऑटो और केमिकल सेक्टर में भी सुधार
रिपोर्ट में कुछ ऐसे सेक्टरों की भी पहचान की गई है, जिनके Asset Turnover Ratio में FY25 में गिरावट के बाद FY26 में सुधार हुआ. इनमें ऑटोमोबाइल और ऑटो एंसिलरीज, IT, केमिकल्स, नॉन-फेरस मेटल्स, डायवर्सिफाइड कंपनियां और डायमंड-ज्वेलरी शामिल हैं. IT सेक्टर को लेकर रिपोर्ट में कहा गया कि डेटा सेंटर और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) की ओर बढ़ते जोर से भविष्य में अधिक निवेश की जरूरत पैदा हो सकती है. वहीं इंफ्रास्ट्रक्चर गतिविधियों में तेजी का फायदा Chemicals और Non-Ferrous Metals सेक्टर को भी मिला है.
इन सेक्टरों में दिखी कमजोरी
हालांकि सभी उद्योगों में तस्वीर एक जैसी नहीं है. Crude Oil, Telecom, Iron & Steel और Construction Materials सेक्टरों में Asset Turnover Ratio में गिरावट दर्ज की गई है. Bank of Baroda ने हालांकि आगाह किया है कि इस गिरावट को सीधे तौर पर भविष्य में कमजोर निवेश का संकेत नहीं माना जाना चाहिए. खासकर Capital Intensive सेक्टरों में बड़ी परियोजनाओं को पूरा होने और नई क्षमता से उत्पादन शुरू होने में लंबा समय लगता है.
उज्जैन से दिल्ली-मुंबई एक्सप्रेसवे का सीधा कनेक्शन, 16 घंटे का सफर अब सिर्फ 9 घंटे में!
निवेश बढ़ने के शुरुआती संकेत
रिपोर्ट का निष्कर्ष है कि मौजूदा आंकड़े उन उद्योगों की पहचान करने के लिए शुरुआती संकेत दे रहे हैं, जहां आने वाले समय में निवेश बढ़ सकता है. हालांकि वास्तविक Capital Expenditure कई अन्य बातों पर भी निर्भर करेगा. इसमें कंपनियों के पिछले निवेश, भविष्य की मांग, नई क्षमता की जरूरत और उत्पादों में विविधता लाने जैसी रणनीतियां शामिल हैं. कुल मिलाकर, Electricals, Capital Goods, Infrastructure और FMCG में लगातार बढ़ता Asset Turnover Ratio इस बात का संकेत दे रहा है कि कंपनियों की मौजूदा क्षमता पर दबाव बढ़ रहा है. अगर मांग का मौजूदा ट्रेंड कायम रहता है तो आने वाले वर्षों में इन सेक्टरों में नए निवेश का रास्ता खुल सकता है.


