Sharadiya Navratri 2026: शारदीय नवरात्रि हिंदू धर्म के प्रमुख पर्वों में से एक है. इस दौरान मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. नवरात्रि की शुरुआत प्रतिपदा तिथि पर घटस्थापना या कलश स्थापना के साथ होती है. साल 2026 में शारदीय नवरात्रि की शुरुआत 11 अक्टूबर, रविवार से होगी. इसी दिन घरों और मंदिरों में विधि-विधान से कलश स्थापना की जाएगी. पंचांग के अनुसार घटस्थापना प्रतिपदा तिथि में दिन के शुरुआती एक-तिहाई हिस्से में करना शुभ माना जाता है.
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कलश स्थापना का शुभ मुहूर्त
2026 में शारदीय नवरात्रि की घटस्थापना 11 अक्टूबर को होगी. स्थान के अनुसार मुहूर्त में थोड़ा अंतर हो सकता है. उदाहरण के लिए राजस्थान के अलवर में घटस्थापना का शुभ समय सुबह 6:21 बजे से 10:14 बजे तक बताया गया है. इसी दिन अभिजीत मुहूर्त सुबह 11:47 बजे से दोपहर 12:33 बजे तक रहेगा.
पंचांग के अनुसार प्रतिपदा तिथि 10 अक्टूबर की रात से शुरू होकर 11 अक्टूबर की रात तक रहेगी. घटस्थापना करते समय स्थानीय शहर के पंचांग के अनुसार समय देखना बेहतर रहेगा, क्योंकि सूर्योदय और मुहूर्त में स्थान के हिसाब से अंतर हो सकता है.
कलश स्थापना के लिए जरूरी सामग्री
कलश स्थापना के लिए मिट्टी का पात्र या चौड़ा बर्तन, स्वच्छ मिट्टी, जौ, तांबे या मिट्टी का कलश, जल, आम या अशोक के पत्ते, नारियल, लाल कपड़ा, मौली, रोली, अक्षत, फूल, सुपारी, सिक्के और पूजा सामग्री की जरूरत होती है. इसके अलावा मां दुर्गा की तस्वीर या प्रतिमा, दीपक, धूप, अगरबत्ती, फल और प्रसाद भी रखा जाता है.
नवरात्रि में कलश के नीचे जौ बोने की भी परंपरा है. इसे शुभता और समृद्धि का प्रतीक माना जाता है. जौ को मिट्टी में बोकर उसके ऊपर कलश स्थापित किया जाता है.
कलश स्थापना की पूजा विधि
सबसे पहले पूजा स्थल की अच्छी तरह सफाई करें और गंगाजल या साफ जल का छिड़काव करें. इसके बाद पूजा की चौकी लगाकर उस पर लाल या पीले रंग का कपड़ा बिछाएं. चौकी के सामने साफ मिट्टी या मिट्टी से भरे पात्र में जौ बोएं.
इसके बाद कलश में स्वच्छ जल भरें. इसमें अक्षत, सुपारी, सिक्का और अन्य पूजन सामग्री डाल सकते हैं. कलश के मुख पर आम या अशोक के पत्ते लगाकर उसके ऊपर नारियल रखें. नारियल को लाल कपड़े या मौली से बांधकर कलश पर स्थापित किया जाता है.
इसके बाद कलश और मां दुर्गा की विधि-विधान से पूजा करें. रोली, अक्षत, फूल और प्रसाद अर्पित करें. दीपक और धूप जलाकर मां दुर्गा का ध्यान करें और नवरात्रि के नौ दिनों तक नियमित पूजा का संकल्प लें.
इन बातों का रखें ध्यान
घटस्थापना के लिए साफ और शांत स्थान चुनना चाहिए. कलश को ऐसी जगह रखें जहां नौ दिनों तक उसकी नियमित पूजा की जा सके. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार घटस्थापना रात में नहीं करनी चाहिए और प्रतिपदा तिथि के दौरान ही इसे करना उचित माना जाता है. पंचांग में चित्रा नक्षत्र और वैधृति योग से बचने की सलाह भी दी जाती है, हालांकि इन्हें पूर्ण रूप से निषिद्ध नहीं माना गया है.
नवरात्रि के दौरान श्रद्धालु अपनी परंपरा और सामर्थ्य के अनुसार मां दुर्गा की पूजा, पाठ, आरती और व्रत करते हैं. अलग-अलग क्षेत्रों में पूजा की विधि और सामग्री में कुछ स्थानीय अंतर भी हो सकता है.
नोट: घटस्थापना का सटीक समय शहर के अनुसार बदल सकता है. इसलिए अपने स्थानीय पंचांग के अनुसार मुहूर्त की पुष्टि करना उचित है.


