New Delhi News: दिल्ली के लाल किला ब्लास्ट मामले में गुरुवार को राउज एवेन्यू स्थित विशेष NIA अदालत ने आरोप तय करने को लेकर सुनवाई का कार्यक्रम तय कर दिया. विशेष न्यायाधीश प्रशांत शर्मा की अदालत में 6 नवंबर से राष्ट्रीय जांच एजेंसी की ओर से दलीलें सुनी जाएंगी. वहीं, 14 नवंबर को आरोपियों की ओर से पक्ष रखा जाएगा. अदालत ने 6 से 27 नवंबर तक इस मामले में दलीलें सुनने की तारीखें निर्धारित की हैं.
यह मामला नवंबर 2025 में लाल किले के पास हुए कार बम विस्फोट से जुड़ा है. NIA ने इस मामले में आरोपियों के खिलाफ करीब 7,500 पन्नों की चार्जशीट दाखिल की है. जांच एजेंसी ने 580 से अधिक गवाहों का हवाला दिया है. मामले में मुख्य आरोपी बताए गए डॉ. उमर उन नबी की विस्फोट में मौत हो गई थी, जबकि एक आरोपी फरार बताया गया है.
11 आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट, बाद में दो और नाम जुड़े
NIA की ओर से अदालत में बताया गया कि 11 आरोपियों के खिलाफ पहली चार्जशीट 14 मई को दाखिल की गई थी. इसके बाद 27 जून 2026 को दो आरोपियों के खिलाफ पूरक चार्जशीट दाखिल की गई.
जांच एजेंसी ने आमिर राशिद मीर, जसीर बिलाल वानी, डॉ. मुजम्मिल शकील, डॉ. अदील अहमद राथर, डॉ. शाहीन सईद, मुफ्ती इरफान अहमद वागे, सोयब, डॉ. बिलाल नसीर मल्ला और यासिर अहमद डार समेत कई लोगों को आरोपी बनाया है. एजेंसी के अनुसार, मुख्य साजिशकर्ता बताए गए डॉ. उमर उन नबी की मौत के कारण उनके खिलाफ कार्यवाही समाप्त किए जाने का प्रस्ताव है.
ब्लास्ट में 11 लोगों की मौत, कई घायल
NIA के मुताबिक, लाल किले के पास हुए इस विस्फोट में हाई-इंटेंसिटी व्हीकल-बॉर्न इम्प्रोवाइज्ड एक्सप्लोसिव डिवाइस का इस्तेमाल किया गया था. धमाके में 11 लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए. विस्फोट से आसपास की संपत्तियों को भी भारी नुकसान पहुंचा था.
जांच एजेंसी ने आरोपियों के खिलाफ गैरकानूनी गतिविधियां (रोकथाम) अधिनियम यानी UAPA, भारतीय न्याय संहिता (BNS), विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, आर्म्स एक्ट और सार्वजनिक संपत्ति नुकसान निवारण अधिनियम की धाराएं लगाई हैं.
AQIS से जुड़े संगठन के लिए काम करने का आरोप
NIA ने आरोप लगाया है कि सभी आरोपी अंसार गजवत-उल-हिंद से जुड़े थे. एजेंसी के मुताबिक, यह संगठन अल-कायदा इन द इंडियन सबकॉन्टिनेंट का एक सहयोगी संगठन है, जिसे केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 2018 में आतंकी संगठन घोषित किया था.
जांच एजेंसी का दावा है कि इस मामले की जांच जम्मू-कश्मीर, हरियाणा, उत्तर प्रदेश, महाराष्ट्र, गुजरात और दिल्ली-एनसीआर तक की गई. अभियोजन शिकायत में 588 मौखिक गवाहों, 395 से अधिक दस्तावेजों और 200 से ज्यादा जब्त सामग्री को शामिल किए जाने की बात कही गई है.
‘ऑपरेशन हेवनली हिंद’ के जरिए साजिश रचने का दावा
NIA ने अपनी जांच में एक बड़ी कथित आतंकी साजिश का खुलासा होने का दावा किया है. एजेंसी के अनुसार, आरोपियों ने 2022 में श्रीनगर में एक गुप्त बैठक के दौरान संगठन को ‘AGuH Interim’ के रूप में दोबारा संगठित किया था.
जांच एजेंसी का आरोप है कि इसके बाद ‘ऑपरेशन हेवनली हिंद’ नाम से अभियान चलाया गया, जिसका उद्देश्य लोकतांत्रिक रूप से चुनी गई सरकार को हटाकर शरिया कानून लागू करना था. NIA के मुताबिक, आरोपियों ने नए सदस्यों की भर्ती, कट्टरपंथी विचारधारा के प्रचार, हथियार और गोला-बारूद जमा करने तथा व्यावसायिक रूप से उपलब्ध रसायनों से विस्फोटक तैयार करने की गतिविधियां कीं.
TATP विस्फोटक और हथियारों की खरीद का भी आरोप
NIA ने दावा किया है कि लाल किला ब्लास्ट में इस्तेमाल किया गया विस्फोटक ट्राइएसीटोन ट्राइपेरॉक्साइड (TATP) था, जिसे कथित तौर पर कई प्रयोगों के बाद तैयार किया गया था.
जांच एजेंसी के अनुसार, प्रतिबंधित हथियारों की अवैध खरीद भी की गई थी. इनमें AK-47 राइफल, क्रिंकोव राइफल और देशी पिस्तौल शामिल हैं. इसके अलावा रॉकेट आधारित और ड्रोन से संचालित IED के जरिए सुरक्षा प्रतिष्ठानों को निशाना बनाने के प्रयोग किए जाने का भी आरोप लगाया गया है.
फॉरेंसिक जांच से हुई मृत आरोपी की पहचान
NIA ने बताया कि वैज्ञानिक और फॉरेंसिक जांच के जरिए विस्फोट में मारे गए आरोपी डॉ. उमर उन नबी की पहचान स्थापित की गई. इसके लिए DNA फिंगरप्रिंटिंग और वॉयस एनालिसिस जैसी तकनीकों की मदद ली गई.
गुरुवार को अदालत में NIA की ओर से विशेष लोक अभियोजक माधव खुराना, त्रिशा मित्तल और लोक अभियोजक अनिल डबास पेश हुए. अब 6 नवंबर से आरोप तय करने के मुद्दे पर अभियोजन पक्ष की दलीलें सुनी जाएंगी. इसके बाद 14 नवंबर को आरोपियों का पक्ष रखा जाएगा.
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